Latest Updates

लोक आस्था का महा पर्व-छठ व्रत

             लाल बिहारी लाल         छठ मईया की महिमा,जाने सकल जहान। “लाल पावे” जे  पूजे, सदा करी कल्याण।।                                         (लाल बिहारी लाल) सृष्टी की देवी प्रकृति नें खुद को 6 बागों में बांट रखा है। इनके छठे अंश को मातृदेवी के रुप में पूजा जाता है। ये ब्रम्हा की मानस पुत्री हैं। छठ व्रत यानी इनकी…

Read More

अनशन

   “कमली खाना खा ले बेटा ,जिद नहीं करते । देख ले खाना नहीं खायेगी तो कमजोर हो जायेगी।”  “ठीक है माँ मैं खाना खा लूँगी पर तू भी मेरा एडमिशन करा दे ।”  “नहीं बेटा तेरे पिताजी नहीं मान रहे हैं , कोई अच्छा रिश्ता मिल रहा है ,वे उसे छोड़ना नहीं चाहते हैं…

Read More

बाज़ार

अंजू और नीना हफ़्ते भर का सामान लेने बाजार में चक्कर लगा रही हैं । दोनों पुरानी सहेलियां हैं इस लिए एक बेफ़िक्री सी दोनों पर छाई हुई है । बेफ़िक्री और संग – संग मौज मज़ा भले हो मगर सौदा लेने में दोनों की ओर से अभ्यस्त सतर्कता बरती जा रही है । अभी…

Read More

नारी

धरती पर अनमोल रत्न और खुशियो का संसार है नारीघर की बढ़ती जिससे रोनक , ऐसा अदभुत श्रंगार है नारी। लहराती फूलों की बगिया और चन्दन सी शीतल है नारीदिखाती है जो सबको रास्ते,ऐसी अदभुत रोशनी है नारी। सह लेती हर कष्ट को हंसकर,सहनशक्ति की देवी है नारीढक लेती हर दुःख की धूप,ऐसी सुख की…

Read More

चीन को जवाब

गिरगिट सा रंग बदलने लगा है कोई, हाथ मिला कर मुकर जाता है कोई दोस्ती मे हमारी नहीं है ऐसी फितरत हर बार दोस्ती मे गद्दारी करता है कोई ये मत सोच लेना की कोरोना वायरस बनाकर तुमने दुनियाँ मे धाक जमाई है ! अभी तक तुमको मिला नहीं बाप कोई अभी तो तुम्हारी वो…

Read More

संकीर्ण सोच से सजी व्यवस्था में

डॉक्टर सुधीर सिंह संकीर्ण सोच  से  सजी व्यवस्था में, इंसान से ज्यादा शैतान  ही है यहां। कुछ व्यक्ति कहे  तो कोई बात नहीं, यह तो यहां के समूह  का है कहना। प्रश्न की गंभीरता ने जोर देकर कहा, जरा  इस सच्चाई का पता तो लगा। गौर से देखा तब  घर-घर काआंगन, लग गया कुछ तो …

Read More

दीपावली

            ” माँ आज भी ज्यादा दीये नही बिके ।”ठेले को किनारे लगाते हुए अशोक उदास होकर बोला ।     माँ ने उसे सांत्वना देते हुए कहा,” अरे कल बिक जायेंगे,क्यों परेशान हो रहा है ? देख मेरे भी दीये ज्यादा नहीं बिके हैं।”माँ बेटे को समझा तो रही थी पर मन ही मन बुरे…

Read More

कर ऊर्ध्व चेतना जाग्रत मन

ब्रह्माण्ड रूपिणी  भाव और चेतना स्वरूपिणी असुरत्व नाशिणी है अनादिकाल से संकल्पित तू दानव प्रकृति को मुक्ति दे देवत्व भाव से अग जग भर मन को प्रकाश ते भर दे माँ। था घनान्धकार था रुका काल गति बाधित थी सरिताएँ नही प्रवाहित थी संचरित नही वायु थी कहीं जीवत्व नहीं पोषित था कहीं अंधकार नष्ट…

Read More

“कलयुगी राम”

जलाया जाता है हर वर्ष, पुतला रावण का। मगर क्या रावण जलता है? नहीं, हम भूल करते हैं। आज रावण नहीं, राम मरते हैं। रावण तो सर्वव्यापी हो गया है। भ्रष्टाचार, लूटपाट, डकैती और बलात्कार, क्या ये रावण के नाती नहीं हैं ? याद रखो, रावण कभी नहीं मरता है। हंसी बनाता है हमारी, कागज़…

Read More

तुझसे इश्क इजहार करेंगे

मिलन प्रिये जब तुमसे होगा, दिल की हम तुम बात करेंगे। नयनों से हम नयन मिलाकर, तुझसे इश्क इजहार करेंगे।। इक दूजे का हाथ थाम हम, अपनी दिल की बात करेंगे। अपने दिलों के तरंग मिला, तुझसे इश्क इजहार करेंगे।। बाहों  में  बाहें  डाले  हम, प्रेम मिलन की बात करेंगे। इक  दूजे  को ले  बाहों …

Read More