पंकज सीबी मिश्रा , राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी, सम्पर्क सूत्र 8808113709
महोपनिषद् 4.71 वो में एक सूक्ति है :- अयं निजः परोवेति गणना लघुचेतसाम् ! उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्॥ जिसका आशय है कि संकीर्ण सोच वाले ही “अपना–पराया” करते हैं; उदारजन पूरी पृथ्वी को परिवार मानते हैं।
आज जो लोग सांप्रदायिक राजनीति, जातिवाद या संकीर्ण राष्ट्रवाद को धर्म का रूप देते हैं, वे शायद इस श्लोक की आत्मा को जानते नहीं या जानबूझकर नजरअंदाज करते हैं। धर्म का मूल उद्देश्य विभाजन नहीं, समन्वय है — और यही सनातन एवम् अन्य सभी धार्मिक विचारधारा की गहराई है। मानवता पर राजनीतिक प्रयोग करने वाले आज उतने ही दोषी है जितने दोषी समाज में भ्रष्टाचार फैलाने वाले मध्यम वर्ग के अपराधी। आज भी 60% सरकारी बील्डिंग जर्जर अवस्था में है जिसमें सर्वाधिक संख्या स्कूल और अस्पतालों की है। सरकार हर वर्ष इन्हे रिपेयर करने के लिए मद से पैसे देता है और वहाँ के प्रभारी इन पैसों को खा जाते है। बीते दिनों दो बड़ी घटनाएं मन को झनझोड़ गई। एक तो यूपी में जुलाई के प्रथम सप्ताह, जौनपुर जिले के केराकत खंड में एक प्राथमिक स्कूल की पूरी दिवार ढह गई दूसरा बड़ा हादसा जुलाई के अंतिम सप्ताह में ज़ब राजस्थान केजिले झालावाड़ के मनोहर थाना स्कूल बिल्डिंग गिरने का हादसा पूरे देश के सोशल मीडिया पर चर्चित हो गया। मनोहर थाना के पास गुराड़ी में एक मिडिल स्कूल की बिल्डिंग भर भरा कर गिर गई जिसमें 6 छोटे-छोटे बच्चे दिवंगत हो गए ! लगभग डेढ़ दर्जन बच्चे बुरी तरह घायल है। आंकड़ो में बताया गया है कि दोनों प्रदेशो में 40 साल पुरानी कई बिल्डिंग है जो पूरी तरह जर्जर हालत में है ! सरकार और सरकारी तंत्र केवल धन उगाही में व्यस्त है।और हम यदि इन दुर्घटनाओ के बाद कुछ सवाल पूछ लें तो हंगामा। जो पूरे जिले में ही नहीं पूरे देश में अब पूछे जा रहे हैं ! आखिर ऐसे दुर्घटनाओ का जिम्मेदार कौन है ?
कई न्यायालय और नगर पालिका तक जर्ज़र बिल्डिंग में संचालित है। लाखों का वेतन देने से अच्छा है प्रशासन इन बिल्डिंग को सुधारे। बिल्डिंग की जर्जर हालत से उच्च अधिकारियों को सूचित करता रहता हूँ कलम के माध्यम से ! उच्च अधिकारी जिन्होंने सूचना के बाद भी प्रकरण की गंभीरता को ध्यान में नहीं रखा और हादसे की प्रतीक्षा करते रहे उनकी जिम्मेदारी तय हो ! यूपी के शिक्षा प्रशासन पर तो सवाल ही सवाल है। साथ ही साथ हर बिल्डिंग की एक निश्चित समय में यूटिलिटी इंस्पेक्शन होना चाहिए पर होता है क्या ! क्या सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा कभी जर्जर बिल्डिंग का यूटिलिटी इंस्पेक्शन किया गया या नहीं ? यदि किया गया तो कब किया गया और यदि ऐसा लगता था की इस बिल्डिंग में कोई हादसा हो सकता है तो फिर सार्वजनिक निर्माण विभाग ने सरकार को सूचित क्यों नहीं किया जाता ? सवाल जिला प्रशासन पर भी है स्थानीय उपखंड अधिकारी ब्लॉक लेवल शिक्षा अधिकारी और तमाम तरह के अधिकारी जो उप खंड स्तर पर कार्य करते हैं क्या उनकी जवाबदारी नहीं बनती ! ऐसे हादसे का पूर्व आभास वह लोग करते है जिन्हे कल के भविष्य को इस तरह काल का ग्रास बनने से रोकनें का महत्व समझ आता हो। सवाल क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों पर भी है गांव के पंच सरपंच पंचायत प्रतिनिधि जिला परिषद सदस्य विधायक और सांसद कहीं ना कहीं इस कोताही के जिम्मेदार है। क्या सरकार और प्रशासन इन जिम्मेवार अधिकारियों पर और नेताओं पर कभी कोई मुकदमा दर्ज करेगी या हम जैसे पत्रकार जो पूरी पृथ्वी को वसुधैव कुटुंबकम मान ऐसी खबर उठाने के लिए प्रताड़ित होते रहेंगे ! जिन अभिभावकों के छोटे-छोटे बच्चे मौत का शिकार हुए हैं वह सिर्फ बच्चों की मौत नहीं है उनके भविष्य की मौत है उनके सपनों की मौत है क्या संवेदनशील प्रशासन और सरकार उन अभिभावकों के लिए भी कोई मुआवजा दे पाएगा ? वैसे तो कोई भी राशि उनके दुख की गंभीरता को कम नहीं कर सकते लेकिन संवेदना के पृष्ठ पर जरूर एक हस्ताक्षर कर सकती है ! चेतावनी है यह सोए हुए प्रशासन के लिए की वह जिले भर में सरकारी इमारतो की जांच कराए , क्योंकि यह सिर्फ स्कूल का ही मामला नहीं है गांव में कई जगह है स्कूलों की इमारत के अलावा पंचायत की इमारतें और अन्य सार्वजनिक जगहों पर भी जर्जर हालत में भवन मौजूद है ! यू तो हमारे प्रदेश में कई विसंगतियां है लेकिन फिर भी एक बार सार्वजनिक निर्माण विभाग से तीन दशक पुरानी सभी इमारत की जांच प्रशासन को करनी चाहिए ताकि दोबारा ऐसा हादसे से बचा जा सके। स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों को भी और आम आदमी को भी इसका ध्यान रखना चाहिए। आखिर हम लोग हादसे का ही क्यों इंतजार करते हैं ? जिले भर की संवेदनाएं उन बच्चों के साथ है जो जर्जर स्कूलों में पढ़ने को बाध्य है। परमपिता परमात्मा से यही प्रार्थना है की राजस्थान के झलवाड़ में जो दुख बच्चों के परिवार पर आया है उन्हें सहने की शक्ति प्रदान करें और उन बच्चों की आत्माओं को अपने चरणों में स्थान दे ! उन बच्चों की मौत पर तो हर व्यक्ति की आंखें नम है सब लोगों की श्रद्धांजलि उनके लिए थी लेकिन एक श्रद्धांजलि निष्क्रिय प्रशासन और गाफिल व्यवस्था के लिए भी आम आदमी और वोटरों को देनी चाहिए ताकि सरकार को समझ आए ! आने वाले दिनों में पुनः नेताओं के दौरे होंगे घड़ियाली आंसू बहाए जाएंगे, कुछ लोगों को निलंबित कर दिया जाएगा, मुआवजे की बात होगी पर जिम्मेवारी कोई तय नहीं करेगा ? आप क्या सोचते हैं आपकी राय से अवगत कराए !
