पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी

वैश्विक युद्ध में मेरा पक्ष बस इसी बात से तय होगा कि टीएमसी किस पक्ष में खड़ी हैं। अगर आज ममता दीदी कह दें कि वो ईरान खामनेई गैंग से साहनुभूति अनुभूति और ताल्लुक रखती है तो कसम युसूफ पठान कि मैं कल ही फेसबूकिया कामरेड हो सकता हूं। मैं अखिल विश्व की दीदी सुश्री स्वरा का वह चरम पंथी भाषण कभी भूल नहीं पाता जब ज़ब उन्होंने नसीर की छाती ठोक कर कहा था, डरा होना बुद्धिजीवी होने की पहली शर्त है, वे मुझे भले भूल जाएं, मैं नहीं भूलता कि सोशल मिडिया पर तगड़ा बुद्धिजीवी होना मेरा प्रथम कर्तव्य है । जिस तरह विश्व कप जीतने के बाद सूर्य कुमार यादव पूरी टीम के साथ पद्मनाभ मंदिर के साथ साथ अनेक मंदिरों में जा रहे थे तो कीर्ति के पेट में जेहादी कीड़ा आजाद हो रहा था उसी तरह टीएमसी बंगाल में हर हार के बाद इश्लामिक बस्तियों में जाती हैं आखिर आस्था का सवाल है। ये भगवान की कृपा के सामने नतमस्तक होते हैं, आभार जताते हैं वे आतंक के सामने सर नवाते है। बताइए ! हमारे देश के सेक्युलर झुलसे जा रहे हैं मस्जिद क्यों नहीं गए ? चर्च क्यों नहीं गए ? टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद तब तो अपने कपड़े फाड़ने को तैयार रहे ! अपने नेताओं और कुर्सी के प्रति श्रद्धा बड़ी बात है। अभी कल ही मुझसे एक प्रसिद्ध तांत्रिक बाबा पीलासी खां ने बताया कि , ‘झगड़ा यूं ही नहीं हो रहा, ट्रंपवा के जगरनाथवा बो के दू हप्ता में डिलवरी के टाईम देले बिआ… और बौद्ध लईकी ऋषि कश्यप की नातिन होलिका को अपनी बुआ बता रही। बौद्ध लोग अपनी मौसी तक बताने लगे और आपको लगता है कि देश में एकता नहीं है ? भारत आजाद हो गया है कीर्ति साहेब । पंचायत चुनाव में सबको एक बराबर पैसा मिलेगा, पर विधानसभा में हिसाब होगा। बामन एक वोट दस रुपिया और गैर सवर्ण ऊजीसी के प्रभाव के कारण एक भोट का एक हजार… यूपी की यूजीसी एक्स्ट्रा… तब आयेगा साम्यवाद।
ऐसा नहीं कि शोषक को बकरा और शोषित को चिकन समाज घोषित नहीं किया जा रहा , वह भी 80% फार्म वाला। कवि अपने कविता संग्रह में कहते हैं, “इश्क और प्यार का मजा लीजिए – थोड़े अचार का मजा लीजिये, बात है हजार का मजा लीजिये, बाकि उधार का मजा लीजिये । चरित्रहीन होगा वह कवि जो उधार ना खाया हो और हाय से निकले होंगे गीत जिन्हें नेहा राठौर ने ना गाया हो … जाने किसके चक्कर में मिसिर ज्जी ठंडा पड़े और पूजा पाठ छोड़ कर वीर रस लिखने लगे।तौबा…अतिवाद के प्रति मोहग्रस्त व्यक्ति से संतुलित समझदारी की उम्मीद नादानी कही जाएगी…कुछ लोग अपने जीवन के कई दशक लेफ्ट आइडियोलॉजी के एक्सट्रीम पर बिताते हैं, और फिर अचानक बुद्धि खुलती है… तो वह राइट के एक्सट्रीम पर पहुँच जातें हैं, लेकिन उनका यह दावा उन दोनों के एक्सट्रीम पर रहते हुए बरक़रार रहता है कि वह सबसे बड़े समझदार और विद्वान हैं। उनके अलावा इस अखिल ब्रह्माण्ड में कोई नहीं जो समझदार है। जबकि सत्य इन दोनों अतियों के कहीं बीच में परिस्थिति के अनुसार थोड़ा सा दायें बायें रहता है। ऐसे एक्सट्रीम