कविता और कहानी
सास गयी ससुराल गया
जिस तरह मां के न रहने पर बचपन चला जाता है , ठीक उसी तरह सास के जाने पर भी एक बहू का रूप खत्म हो जाता है और बाकी लोग केवल पट्टीदार की भूमिका में रह जाते हैं। वह लाड़-प्यार ,डांट डपट सभी केवल याद बनकर रह जाते हैं जो जीवन भर एक…
वक्त दो वक्त जियो खुद के लिए
रचयिता विशिष्टाचार्य डॉ.सर्वेश कुमार मिश्र काशीकुंज जमुनीपुर प्रयागराज वक्त दो वक्त जियो खुद के लिए उम्र बहुत है गुजार दी दूजों के लिए दूजे दूजे ही होते हैं अपने भी सपने से होते हैं निन्यानवे काम करो उनका बस कोई एक ना करो काम उनका फिर तुम सा कोई जाहिल नहीं फिर तुम सा कोई…
मां सरस्वती की कृपा का पर्व है बसंत पंचमी
मां सरस्वती की कृपा का पर्व है बसंत पंचमी बसंत पंचमी या श्रीपंचमी एक हिन्दू त्योहार है।बसंत की शुरुआत माघ महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी से होती है। इस दिन को बुद्धि, ज्ञान और कला की देवी सरस्वती की पूजा-आराधना के दिन के रूप में मनाया जाता है।यह पूजा पूर्वी भारत, पश्चिमोत्तर बांग्लादेश, नेपाल…
चूड़ी की आवाजो का संगीत सुनाना देखा है ,
चूड़ी की आवाजो का संगीत सुनाना देखा है , चलने फिरने पर पायल का, वो राग भी गाना देखा है, बड़े बुजुर्गों की बातें ,जब घर मे मानी जाती थीं , हाँ इन आँखों ने साक्षात अदबो का जमाना देखा है ! जब लोग खड़े हो जाते थे, बूढ़ो को आदर देने को , सब…
सिसकती भारत माँ
तकनीकी व विज्ञानं अग्रसर करते भारत को नव वर्ष २०२३ की शुभ कामनायें (गंगा मैया के मेलेपन का निवारण करते शहीद का जो असमय ही छोड़ गया) सिसकती होगी भIरत माँ भी अपने शहीद ऐकला चलो भारतीय अन्वेषक पर जिसने अपना सारा जीवन त्याग दिया निस्वार्थ रूप तपस्वी बन उसकी सेवा कर खायी थी कसम…
काश मैं मोबाइल होती
“काम बहुत था यार आज, बुरी तरह से थक गया हूँ।” – सोफे पर अपना बैग रखते हुए अजीत ने कहा। “अजीत जल्दी से फ्रेश हो जाओ, तब तक मैं चाय बना देती हूँ।” “ठीक है, मधु! ” कहते हुए अजीत बाथरूम में चला गया। अजीत के फ्रेश होकर हॉल में आते ही माधुरी चाय-पकौड़े…
चर्चा का वो विषय बना ,
चर्चा का वो विषय बना , नाम जोशी मठ। शहर धर्म कर्म की भूमि वो, राज्य उत्तराखंड जिला चमोली। जन जन करता बातें उसकी, क्या हुआ है ऐसा आज दीवारे दरक रहीं, जमीन धस रहीं, बेघर हुए लोग रातों रात। क्या मुद्दा सिर्फ़ इतना है, या अन्य कोई गहन आशंका है। रेलवे हो प्रयाग प्रोजेक्ट,…
दोहा गीतिका
जीवन में हो सादगी, ऊंचे रहे विचार सफर जिन्दगी का कठिन,नही मानना हार अच्छी चीजों को चुनो,अपनाओ सद्भाव अच्छा बनने के लिए,खुद में करो सुधार झूठ,कपट,दुर्भावना, द्वेष फेंक दो दूर अवगुण सारे त्याग दो,हो अच्छा व्यवहार संस्कार के फूल से, महके सकल जहान संचित गुण का कोष हो,गुण का हो विस्तार मोह माया अन्धियार है,करे…
सुनाते रहे
खामियां, खामियां तुम गिनाते रहे। बेवजह ही हमें, तुम सुनाते रहे।। हो हमारी ख़ता, या तुम्हारी ख़ता। हर दफा ही तुम्हें, हम मनाते रहे।। माना आवाज में मेरी जादू नहीं। गीत तेरे लिए फिर भी गाते रहे।। अंधा कानून है, सुनते हम आ रहे। न्याय अंधों से हम क्यों कराते रहे। अपने महबूब को चाँद…
