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पावन गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर

गुरु का ज्ञान ही आदमी का जीवन-पथ,सदा प्रकाशित व प्रशस्त करता रहता है.स्वयं से यहां जब  हारने लगता है इंसान,शीघ्र पूज्य गुरुजी  का आह्वान करता है. गम का अंधेरा हो  या दुख का पहाड़ हो,गुरु की  ज्ञान-ज्योति सब दूर कर देता है.गुरू के प्रति सिर्फ क्ष्रद्धाऔर समर्पण हो,ब्रह्मस्वरूप गुरुवर हाथ पकड़ चलाता है. अपनी गुरूभक्ति…

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डेढ़ माह का जीवन

कुश्लेन्द्र श्रीवास्तव (वारिष्ट पत्रकार एवं साहित्यकार), गाडरवारा, मध्य प्रदेश अस्पताल के जनरल वार्ड में आई तब उसकी नजर वार्ड के नए पेशेन्ट पर पड़ी थी। बेड नम्बर 8 पर एक दस साल का बालक आँख बंद किए लेटा था पास में ही एक कम उम्र की महिला बैठी थी जिसके चेहरे पर उदासी थी। उसने…

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“मूल्यों का अपहरण”

हमारे देश में भ्रष्टाचार का ही चलन है। जो भ्रष्ट नहीं है वो पिछड़ा हुआ है। परिवार, समाज और प्रांत सभी इसकी गिरफ्त में हैं। केवल नेता या अफसर ही नहीं, सामान्य नागरिक भी भ्रष्ट आचरण को अपना चुका है। मर्यादित आचरण से सभी अनभिज्ञ हैं। दुख की बात है कि परिचित होना भी नहीं…

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सियासत

(यशपाल सिंह “यश”) उनके बयान और, ये अंदाज़ देखिए इक्कीसवीं सदी का, तख्तो ताज देखिए जाहिर है हुआ मुल्क में, बदलाव कुछ बड़ा  कल तक थी जो खामोश, वो आवाज़ देखिए  हर रोज उठाते जो, किसी और पर उंगली  कल उनका देखिए, फिर उनका आज देखिए  हो जाए खिलाफत में, भले मुल्क का नुक़सान बिगड़ा…

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एक गीत चलो गाए

एक गीत चलो गाए जिस संग ज़िंदगी गाए मुसर्रत हो जिसमें इतनी कि मन झुम जाए सिमट दे जो हर ग़मों को इक नगण्य बिंदु में दर्द हो चाहे जितना भी हर कोई भूल जाए एक गीत चलो गाए जिस संग ज़िंदगी गाए। मुरझाईं रुखसारों की हर कलियाँ खिल उठे मौन होंठों पे फिर से…

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पत्तों की ताली

अमरैया की छांव तले  नन्हे नन्हे ,पांव चले । हरी-भरी, डाली में झूमे बचपन जिसकी ,गोद पले । मीठे फल और ठंडी छांव बरगद वाला, मेरा गांव । लट देखो ,धरती को चूमे मस्ती में वो सर- सर झूमे  । ज्यो  मतवाली नाव चले  अमरैया  की छांव तले।  नन्हे नन्हे पांव चले।  फल हैं जैसे,…

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ग्रहण

होती है सिर्फ़ एक खगोलीय घटना ये सूर्य ग्रहण या फिर चंद्र ग्रहण किंतु हो सकते हैं कई दुष्प्रभाव भी इनके करते करते परिक्रमा आता जब चंद्रमा बीच में धरती और सूर्य के तो ढाँप कर सूर्य को कर देता उसे तेजहीन रुक सा जाता है कुछ समय के लिए मानो जीवन ही कहलाता है…

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एक बैठक

एक दिन सभी महिलाओं के आत्मसम्मान  एवं  भावनाओं ने बैठक रखी। दूर एक निर्जन पहाड़ी की चोटी पर, जहाँ कोई मनुष्यरूपी प्राणी नहीं पहुंच पाता, सभी मिले। उनका साथ देने के लिए कल-कल बहती नदियां, ऊँची पहाडियाँ, आकाश में उड़ते पंछी थे। उनका हौसला बढ़ाने के लिए सूरज भी चमक रहा था और बादल भी…

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‘प्रवासी मजदूर और बरसात का कहर’-

आज सारे संसार के सामने कोरोना महामारी का प्रकोप पांव पसार खडा़ है, मानव को झंकजोर कर रख दिया है.एक दूसरे की संवेदना शून्य सी जान पडती है. विश्व की सभ्यता, संस्कृति और सामाजिक ढांचे में अचानक बदलाव आया है, इन सब का शिकार मजदूर वर्ग हुआ है. भारत में प्रवासी मजदूरों के साथ एक…

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लाॅकडाउन

            करीब चार महीने पहले ई रिक्शा पर कुछ सामान लादकर एक आदमी किराए का   एक कमरा खोज रहा था। उसके साथ उसकी पत्नी और दो बच्चे  भी थे जो बार बार रिक्शे से बाहर झांक रहे थे। शायद उनमें उस घर को देखने की उत्सुकता हो रही होगी जहां उनको रहना था। उन चारों…

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