कविता और कहानी
यादगार होली
मंजू लता (राजस्थान) किशोर को होली के पर्व से बहुत डर लगता है। होली के रंग-गुलाल से घृणा का जो सबक बचपन में दिया गया था, शायद उसी कारण उसे होली से नफ़रत है। टीवी, अखबार और पूरे वातावरण में फागुनाहट की मस्ती तारी है। लोग होली की तैयारियों में मशगूल हैं। इस दिन तमाम…
मैं दूर दृष्टि धारक संजय
में दूर दृष्टि धारक संजय, आंखों देखा हाल बताया, धृतराष्ट्र के , कुल के काल को मैं भी ना बदल पाया । पांचाली की हंसी , धृतराष्ट्र की चुप्पी, शकुनि के पाशो ने सारा महाभारत करवाया । पति प्रेम में गांधारी ने भी धृतराष्ट्र का साथ दिया दुर्योधन के सिंहासन के खातिर अपने कुल का…
गुरु दक्षिणा
सुचित्रा बहुत विचलित हो गई थी। उसने इतना अपमान अब तक कभी नही सहा था। भलाई करने का आज के जमाने में यह परिणाम मिलता है, उसे आज महसूस हुआ था। पड़ोस के घर से संयम उसके पास संगीत सीखने आता था। जबसे वह पड़ोस में रहने आया था तभी से उसके पास आ रहा…
विदा दो दिल्ली (सुमनमाला ठाकुर)
(राज्य सभा डाइरेक्टर, अंग्रेज़ी की प्रोफ़ेसर, सुमनमाला ठाकुर, के दिल्ली शहर के आख़िरी कुछ पलों की अभिव्यक्ति, तमाम दिल्ली वसियों के नाम) तीन दशको से ज़्यादा मेरे आसपास, हरदम मंडरातीरही हो, तुम दिल्ली। मेरी सुबहों की रोज़ाना-रूटीन हर दिन, और शामों की वो गुनगुनाती थकन, फिर भी थे आँखों में सपने हज़ारों, और संग मेरे…
रंगों में उल्लास (होली पर दोहे)
“रंगों “में सद्भावना“रंगों “में मुस्कान ।रंग; देव लोक कासृष्टि को वरदान ।।*रंगों में उल्लास छिपाऔर गुंथा है प्यार।रंग पिरोय फूल हैंजो फूलों का हार ।।*रंगों में अनुराग भरारंगो में विश्वास।रंग दिलों के पास काएक पावन एहसास ।।*रंगों में इस धरा कीसौंधी-सौंधी गंध।रंग हृदय से देखतेकरके आंखें बंद।।*रंगो में वो मीठा पनमुख में ज्यो मकरंद ।जो…
मैं फिर लौट आऊंगी
मैं फिर लौट आऊंगीधूप के उजास सीकि करूंगी ढेरों मन भर बातेंउस जाती हुई ओस से भीजिसके हिस्से में आती हैं सिर्फ रातें ही !! मैं फिर लौट आऊंगीपहली बारिश सीकि सिमट जाऊंगी मिट्टी मेंऔर होती रहूंगी तृप्तउसकी सोंधी-सोंधी सी महक में !! मैं फिर लौट आऊंगीटूटे हुए तारे सीकि सुन लूंगी हर एक दुआहर…
होली गीत
रंग जितने हो बेशक लगाया करो।चाहे जितना मुझे तुम सताया करो।।रोज खेलो भले मुझसे होली मगर।सामने सबके रंग न लगाया करो।। इस होली में घर तेरे आऊँ प्रिये।गोरे गालों पे, रंग मैं लगाऊँ प्रिये।।चाहे लहंगा और चुनरी पहिनना पड़े।चाहे तेरी सखी मुझको बनना पड़े।।सब करूँगा सनम मैं तुम्हारे लिए।इस तरह न मुझे आजमाया करो।। भंग…
मैं फकीर वो बादशाह
मैं फकीर हूँ सामने तेरेतू जगत का बादशाह है। मैं फकीर वो बादशाह हैसिजदे में सिर झुका मेरा।सबकुछ तो तेरा ही दियाजो भी यहाँ सब कुछ तेरा।सब फकीर हैं तेरे सामनेतू जगत का बादशाह है। तेरी रहमतें बरसें सभी परखुशहाली दिखे हर कहीं।तू दूर कर दे गम सभी केउदासियाँ दिखें कहीं नहीं।तेरी कृपा मिल जाये…
नारी व्यथा
मेरे हिस्से की धूप तब खिली ना थीमैं भोर बेला से व्यवस्था में उलझी थीहर दिन सुनती एक जुमला जुरूरी सा‘कुछ करती क्यूं नहीं तुम’ कभी सब के लिए फुलके गर्म नरम की वेदी पर कसे जातेशीशु देखभाल को भी वक्त दिये जातेघर परिवार की सुख सुविधा सर्वोपरीहाट बाजार की भी जिम्मेदारी पूरी तंग आ…
