कविता और कहानी
पहले जहाँ रोज करते थे
पहले जहाँ रोज करते थे लोग उसका पूजा बन्दन और विवाह के अवसर पर नई दुल्हन करती थी धूप ,प्रसाद का अर्पण। सूख गया वह पेड़ सुन तानो की आँधियाँ बिखर गए सारे दरख़्त और रस भरी पत्तियां नजर लगी कितनो की सहन न कर पायीं जो इनकी अटखेलियां। अबतो सुख ही सुख है दर्द…
शीर्षक : “वो सर्द रात”
वो सर्द हवाएं हो : वो काली घटाएं हो। वो शर्मीली निगाहे हो : वो सिसकती आहे हो। ठंड की कपन हो : थोड़ी सी अगन हो। थोड़ी सी लगन हो : साथ में सजन हो । बस फिर किया, हो बाहों में बाहें, हो हाथो में हाथ, फिर सदा याद आयेंगी=वो सर्द रात :…
व्यंग्य- बाबापंथी
आजकल बाबाओं का ट्रेंड चल गया है, एक गया तो छः महीने में दूसरा आना ही है लाइमलाइट में। देखते हैं इस बार वही हाल है या फिर बाबा कमाल है। कमाल से याद आया कि चाची 420 फ़िल्म की तरह किसी ने भी बाबा 420 फ़िल्म नहीं बनाई। मुंह में पान चबाते हुए एक…
सास गयी ससुराल गया
जिस तरह मां के न रहने पर बचपन चला जाता है , ठीक उसी तरह सास के जाने पर भी एक बहू का रूप खत्म हो जाता है और बाकी लोग केवल पट्टीदार की भूमिका में रह जाते हैं। वह लाड़-प्यार ,डांट डपट सभी केवल याद बनकर रह जाते हैं जो जीवन भर एक…
वक्त दो वक्त जियो खुद के लिए
रचयिता विशिष्टाचार्य डॉ.सर्वेश कुमार मिश्र काशीकुंज जमुनीपुर प्रयागराज वक्त दो वक्त जियो खुद के लिए उम्र बहुत है गुजार दी दूजों के लिए दूजे दूजे ही होते हैं अपने भी सपने से होते हैं निन्यानवे काम करो उनका बस कोई एक ना करो काम उनका फिर तुम सा कोई जाहिल नहीं फिर तुम सा कोई…
मां सरस्वती की कृपा का पर्व है बसंत पंचमी
मां सरस्वती की कृपा का पर्व है बसंत पंचमी बसंत पंचमी या श्रीपंचमी एक हिन्दू त्योहार है।बसंत की शुरुआत माघ महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी से होती है। इस दिन को बुद्धि, ज्ञान और कला की देवी सरस्वती की पूजा-आराधना के दिन के रूप में मनाया जाता है।यह पूजा पूर्वी भारत, पश्चिमोत्तर बांग्लादेश, नेपाल…
चूड़ी की आवाजो का संगीत सुनाना देखा है ,
चूड़ी की आवाजो का संगीत सुनाना देखा है , चलने फिरने पर पायल का, वो राग भी गाना देखा है, बड़े बुजुर्गों की बातें ,जब घर मे मानी जाती थीं , हाँ इन आँखों ने साक्षात अदबो का जमाना देखा है ! जब लोग खड़े हो जाते थे, बूढ़ो को आदर देने को , सब…
सिसकती भारत माँ
तकनीकी व विज्ञानं अग्रसर करते भारत को नव वर्ष २०२३ की शुभ कामनायें (गंगा मैया के मेलेपन का निवारण करते शहीद का जो असमय ही छोड़ गया) सिसकती होगी भIरत माँ भी अपने शहीद ऐकला चलो भारतीय अन्वेषक पर जिसने अपना सारा जीवन त्याग दिया निस्वार्थ रूप तपस्वी बन उसकी सेवा कर खायी थी कसम…
