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वर्तमान परिप्रेक्ष्य में श्री राम

विधा -संस्मरण वर्तमान परिप्रेक्ष्य में श्री राम को जब मैं हिंदू समाज में देखती हूं, तो हृदय बड़ा व्यथित होता है। जब श्रीराम और रामचरित मानस पर लोग उंगली उठाते हैं। तो मैं यही सोचकर मन शांत कर लेती हूं कि दुष्ट, दुर्जन, असुर प्रत्येक युग में जन्मते हैं। चाहे सतयुग, त्रेता, द्वापर ,कलयुग हो।…

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भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर

#karpuri thakur #bharatratna विधा:-दोहे भारत के राज्य बिहार, था पितौंझिया ग्राम।  जिला रहा समस्तीपुर, राजनीति सरनाम॥  जन्म स्थली प्रसिद्ध हुई, अब कर्पूरी ग्राम।  त्याग गवाही दे रहा, कर्पूरी का नाम॥  कर्पूरी ठाकुर जन्म, लेते हिन्दू धर्म।  पिता गोकुल घर पेशा, नाईगीरी कर्म॥  माँ रामदुलारि देवी, सन उनीस चौबीस।  जननायक अवतार लें, माह जनवरी बीस॥  बडा़…

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परियों की नन्ही शहजादी

परीलोक से परियों की नन्ही शहजादी आई,नन्हे हाथों के नन्हे पंखों से उड़ कर आई। उससे बातें करते रहना,कितना अच्छा लगता,जी भर कर देखें उसको पर,कभी नहीं जी भरता। इंद्रलोक की सबसे सुंदर सूरत लेकर आई।घर के मधुबन की क्यारी में ज्यों बसंत ऋतु आई।परीलोक से परियों की नन्ही शहजादी आई। सुंदर हीरे मोती सी…

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अवध में राम आए हैं

 – रवीन्द्र जुगरान      कलयुग में त्रेतायुग के, सरकार आए हैं।     देखो-देखो आज अवध में, राम आए हैं।। जग नियंता सीताराम, मन मंदिर में बसे हुए।  भारत की माटी में खेलकर , दशरथ नंदन बढ़े हुए।। जीवन में संबंधों की, मर्यादा लाए हैं। ग्राम- नगर में खुशियों के, अम्बार छाए हैं।।  …

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रामजी तुमको आना पड़ेगा

राम मंदिर बनाया है मन को,राम जी तुमको आना पड़ेगा। मेरा दिल है अयोध्या तुम्हारी,मिथिला नगरी है धड़कन हमारी।मेरी सांसों की नगरी में आकर,उम्र भर तुमको रहना पड़ेगा। आखिरी शाम जीवन की आये,मेरे प्रभु आना तुम बिन बुलाए।मेरा सर रख के गोदी में अपनी,मेरे भगवन सुलाना पड़ेगा। चार कंधों का लेकर सहारा,कैसे ढूंढ़ूगा मैं घर…

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जलाओ री सखी मंगल दीप!

जलाओ री सखी मंगलदीप,आज घर आये हैं राजा राम।राह बुहारो ये महल सजाओ ,आयो‌ शुभ घड़ी‌ ये वर्षों बाद।फूलों का वन्दनवार लगाओ,आये हैं जग के ही तारनहार।जलाओ री सखी मंगलदीप——-।शुभ ये घड़ी शुभ गीत सुनाओ,मिलजुलकर सब नाचो गाओ।सदियों से इन्तजार था इसका,आयो शुभ दिन है वह आयो।पांव पखारो जी आरती गावो,झूमि उठे सकल संसार सखी।जलाओ…

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श्रीराम जीवन काव्य

विधा:-दुर्मिल सवैया छंदसुत कौशलया जब राम जने,भइयों मिल चार हुये तब थे।अवधेश मिटे सब कष्ट मिले, नगरी घृत दीप जले अब थे।दरबार बॅंटे उपहार प्रजा, सचिवों नृप के मन भी खुश थे।बजती ध्वनि नूपुर गान सुना, हिजड़ों निकसे मुख आशिष थे॥ ॲंगना सब बालक खेल रहे, खुश माँ उनकीं यह देख सभी।मन चैन मिटे मुख…

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 राष्ट्रीय महापर्व छब्बीस जनवरी।

छब्बीस जनवरी पर्व मनाते, संविधान के मान में।  लागू सन् उन्नीस सौ पचास से, भारत के सम्मान में॥  प्रथम राष्ट्रपति डाॅ राजेन्द्र प्रसाद ने, देश का मान बढ़ाया।  तिरंगा लाल किला पर दिल्ली, प्रातः आठ बजे फहराया॥  मिली सलामी इक्कीस तोपों, वीरों के बलिदान में।  छब्बीस जनवरी पर्व मनाते, संविधान के मान में॥  राष्ट्रपति भाषण…

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आईए! राम!

आईए! राम!अयोध्या में आपका स्वागत है।वैसे, मंदिरों-महलों की आपको जरूरत नहीं;लेकिन, श्रद्धा का भाव लेकर आईए! आप ही खुद प्रकाश हो,दीपकों की आपको जरूरत क्या;मगर, ज्ञान का प्रकाश लेकर आईए! आप सर्वव्यापी हो,आप जय-जयकार नहीं चाहते;मगर, गुणों की जय-जयकार लेकर आईए! जो सबकी भूख मिटाते हैं,उनको पकवानों से क्या लेना-देना;लेकिन, आदर्श के पकवान लेकर आईए!…

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खुदगर्जी

रोशनी एम.बी.ए की पढ़ाई पूरी करने के बाद जॉब कर रही थी। परिवार वाले उससे शादी के लिए कहते हैं तो वह मना कर देती। रोशनी कई साल से एक लड़के के संपर्क में थी। जो उसके परिवार की हैसियत से बहुत कम था। वह दूसरे धर्म संप्रदाय से भी था। रोशनी अच्छी तरह से…

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