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काश हर चीज़ गुलाबी हो जाती

काश हर चीज़ गुलाबी हो जाती

फिर अन्य रंगों का क्या होता

इंद्रधनुष में सात रंगी न होता

आसमां नीला न होता और

फूल,फल सब बहुरंगी न होते

पत्तों का रंग हरा न होता

न ही धरती अंतरिक्ष से काली दिखती

न ही अंधेरे का कोई सम्राज्य होता।

काश हर चीज़ गुलाबी हो जाती

गोरी के गाल ही गुलाबी नहीं दिखाई देते

सब कुछ गुलाबी गुलाबी हो जाता

तो दिल का भी रंग गुलाबी ही जाता

प्यार करने वालों पर साइड इफेक्ट्स

शायद कुछ और ही होता क्योंकि

लाल रंग ख़तरे की बड़ी निशानी है

गुलाबी रंग से प्रेम प्रागाढ़ होता।

काश हर चीज़ गुलाबी होती

कपड़ों के चयन के साथ

इंसानों को चुनने में रंगभेद न होता

न कोई काला होता न कोई गोर

दुनिया में सब मानुष बराबर होते।

शायद कुछ तत्वों की कमी रहती

दुनिया में झगड़ें फ़साद कम होते

लोगो के सोचने समझने के तरीक़ा

शांति और प्रेम की ओर होता

शायद एक से अधिक बुद्ध पैदा होते

सभ्यता का संधर्ष न दुनिया देखती

काश हर चीज़ गुलाबी हो जाती।

कुमारी अर्चना

सहायक प्राध्यापिका

मौलिक एवं अप्रकाशित रचना

कटिहार,बिहार

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