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आपके आने के बाद

हो गये मौसम सुहाने, आपके आने के बाद, हो गई हर ऋतु बसंती,आपके आने के बाद। नींद कोसों दूर जाकर बैठ जाती आंखों से, ख्वाब सूखे पत्तों की मानिंद झड़ते शाखों से। हो गए सपने सलौने,आपके आने के बाद, नींद मीठी हो गई है,आपके आने के बाद।। मिट गई मीलों पुरानी दूरियां इन दिलों की,…

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कैसे कैसे लोग

    ..दोपहर की तेज चिलचिलाती धूप में रीना बारबार पसीना पोंछती हुई रिक्शेवाले का इंतजार कर रही थी । सामने से ही बहुत सी साथी शिक्षिकाएं अपनी अपनी गाड़ियों से निकल रहीं थी पर सभी के रास्ते अलग अलग थे । तभी सामने एक गाड़ी रुकी ।      “अरे रीना जी कैसे खड़ी है ?”…

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भूकंप

मत बनाओ! इंसानों गगनचुंबी इमारतें धरती खोदकर वरना: कुदरत का करिश्मा! आंखों से देख ली फिर भी नहीं मानते अपनी बुद्धि का प्रदर्शन करते रहते सर पर मौत का छत डालकर बना लेते सौ सौ तल्ले और अहंकार में कहते मेरे देश की बल्ले बल्ले। जब सहती नहीं भार पृथ्वी की परतें सौ सौ तल्ले…

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पहले जहाँ रोज करते थे

पहले जहाँ रोज करते थे लोग उसका पूजा बन्दन और विवाह के अवसर पर नई दुल्हन करती थी धूप ,प्रसाद का अर्पण। सूख गया वह पेड़ सुन तानो की आँधियाँ बिखर गए सारे दरख़्त और रस भरी पत्तियां नजर लगी कितनो की सहन न कर पायीं जो इनकी अटखेलियां। अबतो सुख ही सुख है दर्द…

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शीर्षक : “वो सर्द रात”

वो सर्द हवाएं हो : वो काली घटाएं हो। वो शर्मीली निगाहे हो : वो सिसकती आहे हो। ठंड की कपन हो : थोड़ी सी अगन हो। थोड़ी सी लगन हो : साथ में सजन हो । बस फिर किया, हो बाहों में बाहें, हो हाथो में हाथ, फिर सदा याद आयेंगी=वो सर्द रात :…

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व्यंग्य- बाबापंथी

आजकल बाबाओं का ट्रेंड चल गया है, एक गया तो छः महीने में दूसरा आना ही है लाइमलाइट में। देखते हैं इस बार वही हाल है या फिर बाबा कमाल है। कमाल से याद आया कि चाची 420 फ़िल्म की तरह किसी ने भी बाबा 420 फ़िल्म नहीं बनाई। मुंह में पान चबाते हुए एक…

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सास गयी ससुराल गया

        जिस तरह मां के न रहने पर बचपन चला जाता है , ठीक उसी तरह सास के जाने पर भी एक बहू का रूप खत्म हो जाता है और बाकी लोग केवल पट्टीदार की भूमिका में रह जाते हैं। वह लाड़-प्यार ,डांट डपट सभी केवल याद बनकर रह जाते हैं जो जीवन भर एक…

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किसान

  अन्न उपजाता है जगत हित   वह जग के लिए वरदान है।   कृषक अपने श्रम से करता   जगतपोषण का अवदान है।    अन्न मोती के लिए किसान     लू के झोंके से भी लड़ता।    गेहूं की बालियों के लिए    सघन शीत लहरों में अड़ता।    क्षुधापूर्ति होता है जग का…

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वक्त दो वक्त जियो खुद के लिए

रचयिता  विशिष्टाचार्य डॉ.सर्वेश कुमार मिश्र काशीकुंज जमुनीपुर प्रयागराज वक्त दो वक्त जियो खुद के लिए उम्र बहुत है गुजार दी दूजों के लिए दूजे दूजे ही होते हैं अपने भी सपने से होते हैं निन्यानवे काम करो उनका बस कोई एक ना करो काम उनका फिर तुम सा कोई जाहिल नहीं फिर तुम सा कोई…

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मां सरस्वती की कृपा का पर्व है बसंत पंचमी

मां सरस्वती की कृपा का पर्व है बसंत पंचमी बसंत पंचमी या श्रीपंचमी एक हिन्दू त्योहार है।बसंत की शुरुआत माघ महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी से होती है। इस दिन को बुद्धि, ज्ञान और कला की देवी सरस्वती की पूजा-आराधना के दिन के रूप में मनाया जाता है।यह पूजा पूर्वी भारत, पश्चिमोत्तर बांग्लादेश, नेपाल…

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