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ठिठौली :  निशा भास्कर 

लट लटकानी डोले गाल पर गुजरिया 

जरा सुलझा दो मनमोहन साँवारियाँ। 

चुनर हटाए वेणी खोले रे बावरिया।

सुध बिसराई राधा बाजे जब बाँसुरियां।

लट सुलझाते कान्हा खोई रे मुंदरियां 

गुंज माल छिन्न भई भरी रे डगरिया।

बाँधी भाव बंधन में हार पहिरावै राधा 

सखियन ढूँढें अपने प्यारे की मुंदरियां।

 मुदित मलंग कंठ बोली ललिता सखी 

 मिल गई मोहे माधव तेरी रे मुंदरियां 

 दोगे दुर्लभ अभिलषित सौगात मुझे 

 बदले में वापस मैं करूँगी मुंदरियां।

 मधुर मुस्कान छवि बांकी रे नजरिया 

 ललिता से कहे कान्हा चूम ले अंगुरिया 

 इतराकर चूमती बोली ललिता सखी

 राम करे खोए अब तेरी रे मुरलियां।

 निशा भास्कर 

 नई दिल्ली।

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