कविता और कहानी
प्रिय ‘हिन्दी’ को नमन( मुक्तक)
हिन्दी दिवस पर मेरी प्रिय भाषा तुम्हें नमन अतिशय प्रचुर तुम्हारा गरिमामय शब्द धन राष्ट्र भाषा , संपर्क भाषा ,जन भाषा तुम्ही निज सामर्थ्य से प्रेषित करो जग में कवि मन प्राकृत शौरसैनी संस्कृत की श्रेष्ठ सुता उन्नति मूल कहते भारतेन्दु की वंदिता वैज्ञानिकता हो चुकी प्रमाणित तुम्हारी निज डोर बांधी भारत की तुमने एकता…
।। हिंदी दिवस ।।
हिंदी है मान हमारी, हिंदी है शान हमारी। हिंदी है अभिमान हमारा, तो हिंदी है गौरव हमारा।। इसमें ना कोई ऊच है, और ना ही कोई नीच। इसलिए, तो आज हिंदी है, हम लोगों के बीच।। सबके मन को भाती है और, सब के दिलों पर करती है राज। इसलिए इसको बोलने वाला हर, कोई…
हिन्दी भाषा देश की आन बान शान
मंजू लता (राजस्थान_ आज का दिन मेरे लिए बहुत ही खुशी का दिन होता है । आज मेरे विषय हिन्दी को सम्मान दिया जाता है । हमारे भारत में पूरे साल भर हिन्दी भाषा के साथ उपेक्षित व्यवहार किया जाता है । आज के दिन को हिन्दी दिवस मनाकर इतिश्री कर ली जाती है ।…
सरकारी दफ्तरों में हिन्दी का प्रयोग बढ़ाना जरुरी
लाल बिहारी लाल आज भारत में हिन्दी बोलने,लिखने तथा ब्यवहारिक प्रयोग करने वालों की संख्या लगभग 70 प्रतिशत है फिर भी आज दुख इस बात का है कि सरकारी दफ्तरों में और न्यायालयों में अंग्रैजी का बोलबाला है । खुशी की बात ये है कि इलाहाबाद न्यायालय के कुछ जज हिदी में केस की सुनवाई…
हिंदी की जय हो
हिंदी शब्दों का सागर हिंद महासागर से नहीं है कम पर कहां समझ पाते सभी हम फर्राटेदार अंग्रेजी जो बोले तो इज्जत बहुत उनकी बढ़ जाती जैसे जीवन की सारी समस्याएं सुलझ जाती हिंदी है हमारी भाषाओं में प्यारी हिंदी की बिंदी से दुनिया है हारी कर बुलंद हिंदी को हिंदी दिवस मनाओ हिंदी दिवस…
जयहिंदी,जयहिंद’ के जयकारा को हम
डॉक्टर सुधीर सिंह जयहिंदी, जयहिंद के जयकारा को हम, मिलकर हिंद की सरजमीन पर उतारें। हिंदी थिरकेगी जनजीवन के अधरों पर, प्रत्येक भारतीय इसके लिए प्रयास करें। समाज और समुदाय के बीच राष्ट्रभाषा, मधुर रिश्तों की दृढ़-बुनियाद रखती है। एकजुटता,भाईचारा और राष्ट्रीयता का; अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करती है। व्यक्ति,समाज और राष्ट्र का प्रगति-पथ; समृद्ध राष्ट्रभाषा…
खुदा से अर्ज ! – डॉक्टर सुधीर सिंह
हम ने खुदा से अर्ज की;ऐ रब ! सबों पर रहम कर| सब को दिखा वह रास्ता, जो हो मुहब्बत की डगर| हम को फरिश्ता मत बना; बंदा बना कुछ काम का, अवसाद और गम कम करें , हमदर्द बन इंसान का| दुनिया में दुख और दर्द है; एहसास हम इसका करें, न रहें कभी…
“राजनीति के बीज”
इंसान अपना मूल धर्म, इंसानियत खो रहा है। जातिवाद का जहर रगों में सरपट दौड़ रहा है।। खुलम-खुला व्याभिचार और सब कुछ तो हो रहा है। फिर भी, आजकल सुन रहा हूँ के “विकास” हो रहा है।। अब तो राष्ट्रवाद को विचारधारा की गर्म और तेज आंच पर पकाया जा रहा है। मीडिया ट्रायल में…
पनाह : उज्जवला साखलकर
ये ठहरी आखिर महानगरी मुम्बई की सड़क , जहाँ दिन हो या रात हर समय गाड़ियों और लोगों का महापुर जमा रहता है I हर कोई अपनी धुन में, बस जल्दी गंतव्य तक पहुँचने की होड़ I आज भी पूरी की पूरी सड़क कार, टैक्सी, बस और टू-व्हीलर से भरी हुई थी और इसमें सावित्री…
“आत्मा” : शुभांगी
कितना हल्का हल्का सा लग रहा है शरीर। अहा! जैसे सारे तनावों और विकारों को किसी ने जड़ से उखाड़ फेंका हो! ऐसा लगता है जैसे 30 -40 साल से नहीं सो पाई थी और आज इतनी गहरी नींद पूरी कर के उठी हूँ। सच बहुत फ्रेश लग रहा है। चलो अच्छा है जाने कब…
