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फिल्मी बुतों के विसर्जन का अवसर

यशपाल सिंह यश ‌आजकल बॉलीवुड चर्चा में है। बॉलीवुड हमेशा ही चर्चा में रहा है । जब से बच्चा जवान होना शुरू होता है फिल्मी सितारे उसके स्वप्नलोक का हिस्सा बन जाते हैं । उन्हें देखना अच्छा लगता है, उन्हें सुनना अच्छा लगता है, उनकी बातें करना अच्छा लगता है। विज्ञापनदाता इस बात को खूब…

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घर वही,जहाँ बुढ़ापा खिलखिलाये

किसी ने सच ही कहा है कि जिस घर मे बुजुर्ग सन्तुष्ट व प्रसन्नचित्त रहते हैं,वह घर धरती पर स्वर्ग के समान है,परन्तु आज आधुनिकता के परिप्रेक्ष्य में रिश्तों में उत्पन्न व्यवहारिकता व आपसी सामंजस्य व  घटती सम्मान की भावना के कारण ऐसा स्वर्ग अब अपवाद का रूप लेता जा रहा है। ऐसी परिस्थितियों में…

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बिन बेटी सब सून !

जीवन में आनंद का, बेटी मंतर मूल ! इसे गर्भ में मारकर, कर ना देना भूल !! बेटी कम मत आंकिये, गहरे इसके अर्थ ! कहीं लगे बेटी बिना, तुझे सृष्टि व्यर्थ !! बेटी होती प्रेम की, सागर सदा अथाह ! मूरत होती मात की, इसको मिले पनाह !! छोटी-मोटी बात को, कभी न देती…

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कविता क्या है

कविता क्या है शब्दों के अथाह समंदर से चुनकर पिरोई गई शब्दों की माला। जब कवि के ह्रदय में प्रज्वलित होती है ज्वाला तन मन यूँ सुलगे जैसे पी आया हो हाला तब बनती है शब्दों की माला । कविता क्या है शब्दों के फूलों से सजाया गया शब्दों का गुलदस्ता । जब कवि के…

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जिसे तू क़बूल कर ले वो दुआ कहाँ से लाऊँ

कविता मल्होत्रा (स्थायी स्तंभकार) स्वार्थ साधते, नए युग में पदार्पण, खुद आगे बढ़ने के लिए दूसरों को नीचे गिराता मानवता का पतन, नई सदी में अपनत्व का तर्पण, क्या यही है मेरे सपनों का भारत? जब तक समूचे वतन की सम्मिलित सोच इस समस्या का सामूहिक समाधान नहीं तलाशेगी, तब तक, कोई हल नहीं निकलने…

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भारत में उतर आए भगवान

भारत में उतर आए भगवान मगर नहीं समझा इंसान सफेद सफेद कपड़ों को पहने ऊपर नीली पहनी पोशाक क्यों मुंह पर लगाया मास्क अरे इतना तो तू जान। जमीं पर उतर आए भगवान। सारे रोगों से तुझे बचाएं लगा दांव पर अपनी जान जमीं पर उतर आए भगवान। पूजा इनकी कर ले ह्रदय में रख…

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अनुराधा प्रकाशन का पाँच साझा संकलन,

डॉक्टर सुधीर सिंह अनुराधा प्रकाशन का  पाँच साझा संकलन, राष्ट्रभाषा हिंदी हेतु सचमुच अमृत-कलश है. जिसके लोकार्पण के अवसर पर आयोजित, सजाया हुआ इंद्रधनुषी साहित्य-महोत्सव है. समर्पित साहित्यकारों  ने  हिंदी-साहित्य को, अपनी लेखनी से तहेदिल से खूब  संवारा है. लोगों ने सुना और सुनाया बहुत ही  चाव से, माँ वीणा वादिनी की ही  सब महती…

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स्वछंद लेखन

हम तो ऐसा ही लिखते हैं दलील ये अच्छे दिखते हैं मौलिकता का हो विश्वास नयी शैली का शिलान्यास खींच कर एक नई लकीर लिख डाले वो नई तहरीर तय नियम में ला  बदलाव दूर ही हो बोझिल ठहराव हो सहज ग्राह्य तथा सरल मधु सा मीठा, ना हो गरल नव विधा ही हो अतिप्रिय…

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शिक्षा वही जो राष्ट्र का गौरव बढ़ाए

शिक्षा ही तो इंसान को संस्कार दे चरित्रवान बना जीवन के पथ पर आगे बढ़ने को प्रेरित करती है। शिक्षा राष्ट्र निर्माण का आधार है,तो शिक्षक ही कर्णधार।शिक्षक ऐसा चाहिये,जैसे हो माटी कुम्हार,ठोक ठोक कर घट गढ़े, करा दे बेड़ा पार। बच्चे की पहली गुरु माँ पिता दिखाये स्कूल की  राह!शिक्षक उसे इन्सान बनाये,कमियों को…

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