मेरठ की घटना मेरे हृदय को चीरती हुई अंतर्मन में धंस गई और मुझको लिखने के लिए विवश कर दिया।
एक औरत कैसे इतनी निर्दयी हो सकती है। नारी को ममता और प्रेम की देवी कहा जाता है ।क्या अब सचमुच कलयुग का अंतिम चरण आ गया है। अथवा कलयुग के अंतिम चरण के लक्षणों से भी बढ़कर आज भारत जैसी देवभूमि में जो घटनाएं हो रही हैं। उन्हें देखते हुए इन घटनाओं ने उन्हें पीछे छोड़ दिया है।
एक औरत जो तीन साल की बच्ची की मां भी थी ।इसके मन में उस मां के बारे में बिल्कुल दया नहीं आई। जिसने उसके पति सौरभ को दूध पिलाकर कितने प्यार से पाला होगा। अपने मन में कितने सपने संजोये होंगे ।इस औरत ने सौरभ के मन में उसके मां-बाप के बारे में कितना जहर भरा होगा कि वह मां-बाप से अलग हो गया ।मां-बाप से ही अलग नहीं हुआ बल्कि एक औरत के त्रियाचरित्र में ऐसा फंसा की अपने ही मां-बाप को मन से भी त्याग दिया। तभी सौरभ की मां की ममता अपने बेटे से मिलने के लिए मन ही मन तड़प रही थी। पर अपने ही बेटे से बात करने की हिम्मत नहीं जुटा पाई । इसलिए उसने अपनी बेटी से कहा- भाई को फोन लगाकर पता करो ,होली पर घर आएगा या नहीं। बहन की भी भाई से बात करने की हिम्मत नहीं हुई। तभी उसने व्हाट्सएप से मैसेज किया ,मैसेज में जो बात हो रही थी वह सौरभ की क़ातिल दुष्ट औरत कर रही थी ।उसका भाई तो मर चुका था ।
इस नशेड़ी औरत ने कैसे अपने कुत्सित स्वार्थ के लिए अपने पति का सिर काटकर पति के टुकड़े ड्रम में भरकर अपने प्रेमी के साथ घूमने चली गई ।
इसी तरह कुछ दिन पहले पंद्रह वर्ष के बेटे ने जब मां को गलत कपड़े पहनकर इंस्टाग्राम पर रील बनाने से मना किया तो मां ने बेटे की ही जान ले ली । आज ही अखबार में पढा उत्तर प्रदेश में एक लड़की ने प्रेमी के साथ मिलकर शादी के पहले ही अपने पति को मारने की साज़िश रच डाली। और शादी से मिले पैसों से सुपारी देकर, शादी के पन्द्रह दिन बाद ही पति की हत्या कर डाली ।इस तरह की घटनाओं से कमजोर दिल वाली मातायें शायद अपने बेटों को कुंवारा ही रखना पसंद करें ।
ऐसी अनगिनत घटनाएं समाज में हो रही हैं। नैतिकता बिल्कुल समाप्त होती जा रही है ,रिश्ते नाते तार- तार हो रहे हैं ।बाप का अपनी बच्ची से दुराचार ,दादा को परिवार का वटवृक्ष माना जाता था। आज दादा का पोती के साथ हैवानियत जैसी घटनाएं शहरों में ही नहीं गांवों में भी बढ़ रही है।
कड़े से कड़े कानून समाज की बिगड़ी हुई मानसिकता नहीं बदल सकते ।अब सरकार को चाहिए अश्लील फिल्में बनाने वाली कंपनियों को भारत में पूर्णत प्रतिबंधित करें। शराब को पूरे भारत में बंद करें। मैकाले की शिक्षा को पूर्णता बदलकर, भारतीय व्यावसायिक शिक्षा प्रणाली लाई जाए। इसमें कक्षा एक से ही धार्मिक, नैतिक शिक्षा की संबंधित कहानियां सम्मिलित की जाए। जब कुछ स्कूलों में बच्चों के मन में बचपन से ही धार्मिक कट्टरता भरते हुए उन्हें आतंकवादी बनाया जा सकता है। तो कक्षा एक से ही बच्चों को नैतिकता के द्वारा नींव मजबूत कर, उन्हें देश प्रेमी, समाजसेवी ,चरित्रवान , नागरिक क्यों नहीं बनाया जा सकता । आज समाज को कानून बदलने से ज्यादा शिक्षा का स्तर बदलने की आवश्यकता है ।हर गांव शहर में ऐसे गुरुकुल बनाने की आवश्यकता है। जहां सभी वर्णों के बच्चे बिना भेदभाव के अपनी रुचि के अनुसार ,ऐसा ज्ञान अर्जित कर सके ।जो स्वयं का व्यवसाय करते हुए भारत को आर्थिक रूप से भी मजबूत करें। न कि उच्च शिक्षा प्राप्त करके भी बेरोजगार बनकर गलत धंधे और नशे की आदि बने। जज को न्याय की मूर्ति कहा जाता है। लेकिन न्याय के देवता उच्च पद पर बैठकर अपनी आत्मा को बैचकर अन्याय करते हैं। एक बारह साल की बच्ची को गलत स्पर्श करते हुए , उसकी सलवार का नाडा खोलना हैवानियत और अमानवीय की श्रेणी में नहीं मानते। इस तरह से जब तक भारत में बच्चों को आदर्श महापुरुषों की चरित्र के संस्कार नहीं डाले जायेंगे तब तक समाज में सुधार नहीं होगा।अब समय आ गया है ।प्रत्येक व्यक्ति समाज सुधार में सरकार का सहयोग करे न कि यह सोचे कि जब मेरे परिवार में कोई घटना घटेगी तभी कोई कदम उठाया जाएगा।
हेमलता राजेंद्र शर्मा मनस्विनी साईंखेड़ा नरसिंहपुर मध्यप्रदेश