कविता और कहानी
कच्चे धागों का पक्का बंधन रक्षाबंधन का त्योहार
डॉक्टर सुधीर सिंह कच्चे धागों का पक्का बंधन रक्षाबंधन का त्योहार,पूजा की थाली में राखी बहन का है अनुपम प्यार. भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक यह पावन पर्व,वर्ष में एक बार आता है भाई-बहन का यह उत्सव. ससुराल में बस गई बहना करती भैया का इंतजार,रेशम की डोरी में लिपटा है बहन काअनमोल प्यार….
आओं स्वस्थ्य बनाए
सुनसान राहें पंछियों का कोलाहल दुबके इंसान घरों में मुंडेर पर बोलता कौआ अब मेहमान नही आता संकेत लग रहे हो जैसे मानों भ्रम जाल में हो फंसे। नही बंधे झूले सावन में पेड़ों पर उन्मुक्त जीवन बंधन हुआ अलग अलग हुए अनमने से विचार बाहर जाने से पहले टंगे मन में भय से विचार।…
गुरूकुल
श्रीमती कविता मल्होत्रा दोस्तों मित्रता दिवस की रस्म हम यूँ निभा लेते हैं निस्वार्थ प्रेम बनकर निस्वार्थता को मित्र बना लेते हैं अपने घरौंदों की जड़ें दिमाग़ में न बनाकर दिलों में बनाई जाएँ तो हर एक घर ही मंदिर हो जाए !! दिलों को अपनी ख्वाहिशों की सियासत नहीं बल्कि जीवन के परम उद्देश्य…
विधाता की सुंदर रचना
तुम आज इस तरह खामोश हो, युँ उदासी का लिबास चेहरे पर क्यों डाले जाती हो भावनाओं को आहत मत होने दो उन्हें सुलगाओ नया लक्ष्य दो विकट परिस्थितियाँ बहुत आएँगी पग -पग पर पांव डगमगाऐगे तुम मत ठहरना ध्येय अटल साधे रखना माना की तुम स्त्री हो, क्यों तुम्हारा स्त्री होना कभी -कभी समाज…
” सेवाराम”
अर्चना त्यागी (जोधपुर , राजस्थान ) अपने गांव गए हुए दो साल से अधिक समय हो चुका था। काम की व्यस्तता के चलते जा ही नहीं पा रहा था। रह रह कर गांव की पगडंडी जैसे पुकार रही थी मुझे। आम के बाग, खेत खलिहान सभी जैसे आवाज लगा रहे थे। घर से बहुत दूर…
कोरोना विनाशक दोहे
आधा नीबू काटकर गरम नीर में डाल,विटामिन सी जाय बढ़ पीतेही तत्कालअदरक घीगुड डाल के गोलीलेउबनायदिनमे निश्चित रूपसे तीनबारनितखायगर्म दूधहल्दी मिलाकर पीए जो व्यक्तिडरेकोरोना देखकरउसकीहिम्मत शक्तिगर्मनीरका भापले कम-सेकम इकबारकोरोनाके कहरमे बिना खर्च उपचार।विटामिन बी केलिए खाएं गोभी पातहरीसब्जिया देतहै आयरनडीअनुपातप्रातः उठकर धूपमे हरदिन बैठे आप,ऊर्जा मिलतीहै स्वतः मिटेगाते संतापदलचीनीअदरकलौग अश्वगंधागिलोयतुलसीहल्दीमुरेठी गुडअजवानमिलोयखूबउबालो औरफिर लेलो अर्कबनायखजूरबदाम अखरोट…
खामोश
मै मंहगाई हूँतेरी कमर तोड़ने आई हूँकर ले तू लाख जतनलूट के रहूँगी तेरा अमनमेरा तुझसे रिश्ता पुराना हैतू मुझे बुलाये न बुलायेमुझे तो तेरे घर आना हैतेरी ज़िंदगी पे तो मेरा हक़सौफ़ीसदी मालिकाना हैमै डंके की चोट पे कहती हूँकोई क्या कर लेगा मेरामै अकेली नहीं हूँजमाखोरियों/कालाबाज़ारियों/सटोरियोंसे रिश्ता पुराना है मेरामै इनकी छत्र छाया…
