Latest Updates

दीपावली

            ” माँ आज भी ज्यादा दीये नही बिके ।”ठेले को किनारे लगाते हुए अशोक उदास होकर बोला ।     माँ ने उसे सांत्वना देते हुए कहा,” अरे कल बिक जायेंगे,क्यों परेशान हो रहा है ? देख मेरे भी दीये ज्यादा नहीं बिके हैं।”माँ बेटे को समझा तो रही थी पर मन ही मन बुरे…

Read More

कर ऊर्ध्व चेतना जाग्रत मन

ब्रह्माण्ड रूपिणी  भाव और चेतना स्वरूपिणी असुरत्व नाशिणी है अनादिकाल से संकल्पित तू दानव प्रकृति को मुक्ति दे देवत्व भाव से अग जग भर मन को प्रकाश ते भर दे माँ। था घनान्धकार था रुका काल गति बाधित थी सरिताएँ नही प्रवाहित थी संचरित नही वायु थी कहीं जीवत्व नहीं पोषित था कहीं अंधकार नष्ट…

Read More

“कलयुगी राम”

जलाया जाता है हर वर्ष, पुतला रावण का। मगर क्या रावण जलता है? नहीं, हम भूल करते हैं। आज रावण नहीं, राम मरते हैं। रावण तो सर्वव्यापी हो गया है। भ्रष्टाचार, लूटपाट, डकैती और बलात्कार, क्या ये रावण के नाती नहीं हैं ? याद रखो, रावण कभी नहीं मरता है। हंसी बनाता है हमारी, कागज़…

Read More

तुझसे इश्क इजहार करेंगे

मिलन प्रिये जब तुमसे होगा, दिल की हम तुम बात करेंगे। नयनों से हम नयन मिलाकर, तुझसे इश्क इजहार करेंगे।। इक दूजे का हाथ थाम हम, अपनी दिल की बात करेंगे। अपने दिलों के तरंग मिला, तुझसे इश्क इजहार करेंगे।। बाहों  में  बाहें  डाले  हम, प्रेम मिलन की बात करेंगे। इक  दूजे  को ले  बाहों …

Read More

प्रोफेसर डॉ श्रीमति अलका अरोड़ा जी ने अपने सुदृढ संचालन द्वारा सजाई हृदयांगन की भजन-कीर्तन शाम

डॉक्टर विधु भूषण त्रिवेदी जी ने अपने हृदय से अशीष अमृत वर्षा द्वारा ‘हृदयागंन भजन संध्या’ सजाकर हृदयांगन परिवार के मन का कौना कौना पावन किया प्रोफेसर डॉ श्रीमति अलका अरोड़ा जी ने अपने सुदृढ संचालन द्वारा सजाई हृदयांगन की भजन-कीर्तन शाम देशभर के विभिन्न आईआईटी संस्थानों में दाखिले लेने के सन्दर्भ में आयोजित की…

Read More

कंजके (कन्या भोज)पर कविता

चलों चलों आज फिर से गुलजार करतें हैं बचपनवो छोले पूड़ी हलवेकी महक ताजाकर कंजक(कन्या) बनगुल्लक भरते हैं फिरपुरानी यादों से …हर पर्व अपनी महक और स्वाद लिए आता है,रह रह कर बचपन की याद दिलाता है,क्या वो दिन थे औरक्या थे जलवे,आहा! वो छोले,पूड़ी और हलवे!चलों आज फिर सेगुलजार करतें हैं बचपनमाँ अंबा की…

Read More

तोता मैना

कहता तोता सुन री मैना मान ले अब तो मेरा कहना मैं लाता हूं दाना पानी तुम घर पर ही रहना। नन्हे-मुन्ने लाल हमारे काला कौवा घात लगाए पंख फैलाकर उन्हें छुपाना चाहे भूख प्यास सब तजना। मानव अब हैवान बना है चारों और धुआं घना है बालक वृद्ध और नारी को पड़ता है सब…

Read More

खादी

बिजली शिक्षा , नाली सडक और स्वास्थ्य  छोड़ो मित्रो ये सब चिन्ता , कुछ  खादी की बात करे रेशमी पैबन्द से हार जाए, तो भी कोई बात नहीं खादी को हिंदुस्तान कह देना भी ,कम बड़ी बात नहीं खादी बनने की प्रक्रिया ने बतलाया आज मुझे तन ढकने से लेकर खादी राष्ट्रध्वज तक  मान तुझे…

Read More

‘बापू’तेरी जैसी संतान पाकर,

डॉक्टर सुधीर सिंह ‘बापू’तेरी जैसी संतान पाकर, भारत माता धन्य   हो गई थी. आज भी वैसी संतान के लिए, व्याकुल हो रही है  माँ भारती! विषमता से भरे इस समाज में, देशभक्तों की बहुत ही कमी है. परेशान  भारत माता कहती है, कोईअब महात्मा गांधी नहीं है. बापू! ईमानदारी की पूछ नहीं, दिव्य-दृष्टि से तुम…

Read More

ऐ जिन्दगी

जिंदगी हर दिन एक जंग सी लगती है, कभी पहलू में मेरे तो , कभी तेरे लगती है, कभी पास आके बैठ, तो बताए  हमे कितनी बेरहम लगती है, हर दिन ये मुझसे मेरे ही जवाबो पे एक नया सवाल पूछती है, की तू तो कभी न झुकने वाली थी,!!! क्या ….हार गई आज की…

Read More