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शीर्षक-लघु व्यंग  झूले के संग

कुछ दिन पहले तीज पार्टी में एक एक सखी  ने स्टिकर डाला था जिसमें झूला झूलते हुए आनंद लेते हुए 

मुझे वह दिन याद आ गए बचपन के  दिन जब मैं स्कूल में झूला पंगे डाल डाल कर झूलती थी ।

हमारा स्कूल में एक झूला विशालकाय था जिसमें तीन तीन झूले थे .लंच के समय हम ऐसे मैदान में दौड़ते जैसे  रेस लगी हो पहले मैं पहले मैं उसी चक्कर में 1 दिन खूब ऊंचे झूला झूलते हुए  झूला बिल्कुल रोड के ऊपर से घूम कर नीचे आ गया ।मुझे चोटे लगी चक्कर आ गए ।लड़कियां सब मुझे उसी हाल में छोड़ कर भाग गई ।मैं डर से रोने लगी घर में डांट पड़ेगी या फिर स्कूल के प्रिंसिपल पेरेंट्स  के पास लेटर भेजकर शिकायत करेंगे

उस दिन के बाद से मैं झूले के पास जाती पर डरती हिम्मत करके धीरे-धीरे फिर मैं आदत से बाज नहीं आई

कई साल बीत गए आज फिर मुझे सहेली को झूलते हुए देख झूला झूलने का शौक  चकराया ।मैंने पति से अपनी इच्छा जाहिर की ।

उन्होंने कहा दिमाग तो सही है  ।अपने स्कूल के दिनों की बात  बता बताइ।उन्होंने याद दिलाया की पिछले साल तुम्हारे सर पर चोट लगी थी तो हॉस्पिटल के चक्कर लगाने ओर पैसे लगे ।

 कहां गया कि वर्षों के बाद दिमाग की चोट उभर जाती है या उसका साइड इफेक्ट होता है -बच्चों ने भी कहा।

  मैं  चिड़ गई 1 दिन मैंने देखा  पार्क में झूले के पास एक सावधानी लिखी हुई थी “कृपया उम्र दराज लोग झूले का प्रयोग ना करें”। पति ने कहा- “देखो क्या लिखा है ।“

 मैंने मन में सोचा यह कोई बात हुई क्या हमारी उमंगों पर ताला पड़ गया ।मैंने हठ कर लिया कर लिया कि अब मैं झूला  झूल कर रहूंगी।

 मैंने  माली को कॉल किया फॉरेन आकर मिलो पर वह दो-तीन दिन के बाद आया ।मैंने उसे कहा कि देखो मेरे आम के पेड़ में झूले डाल दो ।

उसने कहा -“बीवीजी बच्चे झूलेंगे क्या ?

मैंने कहा  .. क्यों

” झूले डलवा रहे हो “

मैंने कुछ नहीं कहा घर में बात बताई तो कहा कि मनमानी मत करो इस उम्र में।

 माली ने डोरी डाल दी फिर उसने कहा कि पटरी की जरूरत है।

 मैंने अपनी शादी की पटरी …हमारे यहां शादी में दूल्हा दुल्हन  को पटरी पर  बैठा कर शादी की रस्में होती हैं  क्योंकि लकड़ी को शुद्ध और पवित्र माना जाता है।

 खैर आज तो अब इसका चलन भी शुरू हो गया है ।. पटरी पर बैठकर खाना खाना पसंद कर रहे हैं ।सात्विकता भी।

 मैंने स्टोर रूम से वह  पटरी निकाली और कहा इसे साफ सुथरा करके पेंट कर दो

उसने कहा बिल्कुल ठीक है  ।मैं झूला झूलने के लिए झूले पर बैठने से पहले जांचा परखा की मजबूत तो है ना !हिम्मत करके उस पर बैठ गई मैंने देखा कि आसपास के लोग जो इस क्रियाकलाप को कई दिनों से देख रहे थे आज भी झांकने लगे ।मैंने उनकी परवाह न करते हुए जोश में आकर अपने पैरों को जोरदार झटका दिया पैग के लिए।अरे यह क्या मैं धड़ाम से नीचे गिर पड़ी पास के अपार्टमेंट से लोगों की हंसी की आवाज़ आने लगी।

 मेरे पतिदेव यह देख रहे थे  लपकते हुए  मेरे पास आए और मुझे उठाया …चोट तो नहीं लगी .. मैं गुस्से शर्म से झटके से खड़ी होने लगी, मारे दर्द के खड़ी नहीं हो पाई

क्या किया तुमने  मुसीबत मोल ली अब चलो डॉक्टर के पास… बड़ा झूला झूलेंगे..”

 फिर कुछ दिन के बाद मैंने हिम्मत की और झूले पर बैठ गई क्या मजा आ रहा है आज भी मौका लगता है तो मैं बाज नहीं आती।

 धन्यवाद उस सखी की जिसने मुझ में नई जोश नई उमंग और  हिम्मत भरी और अब मैं कह सकती हूं कि मैं सब कुछ कर सकती हूं मेरा दिमाग बिल्कुल सही है अब आप बताइए क्या मैं बिल्कुल स्वस्थ हूं  या दिमागी बीमार …?🤔🤔क्या बता सकते हैं । धन्यवाद   🙏 वीणा प्रसाद (तेलंगाना)

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