कविता और कहानी
एक गीत चलो गाए
एक गीत चलो गाए जिस संग ज़िंदगी गाए मुसर्रत हो जिसमें इतनी कि मन झुम जाए सिमट दे जो हर ग़मों को इक नगण्य बिंदु में दर्द हो चाहे जितना भी हर कोई भूल जाए एक गीत चलो गाए जिस संग ज़िंदगी गाए। मुरझाईं रुखसारों की हर कलियाँ खिल उठे मौन होंठों पे फिर से…
पत्तों की ताली
अमरैया की छांव तले नन्हे नन्हे ,पांव चले । हरी-भरी, डाली में झूमे बचपन जिसकी ,गोद पले । मीठे फल और ठंडी छांव बरगद वाला, मेरा गांव । लट देखो ,धरती को चूमे मस्ती में वो सर- सर झूमे । ज्यो मतवाली नाव चले अमरैया की छांव तले। नन्हे नन्हे पांव चले। फल हैं जैसे,…
‘प्रवासी मजदूर और बरसात का कहर’-
आज सारे संसार के सामने कोरोना महामारी का प्रकोप पांव पसार खडा़ है, मानव को झंकजोर कर रख दिया है.एक दूसरे की संवेदना शून्य सी जान पडती है. विश्व की सभ्यता, संस्कृति और सामाजिक ढांचे में अचानक बदलाव आया है, इन सब का शिकार मजदूर वर्ग हुआ है. भारत में प्रवासी मजदूरों के साथ एक…
सदियों तक पीड़ा सहकर …..
सदियों तक पीड़ा सहकर हमने ये दौलत पाई है घना उजाला दिखता बाहर , भीतर तो तन्हाई है । अंतस् में कई प्रश्न गूंजते , क्या ये पीर पराई है रूखे- सूखे रिश्ते ढोना,ये भी तो इक सच्चाई है सदियों तक पीड़ा सहकर हमने ये दौलत पाई है । तन पूरा ,मन रहा अधूरा, कितनी…