लेफ़्टिस्ट और एक्सट्रीम राइटिस्ट लोगों से जरा दूरी बनाकर रखें, वरना आपको यह सारा संसार ही एक साज़िश नज़र आयेगा और हर व्यक्ति उस साज़िश का हिस्सा। आप खुद सोचिए, आज जब ग्रहण लगा था तो रावन को रोहणी से मिलने की क्या जरूरत थी ? मोहब्बत क्या फेसबुक वाली नेतागिरी है जो बोया कोई और काटेगा कोई और ! का माइक खरीदते ही शुरू हो जाते है सौरभ द्विवेदी ! ऐ मास्टर, रजिस्टर दिखाओ कह कर वसूली नहीं होती क्या ? यह नहीं चलेगा। मोहब्बत के लिए पूर्ण ढिढई और उधार के लिए पूर्ण समर्पण और सतत प्रयास की जरूरत होती है। नहीं जानते तो मुझसे पूछो। लेकिन मैं क्यों बताऊंगा तुमको ? कौन कब गद्दार निकल जाय कोई नहीं जानता…बताओ यार, हम हिंदुत्व के नाम पर वोट पर वोट देते रहे, इधर सरकार की कृपा से आधा यूपी बौद्ध हो गया। अब मोदी की कसम खा कर बता रहे हम कि हम जैसों को ना छेड़ो नहीं तो क्या कहा जाएगा ? तुम छोड़ो, मैं ही बता देता हूं। जिस देश में चर्बी वाले नकली घी को पूजा वाला घी कहा जाता हो, वहां की जनता केजरीवाल के रोने पर पिघल जाय तो क्या आश्चर्य? मित्रों, केजरीवाल जी ने कहा है कि कोर्ट ने उन्हें कट्टर ईमानदार बता कर छोड़ा है। केजरीवाल जी हमें वह बनाने की कोशिश कर रहे हैं जो हम ऑलरेडी हैं। भगाओ यार. बीम मार्मी चीफ ने अमेरिका और इजरायल को चुनौती दी है। पता चला है कि करन वाले जौहर भी उनके समर्थन में खड़े हैं। अब मुझे विश्वास है कि युद्ध रुक जाएगा। अगर नहीं रुका तो केजरीवाल जी नेतन साहू पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाएंगे। अभी कल ही बता रहे थे, उनके पास साढ़े चौदह हजार पन्नों के सुबूत हैं। धीरे धीरे वे सभी लोग खारिज किए जा रहे हैं जिन्होंने अपना पूरा जीवन हिंदुत्व के लिए समर्पित किया, गला दिया। वजह एक है कि वे मोदी की आलोचना तो करते हैं पर मोदी को गाली नहीं देते। कल से लाखों की संख्या में फेक आईडी एक्टिव हो गई हैं जो दिन रात मोदी को गाली देने में, मोदी को खारिज करने में, ये मोदी की समालोचना करने वाले हैंडल पर आकर भद्दी भद्दी टिप्पणी करते हैं। वापस मूल बात पर आते हैं, सरकार की हर नीति का समर्थन नहीं किया जा सकता, लेकिन हर नीति का विरोध भी नहीं किया जा सकता। ट्रेंड जो चल रहा है वह यह कि ऐसी ऐसी बातें कहो कि सरकार फंस जाए।नं
राजकुमार भाटी आए दिन ब्राह्मणों के विरुद्ध जहर उगलता है, राहुल गांधी के सोनीपत जाने पर उस घर की मूर्तियां हटा दी जाती हैं। वे लोग अपनी सोच को लेकर बिल्कुल स्पष्ट हैं । गौमाता को लेकर आंदोलन करने वाले लोगों के पास इतना भी सामर्थ्य नहीं कि एक नंदी और एक गौमाता को अपने घर में पाल लें। तो बात यह है कि नकली आईडी में छिपे लोग,अनाप शनाप लिख कर , गाली गलौज कर अपना घर चलाने वाले लोग समाज का नेतृत्व करने का दंभ कितना भी कर लें, इनमें इतना साहस नहीं कि यह एक तरुण कुमार के घर जाकर उसकी मां के आंसू पोंछ सकें और उसे न्याय दिलाने का आश्वासन दे सकें, उस कार्य के लिए रेखा गुप्ता ही हैं। इतना साहस नहीं है कि किसी हिंदू बालक बालिका के लिए ढाल बन कर खड़े हो सकें।
