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होली में मचो है धमाल

होरी में मचो है धमाल कान्हा नगरी में, उड़ रयो देखो गुलाल, कान्हा नगरी में, मस्ती देखो ब्रज में छाए -2 गोपी-ग्वालवाल रंग लगाएँ  -2 अंबर भी देखो भयो लाल कान्हा नगरी  में, होली में मचो है धमाल ——— राधे श्याम के रंग में रंग जाओ -2 राधे-राधे मिल सब गाओ  -2 बड़ो नटखट  यशोदा…

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रंगों का त्यौहार ‘ होली ‘

मंजु लता     भारत त्‍यौहार और मेलों का देश है। वस्‍तुत: वर्ष के प्रत्‍येक दिन उत्‍सव मनाया जाता है। पूरे विश्‍व की तुलना में भारत में सबसे अधिक त्‍यौहार मनाए जाते हैं। इनमें से अधिकांश त्‍यौहार भारत के अधिकांश भागों में समान रूप से मनाए जाते हैं। प्रमुख त्यौहारों में होली भी बड़ा त्यौहार है…

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स्त्री

स्त्री जब खुश होती है बर्तन माजते माजते कपड़े धोते-धोते  रोटी बेलते बेलते सब्जी में छोका लगाते लगाते  भी गुनगुनाती है कभी अकेले खामोश चारदीवारी में भी गुनगुनाती है सुबह से शाम तक  चक्की की तरफ पिसते पिसते  भी खुश होकर गुनगुनाती है वह बच्चों की भागमभाग बच्चों की फरमाइश  और रिश्ते नाते निभाते निभाते…

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नजरिया

हां मन उदास होता है यह देखकर कि आपको बाहरी रूप में देखकर आपके अंदर के इंसान को बाहर आने के पहले ही मार दिया जाता है। जिनकी सोच जिनकी धारणा बन जाती है वह स्वयं नहीं जानते ना ही कोशिश करते हैं समझने की उनको वही सही लगता है जो दिखाई देता है। अनेकों…

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होली मिलन

बाबू की खुशी का ठिकाना नहीं था। उसके बाबा का गांव से फोन आया था। बाबा चाहते थे कि बाबू गांव में पूरे परिवार के साथ होली मनाए। होली बाबू का प्रिय त्यौहार था। बाबू को शहर गए हुए एक वर्ष हो चुका था। गांव की पाठशाला से उसने आठवीं की परीक्षा पास की थी। पूरे जिले में…

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खुराक (कहानी)

गर्मी की चिलचिलाती धूप में, खड़ी दोपहरी में चरवाहे किसी पेड़ के नीचे बैठ जाते ,अपनी अपनी पोटली खोलते खाना खाते तथा वहीं पास के किसी कुएँ या तालाब का पानी पीकर कुछ देर आराम करते थे।उनके आसपास ही पेड़ों की छाया में उनके गाय ,बछड़े, भैंस भी वहीं पास में आज्ञाकारी बच्चे की तरह…

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रंग गालो पे कत्थई लगाना

अबके सावन में ओ रे पियाभीग जाने दो कोरी चुनरियामीठी मीठी सी बाली उमरियाभीग जाने दो कोरी चुनरिया हम को मिल ना सकेंतेरे रहमो करमसात रंगों में डूबे सातो जन्मरंग गालो पे कत्थई लगानाधीमे धीमें से खोलो किवडियाभीग जाने दो कोरी चुनरिया रंग प्रीत का धानी बहुत हैये नशा भी बहुत ही सुहानाएसे अल्हड से…

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नारी स्वाभिमान

तूने अपने घूंघट को आसमां बना लियाऊँची थी उड़ाने पर घूंघट में थाम लियापलके झुकी और हुनर को हाथों में सजा लियाऔर अपने सपनों का आसमां खुद ही बना लिया। अकेले नही सबको साथ लेकर चली वोस्त्रीत्व का मकसद सबको समझा दिया।आई थी मुसीबत,राह में अनेकोदेख तेरा ओज उन्होने ठिकाना बदल लिया। बना ली है…

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खुशी की तलाश

खुशी शब्द ही खुशी का एहसास कराता है,चेहरे पर मन्द मुस्कान,मन में उमंग सीमहसूस होती है। खुशी की तो हर किसी को तलाश रहती है,खुशी तो हमारे अंदर से ही तो उपजती है बस हर परिस्थिति में अपने आप को सयंम के साथ सब्र रखते हुए मन की गहराइयों से अनुभव करना है,कुछ न कुछ…

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यादे यूँ भी पुरानी चली आईं (गीत)

मन की बाते बताये तुम्हें क्याहै ये पहली मुहब्बत हमारीभले दिन थे वो गुजरे जमानेमीठी मीठी सी अग्न लगाई हम तो डरते हैं नजदीक आकेजान ले लो – ऐ जान हमारीकब से बैठे दबाये लबो कोकब से यारी है गम से हमारी चढगयी सर आसमाँ तकये नशीली रात खुमारीबजते घुघरू से आवाज आईदेखो कैसी चली…

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