कविता और कहानी
हिन्दी फैल रही दुनिया में
हिन्दी हिन्दुस्तान की ही, रही नहीं अब भाषा फैल रही है दुनिया में, बन जन-जन की आशा हिन्दी हिन्दुस्तान की ही रही…….. आजादी में फर्ज निभाया, बनके जैसे फौजी दसों दिशा के लोग बने थे, अजब मनमौजी बनी देश की भाषा यह, दुनिया की अभिलाषा हिन्दी हिन्दुस्तान की ही रही…….. दुनिया में हिन्दी बिना अब,…
प्रथम राष्ट्र भाषा हो हिन्दी
जग की राज दुलारी हिन्दी है भारत माता की बिन्दी हिन्दी बने विश्व की भाषा स्वाभिमान की हो परिभाषा हिन्दी को सम्मान मिले अब जन जन से बस मान मिले अब आओ मिलकर कदम बढ़ायें घर घर में जाकर समझायें बोल चाल की भाषा हिन्दी चमक उठे हिंदी की बिन्दी हिन्दी की तो बात अलग…
हम करतारपुर गलियारे का काम समय पर पूरा करने को प्रतिबद्ध: शाह
केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार 31 अगस्त को कहा कि मोदी सरकार करतारपुर गलियारे का काम निश्चित समय पर पूरा करने को लेकर प्रतिबद्ध है। भारत और पाकिस्तान के बीच करतारपुर गलियारे को लेकर शुक्रवार 30 अगस्त को पंजाब के गुरदासपुर में ‘जीरो प्वाइंट’ पर तकनीकी समिति की बैठक हुई थी जिसके बाद…
बच्चों का प्यार
इंद्रधनुषी रंगों से रंग देते हैं वो अपने प्यार को कोरे कागज पर। कितने मासूम होते हैं वो फिदा हो जाता हूं मैं इस आदत पर। क्या मैं इतना मासूम बन सकता हूं सोचता रहता हूं मैं तन्हाई में इतनी परत काम ,क्रोध,लोभ,मोह की चढ़ी है वक्त लगेगा हटाने में। काश मेरा बचपन फिर से…
।। कुछ करते क्यों नहीं ।।
जनसंख्या विस्फोट को कंट्रोल करते क्यों नहीं हैं, मिल सारे नेता ऐसा कोई कानून गढ़ते क्यों नहीं हैं। प्रकृति भी देगी किसी दिन धोखा डरते क्यों नहीं हैं, हम दो हमारे दो का नारा ये सच करते क्यों नहीं हैं। कहीं अकाल सदियों से तो कहीं बरस रहा पानी। आया बुढ़ापा पता ना चला कब…
बाल कविता – शरारती चिम्पू
एक मदारी का बंदर था चिम्पू, रोज उछल कूद बहुत मचाता। अपनी शैतानी पर खूब इठलाता, एक रोज चिम्पू हो गया आजाद। मदारी को छोड़ जंगल जा पहुचा, मोबाइल मदारी का है उसके पास। सब जंगल के जानवरों को दिखाता, अपना रोब उन पर खूब जमाता। सबका दिल मोबाइल पर आया, जंगल का राजा आया…
उत्तराखण्ड के पहाड़ अब दरक रहे है़
उत्तराखण्ड के पहाड़ अब दरक रहे है़ टूट कर धीरे धीरे खिसक कर सरक रहे है़ ! टूट कर चूर हो रहा है़ अब उत्तराखण्ड का सीना मुश्किल होता जा रहा है़ अब पहाडो मे जीना ! जगह जगह उत्तराखण्ड मे आपदाएँ मुँह पसारे है़ , पहाडो मे प्रसिध्द अलकनन्दा मंदाकिनी दो धारे है़ !…
जन मानस के हृदय में निस्वार्थ प्रेम उगा पाएँ राष्ट्र निर्माण में कुछ एैसा योगदान कर जाएँ
नवम माह नवीन सृजन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है,तो क्यूँ न इस वर्ष के नौंवे महीने में अपने अँदर के शैशव की मासूमियत को जागृत कर के निस्वार्थता को सृजित किया जाए,और एक मज़बूत राष्ट्र के निर्माण में अपना सहयोग देने के लिए सबसे पहले अपने ही अहम को दफ़ना कर खुद…
कविता- टेढ़ी लुगाई
का कयें बैना बनत ना कैवो अब तो मुश्किल है दुख सैवो बड़ी कुलच्छन बहुआ आयी रोज रोज ही लड़े लड़ाई एक दिन बा उठत भोर सै रोन लगी बा जोर जोर सै कैन लगी मैं मायके जैहों ई घर में एक दिन ना रैहों मैनें कई का बात बताओ कीने का कई हमें सुनाओ…
