कविता और कहानी
कविता क्या है
कविता क्या है शब्दों के अथाह समंदर से चुनकर पिरोई गई शब्दों की माला। जब कवि के ह्रदय में प्रज्वलित होती है ज्वाला तन मन यूँ सुलगे जैसे पी आया हो हाला तब बनती है शब्दों की माला । कविता क्या है शब्दों के फूलों से सजाया गया शब्दों का गुलदस्ता । जब कवि के…
जिसे तू क़बूल कर ले वो दुआ कहाँ से लाऊँ
कविता मल्होत्रा (स्थायी स्तंभकार) स्वार्थ साधते, नए युग में पदार्पण, खुद आगे बढ़ने के लिए दूसरों को नीचे गिराता मानवता का पतन, नई सदी में अपनत्व का तर्पण, क्या यही है मेरे सपनों का भारत? जब तक समूचे वतन की सम्मिलित सोच इस समस्या का सामूहिक समाधान नहीं तलाशेगी, तब तक, कोई हल नहीं निकलने…
भारत में उतर आए भगवान
भारत में उतर आए भगवान मगर नहीं समझा इंसान सफेद सफेद कपड़ों को पहने ऊपर नीली पहनी पोशाक क्यों मुंह पर लगाया मास्क अरे इतना तो तू जान। जमीं पर उतर आए भगवान। सारे रोगों से तुझे बचाएं लगा दांव पर अपनी जान जमीं पर उतर आए भगवान। पूजा इनकी कर ले ह्रदय में रख…
अनुराधा प्रकाशन का पाँच साझा संकलन,
डॉक्टर सुधीर सिंह अनुराधा प्रकाशन का पाँच साझा संकलन, राष्ट्रभाषा हिंदी हेतु सचमुच अमृत-कलश है. जिसके लोकार्पण के अवसर पर आयोजित, सजाया हुआ इंद्रधनुषी साहित्य-महोत्सव है. समर्पित साहित्यकारों ने हिंदी-साहित्य को, अपनी लेखनी से तहेदिल से खूब संवारा है. लोगों ने सुना और सुनाया बहुत ही चाव से, माँ वीणा वादिनी की ही सब महती…
स्वछंद लेखन
हम तो ऐसा ही लिखते हैं दलील ये अच्छे दिखते हैं मौलिकता का हो विश्वास नयी शैली का शिलान्यास खींच कर एक नई लकीर लिख डाले वो नई तहरीर तय नियम में ला बदलाव दूर ही हो बोझिल ठहराव हो सहज ग्राह्य तथा सरल मधु सा मीठा, ना हो गरल नव विधा ही हो अतिप्रिय…
शिक्षा वही जो राष्ट्र का गौरव बढ़ाए
शिक्षा ही तो इंसान को संस्कार दे चरित्रवान बना जीवन के पथ पर आगे बढ़ने को प्रेरित करती है। शिक्षा राष्ट्र निर्माण का आधार है,तो शिक्षक ही कर्णधार।शिक्षक ऐसा चाहिये,जैसे हो माटी कुम्हार,ठोक ठोक कर घट गढ़े, करा दे बेड़ा पार। बच्चे की पहली गुरु माँ पिता दिखाये स्कूल की राह!शिक्षक उसे इन्सान बनाये,कमियों को…
मातृभाषा सीखने से भविष्य की पीढ़ियों को अपने सामाजिक और सांस्कृतिक ताने-बाने के साथ संबंध बनाने में मदद मिलेगी : सत्यवान सौरभ
(मातृभाषा में पढाई वैचारिक समझ के आधार पर एक घरेलू प्रणाली के साथ सीखने और परीक्षा-आधारित शिक्षा की रट विधि को बदलने में मदद करेगा। जिसका उद्देश्य छात्र के अपनी भाषा में ज्ञानात्मक कौशल को सुधारना है, ताकि वह अन्य भाषाओँ के बोझ तले न दब सके और चाव से अपनी प्राथमिक शिक्षा को पूर्ण…
कविता – आ देख
तेरी याद में मैं दिन-रात भुलाए बैठा हूं आ देख मैं फिर मुस्कुराए बैठा हूं। वह जो तेरी कमी थी मेरे सीने में, उसकी मजार बनाए बैठा हूं, आ देख मैं फिर मुस्कुराए बैठा हूं। जमाने की परवाह ना मुझे कल थी ना आज है मुझे तो लग रहा था तू हर हाल में मेरे…
भाषा तभी बड़ी बनती है
अज्ञानी था मानव आदिम सीखा प्रकृति से जीवन जीना रहना गाना पशु पक्षी सम उनकी भाषा में बतियाना जैसी हुई पहचान स्वरों की विविध प्राणियों तरु पत्तों की गगन गरज की,वायु सरण की सरित प्रवाह,जल थल औ नभ की वैसी ही ध्वनियों की रचना अभिव्यक्ति के लिए किया फिर अंतर्ध्वनि विभिन्न भावों की उसी रूप…
मैं “कंगना ” हूं सुन लो लोगों,
(सुनीता जायसवाल फैजाबाद उत्तर प्रदेश) अबला समझने की भूल ना करनाआऊंगी कलाई में “हथकड़ी” बनकरजेवर समझने की भूल ना करना! झुक गई हूं मैं जरा सा क्योंकि,मैं अदब की परवरिश हूँमेरी झुकी पीठ को तुम ,पायदान समझने की भूल ना करना! गिरेबान खाली नहीं तुम्हारा ,दुनिया भर की करतूतों से ,मेरे पाक दामन पर तुम,उंगली…
