कविता और कहानी
तुझे वो किरदार होना पड़ेगा.
बकाया बहुत हैं मेरे सपने तुमपे,तुम्हें बेहिसाब होना पड़ेगा , रहोगे कब तक यूं दायरों में, अब तुम्हें आसमां होना पड़ेगा !! हर्फ-हर्फ लिखते रहे “क़िस्से”, जिसके हम अपनी सांसों पर , सब समेट लो संग अपने कि, अब तुम्हें किताब होना पड़ेगा !! सुनो, सरेआम शर्मसार न कर दें कहीं वो लोग, “हमारे खत”,…
हर बाधा को स्वीकार करें
हर बाधा को स्वीकार करें। लड़ कर भी उसे पार करें।। हर बाधा को स्वीकार करें…। यूँ ज़िन्दगी कहाँ आसान निकलती हैं। कहीं शोर तो कहीं शांत ही चलती हैं।। हर बाधा को स्वीकार करें…। संघर्ष को पार करके जो चलते हैं। फ़िर वो ही नर फलते औऱ फूलते हैं।। हर बाधा…
शेष होते वर्ष के अवशेष
निर्जीव खिलौनों से बहलते थे अब तक बच्चे इस जहान के रोबोटिक शिक्षा ने योग की उम्र में भोग भरा मन में इंसान के ✍️ स्वामी विवेकानंद जी का एक कथन है कि अगर किसी देश को उन्नति की राह पर लाना है तो उस देश के बचपन को शिक्षित कर दो।कितनी गहराई है इस…
नमन तुम्हें मेरा शत बार नमन
हे भारत के रत्न तुम्हे मेरा शत बार नमन मौन हो गयी चारो दिशाएँ, शान्त हो गयी सभी हवाये , उदय हुआ गहन उदासी ले सूर्य भी पर निस्तेज सा जैसे कही कुछ खो गया कोई बहुत अपना बस यही खो गया मौन हो चले सभी सुबह के कलरव बस छाई एक निस्तब्धता एक…
“दुकानदारी”
सज्जन सिंह शहर में कोई बड़ा नाम तो नहीं था लेकिन विश्वास का नाम था। उनकी एक छोटी सी दुकान हुआ करती थी। खूब चलती थी। कोई सामान शहर की बड़ी से बड़ी दुकान पर नहीं मिलता तो सज्जन सिंह की दुकान पर मिल जाता। यही वजह थी कि सारा शहर उन्हे जनता था। सज्जन…
कभी मौन भी : पूनम पाठक
कभी मौन भी हो सकता है बेअसरभले स्वर अनोखा भाषा अलगमौन रहकर भी देखा है कभीक्योंकि इसकी प्रज्ञा प्रखरआंखों की भी जुबां होती हैफिर भी मौनी पर होता प्रहारकब तक मौन रह सकता है कोईभला आधुनिक दुनिया मेंपल-पल सहता रहे कष्टमहसूस ना हो किसी को तनिकआखिर कब तक ऐसा करे कोईमौन रहने पर दिल टूटता…
विश्व कीर्तिमान हेतु भारतरत्न काव्य अनुष्ठान में किया 301 कवियों ने कविता पाठ
गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज होगा गाजियाबाद,अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर साहित्य एवं संस्कृति के लिए समर्पित संस्थान के द्वारा 21 नवम्बर को ऑनलाइन कविता का महाकुम्भ आयोजित किया जिसमें भारत सहित विश्व के बीस देशों के रचनाकारों ने डुबकी लगाई।इस ऐतिहासिक कार्यक्रम के संयोजक एवं संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष डॉ राजीव कुमार पाण्डेय ने…
कौन जिम्मेदार?
ये धुआं दिवाली के बाद का मुझे तड़पा रहा प्रदूषण चरम पर सांसे अटके बार-बार इन पटाखों के शोर ने धुआं- धुआं कर दिया ना दिखे चांद ना दिखे सितारे प्रकृति की सुंदरता गायब बनावटी पटाखों से किसी के हाथ में लगे किसी की आंखों में लगी ये पटाखों की लौ पशु- पक्षी छिप रहे…
जनहित में जो अब जरूरी हो गया है
डॉक्टर सुधीर सिंह जनहित में जोअब जरूरी हो गया है आदमी का आचरण ही बदल गया है, खून का रिश्ता भी पराया हो गया है। जिनको लोग कल अपना समझते थे, वही छिपकर आघात करने लगा है। घर-बाहर जालसाजों का जमावड़ा, ईमानदारी का मजाक उड़ा रहा है। चरित्रवान पर व्यंग्य-वाण छोड़ कर, खुलेआम उनको घायल …
