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 रावण सावधान ! : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव

राजनीतिक सफरनामा फिर रावण को मारने की तैयारी है । नवरात्रि में विराजी माॅ दुर्गा के प्रति अगाध श्रद्धा और भक्ति ने सारे देश को धार्मिक कर दिया है । माॅ दुर्गा हमें शक्ति दें, माॅ दुर्गा हमारे जीवन में आए विषाद को हर लें । शक्ति की उपासना का यह महापर्व रावण के पुतले…

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रेशमा   :  डॉ सरला सिंह स्निग्धा

   रेशमा एक बहुत ही सीधी-सादी लड़की थी । जहां उसके साथ की लड़कियां फ़ैशन ,टीवी और मोबाइल में लगी रहती थी वहीं वह उम्र से पहले ही बड़ी हो चुकी थी। रेशमा का पिता शराबी था वह दर्जी का काम किया करता था परन्तु सारी की सारी कमाई अय्याशी और शराब पर लुटा दिया…

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सात फेरे

सात फेरे (नमस्कार प्रिय पाठकों (मित्रों) मेरे द्वारा लिखी यह कहानी पूरी तरह काल्पनिक हैं । किसी भी व्यक्ति का नाम या कहानी का कोई क़िस्सा सयोंग ही होगा। कहानी के शीर्षक के आधार पर जो सात वचन मैंने लिए हैं वो वास्तविक हैं । कहानी का उद्देश्य समाज में महिलाओं की स्थिति को दर्शाना…

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पावन शिक्षक दिवस पर समर्पित चंद शब्द-पुष्प:

कृष्णजैसा सारथी जब अर्जुन को मिला, युद्धभूमि में तब गीता का उद्घोष हुआ. तब एकआज्ञाकारी शिष्य सा था कुंतीपुत्र, गुरु के रूप में देवकीनंदनको आना पड़ा. अन्याय,अत्याचार और भयंकर भ्रष्टाचार; जब भी समाज में निर्बाधबढ़ने लगता है. गिरिधारी सा गुरु और पार्थ साविद्यार्थी, काल के कोख सेतबतुरंतपैदा होता है. बिगड़ती हुई व्यवस्था को पटरी परलाना,…

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पंच से पक्षकार

          हरिप्रसाद और रामप्रसाद दोनों सगे भाई थे। उम्र के आखिरी पड़ाव तक दोनों के रिश्ते ठीक-ठाक थे। दोनों ने आपसी सहमति से रामनगर चौराहे वाली अपनी पैतृक जमीन पर दुकान बनाने का सोचा, ताकि उससे जो आय हो उससे उनका जीवन सुचारू रूप से चल सके।       दुकान का काम चल ही रहा था…

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शिक्षक दिवस (गुरु पर) पर विशेष

लाल बिहारी लाल बिना गुरु ज्ञान जग में,ले ना पाया कोय।गुरु का जो मान रखा, जग बैरी ना होय।1। गुरु को गुरु की तरह, माने आज इंसान।उसका मान सभी करे,हरी करे कल्याण।2। गुरु ज्ञान की खान है,ले लो जितनी चाह।भला करे बस हर घड़ी,लाल खुलेगा राह।3। गुरु बिन जग में कुछ भी,पाना नहीं असान।गुरु करे…

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गुरुवर जलते दीप से

दूर तिमिर को जो करें, बांटे सच्चा ज्ञान। मिट्टी को जीवित करें, गुरुवर वो भगवान।। जब रिश्ते हैं टूटते, होते विफल विधान। गुरुवर तब सम्बल बने, होते बड़े महान।। नानक, गौतम, द्रोण सँग, कौटिल्या, संदीप। अपने- अपने दौर के, मानवता के दीप।। चाहत को पर दे यही, स्वप्न करे साकार। शिक्षक अपने ज्ञान से, जीवन…

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मौन मैं और मेरे शब्द हो जाओ तुम : नमिता नमन

मौन मैं और मेरे शब्द हो जाओ तुम प्रीति का एक प्रारब्ध हो जाओ तुम एक पावन शिला मन अहिल्या सा था तुम मुझे राम जैसी छुअन से मिले  मुझको आकार साकार तुमसे मिला जैसे मीरा की भक्ति को मोहन मिले   सूक्ष्मतम मैं रहूं श्रेष्ठतम तुम रहो प्राण तक मेरे प्रतिबद्ध हो जाओ तुम…

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हिन्दी

    हिन्दी हिन्दुस्तान की भाषा     इसकी तो शान निराली है।     होड़ नहीं कर सकता कोई     अमृत की मानों प्याली है।     अजर अमर  इसकी रचनाएँ     रामचरित सा ग्रंथ यहाँ है ।     प्रेमचंद की रचनाएँ देखो     प्रियवर हैं वे जहाँ जहाँ हैं।     फिल्में इसकी मोहित करतीं     मिलती सर्वाधिक…

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हिन्दी और नागरी लिपि

हिन्दी     का    परचम     लहराएं!                        नागरी लिपि    का    मान  बढ़ाएं!! हम  हिन्दी दिवस-  मनाते   हैं  भारत   में    प्रतिवर्ष, उत्साहित-उल्लसित हो कहते  हिन्दी  है  निज भाषा, यही एकता सूत्र , यही   है   राष्ट्रीयता    की  पहचान, करें  इसे  मजबूत,  इसी  से   होगा  सबका   उत्कर्ष, हम सब का  कर्तव्य यही  कि  राष्ट्र- भाव से  भरकर एक राग से…

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