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आना होगा भारत में :  डॉक्टर चंद्रसेन शर्मा

आना होगा भारत में,  उन वीरों की माताओं को। फिर से शिवा करें पैदा, जो लिखें उन्हीं गाथाओं को।।  देश के दो नेताओं ने,  आजादी से अपधात किया।  भगतसिंह तेरे भारत को, दो हिस्सों में बांट दिया।। चले गए गोरे भारत से, अपने तखतो ताज हुए। दी भुला शहादत वीरों की, ये कुर्सी के मोहताज…

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लघुकथा – कच्ची मिट्टी : डोली शाह

         आज अन्नू ज्यों ही विवाह कर  ससुराल प्रवेश की पूरे घर में भगदड़  मच गई। सभी  के मुंह से एक ही स्वर  सुनाई दे रहा था, आग लग गई, आग लग गई ।           कुछ लोग सामानों को बाहर फेंकने लगे ,तो कुछ पानी डालने लगे, किसी ने 101 में फोन किया ,तो कुछ…

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अभिव्यक्ति और भावनाओं को तलाशने का शक्तिशाली माध्यम है ‘कला’

( विश्व कला दिवस पर विशेष) कला हमेशा से ही अभिव्यक्ति और भावनाओं को तलाशने का एक शक्तिशाली माध्यम रहा है।दुनियाभर में आज यानी 15 अप्रैल को वर्ल्ड आर्ट डे (विश्व कला दिवस) मनाया जा रहा है। कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए इस दिन को हर साल 15 अप्रैल को मनाया जाता…

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दर्द घुटनों में पाया गया

अरुण शर्मा साहिबाबादी। ग़ज़ल…….. दर्द घुटनों में पाया गया,फिर भी रिक्शा चलाया गया। मैं फ़क़त रिक्शे वाला रहा,नाम से कब बुलाया गया। मेरा रिक्शा पलटते बचा,जब ये पुल पर चढ़ाया गया। काम रिक्शे का‌ मेहनत का था,फिर भी छोटा बताया गया। आज रिक्शा फंसा जाम में,आज कुछ ना कमाया गया। एक गमछा था मुझ पर…

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उठो द्रोपती वस्त्र सभालो

उठो द्रोपती वस्त्र सभालो, अब कृष्ण नहीं आएगा.घर घर में दुशाशन बैठा, वस्त्र कँहा से लाएगा..दर्योधन के मित्र कर्ण, तुम्हे थनों में मिल जायेंगे.अपनी बीती कंहोगी ज़ब तुम, तुम पर दाग लगाएंगे..कोई न होगा तेरा अबला, कोई न धीर बधाएँगा.उठो द्रोपती वस्त्र सभालो, अब कृष्ण नहीं आएगा —-(1)मानो कैंस दर्ज होजाये, क़ानून की फाइल मे.दस…

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हमारी पुरातन संस्कृति का सार है हिंदू नववर्ष

हिन्दू नववर्ष यानी विक्रम संवत 2080 का 22 मार्च बुधवार से शुरू हो रहा है, हिन्दू पंचाग के अनुसार चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नववर्ष की शुरूआत होती है, इस तिथि को नवसंवत्सर भी कहा जाता है।महाराष्ट्र और कोंकण में इसे गुड़ी पड़वा के नाम से जाना जाता हैं जिसे बहुत…

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आज अंगूठी ढूंढ रही है

जीवन के आमंत्रित सुख अब,निर्मोही दुष्यंत बन गए। मेरे गीतों में शकुंतला आज अंगूठी ढूंढ रही है । मृगछोंनों सी मृदुल फ़ुहारें, झुलसा देतीं हैं हथेलियां, सांसों की बुझती बाती की, तम ने छीनी हैं सहेलियां। मन के काण्वाश्रम में स्मृति क्षण,विरह होम के मंत्र बन गए, तन की समिधा में शकुंतला आज अंगूठी ढूंढ…

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आप के महापाप ने बेड़ा गर्क कर दिया।

आप के महापाप ने बेड़ा गर्क कर दिया। स्वर्ग से सुंदर दिल्ली को नर्क कर दिया।          अपने ही अपनो के अब खिलाप चल रहे हैं।           कि दिल्ली में ही आस्तीन के सांप पल रहे हैं। शराब का खराब झमेला हो गया। दिल्ली में ही ऐसा खेला हो गया। गुरु बाहर देखो अन्दर चेला…

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देवदूत

          दोपहर दो बजे का समय था ,मैं सड़क के किनारे खड़ी होकर ई- रिक्शे का इन्तज़ार कर रही थी। वैसे तो विद्यालय में सवा एक पर छुट्टी हो जाती है पर उस दिन विद्यालय में कुछ जरूरी काम होने के कारण  काफी देर से छुट्टी हुई थी। साथ की कुछ शिक्षिकाएँ भी अपने -अपने…

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चलाचली

जीवन की नाव सरक रही है  सासों की ईंधन पा धीरे-धीरे;   कभी गहरे जा खेले झिझरी    खाते हिचकोले नदिया तीरे। नपी तुली भरी हुई है ईंधन  जाने कब उखड़ जाये सांस;   उड़े प्राण पखेरु तज काया    दिखे न दूर तक कोई आश। नाप तौल कर व्यय करना  व्यर्थ का न करना…

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