कविता और कहानी
भारत को कोरोना से मुक्त रखना है
संकट से पुरुषार्थी घबड़ाता नहीं है, उससे ही संकट डरने लग जाता है। विपत्ति को सामने देखकर धैर्यवान, उससे निपटने की तैयारी करता है। आजकल ‘कोरोना’ कड़ी चुनौती है, प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष सबको डरा रहा है। घर में बंद पर अलग-अलग रह कर, कैदी साआदमी जीवन बिता रहा है। हरेक इंसान सिर्फ संयम से काम ले, कैसा…
शब्द आज मौन है
हाहाकार करती धरा, चीत्कार करने लगा है गगन कैसे करूँ नमन उनको, जो कर गए न्योछवर तन अद्भुद सा संयोग है, क्या विचित्र सा योग है खुद को पीड़ित कहते है, पर औरो को पीड़ा देते है पीड़ित हो शोषित हो तो मेहनत को हथियार बना लो किसने तुमको रोका है, अपना जीवन आप बना…
माँ के शुभ नौ रूप
नव संवत्सर आ गया, लेकर नवउत्कर्ष ।मंगलमय हो शुभ सदा, भारतीय नववर्ष ।। फसलें सुख समृद्धि का, गातीं मधुरिम गान ।भरे अन्न भण्डार अब, प्रमुदित हुये किसान ।। ऋतु पावन मंगलमयी, सुखद चैत्र शुभ मास ।कोयल गाती गीत मधु, जन-जन में उल्लास ।। नव दुर्गा नव रात्र शुभ, माँ के शुभ नौरूप ।करते जग कल्याण…
हृदय की बीमारी पर तत्काल चिकित्सा एवं परामर्श जरूरी , इसे हल्के में न लें
हृदय का मामला काफी संवेदनशील होता है हृदय में किसी प्रकार के ब्लाकेज आने के पहले हृदय की धड़कन संकेत भी देती है। इन संकेतों को अनदेखा करना कभी-कभी काफी घातक सिद्ध हो जाता है कभी ऐसे पल भी आ जाते हैं जब हार्टअटैक आते ही व्यक्ति कुछ ही मिनट में दुनिया से कूच कर…
यादगार होली
मंजू लता (राजस्थान) किशोर को होली के पर्व से बहुत डर लगता है। होली के रंग-गुलाल से घृणा का जो सबक बचपन में दिया गया था, शायद उसी कारण उसे होली से नफ़रत है। टीवी, अखबार और पूरे वातावरण में फागुनाहट की मस्ती तारी है। लोग होली की तैयारियों में मशगूल हैं। इस दिन तमाम…
मैं दूर दृष्टि धारक संजय
में दूर दृष्टि धारक संजय, आंखों देखा हाल बताया, धृतराष्ट्र के , कुल के काल को मैं भी ना बदल पाया । पांचाली की हंसी , धृतराष्ट्र की चुप्पी, शकुनि के पाशो ने सारा महाभारत करवाया । पति प्रेम में गांधारी ने भी धृतराष्ट्र का साथ दिया दुर्योधन के सिंहासन के खातिर अपने कुल का…
गुरु दक्षिणा
सुचित्रा बहुत विचलित हो गई थी। उसने इतना अपमान अब तक कभी नही सहा था। भलाई करने का आज के जमाने में यह परिणाम मिलता है, उसे आज महसूस हुआ था। पड़ोस के घर से संयम उसके पास संगीत सीखने आता था। जबसे वह पड़ोस में रहने आया था तभी से उसके पास आ रहा…
विदा दो दिल्ली (सुमनमाला ठाकुर)
(राज्य सभा डाइरेक्टर, अंग्रेज़ी की प्रोफ़ेसर, सुमनमाला ठाकुर, के दिल्ली शहर के आख़िरी कुछ पलों की अभिव्यक्ति, तमाम दिल्ली वसियों के नाम) तीन दशको से ज़्यादा मेरे आसपास, हरदम मंडरातीरही हो, तुम दिल्ली। मेरी सुबहों की रोज़ाना-रूटीन हर दिन, और शामों की वो गुनगुनाती थकन, फिर भी थे आँखों में सपने हज़ारों, और संग मेरे…
रंगों में उल्लास (होली पर दोहे)
“रंगों “में सद्भावना“रंगों “में मुस्कान ।रंग; देव लोक कासृष्टि को वरदान ।।*रंगों में उल्लास छिपाऔर गुंथा है प्यार।रंग पिरोय फूल हैंजो फूलों का हार ।।*रंगों में अनुराग भरारंगो में विश्वास।रंग दिलों के पास काएक पावन एहसास ।।*रंगों में इस धरा कीसौंधी-सौंधी गंध।रंग हृदय से देखतेकरके आंखें बंद।।*रंगो में वो मीठा पनमुख में ज्यो मकरंद ।जो…
