कविता और कहानी
मेरा गांव बदल रहा है,
अम्बरीश श्रीवास्तव मेरा गांव बदल रहा है, सोया हुआ रक्त उबल रहा है। पहले मिलजुल कर रहते थे, अब एक दूसरे को निगल रहा है ।। सुना था मकान कच्चे है पर रिश्ते पक्के होते थे गांव में । बच्चे बूढे, हारे थके श्रमिक किसान सब खुश थे छाव में ।। आज छांव छितर गई…
हिमगिरि कहता गर्वित होकर
डॉक्टर राहुल हिमगिरि कहता गर्वित होकर हम भी यहाँ खड़े हैं तुम सा कोई नहीं बहादुर जो भी बड़े-बड़े हैं। अगर सहेलिया चीन से अपनी तुमने अब की हार अत्याचार करेगा तुम पर वह फिर बारम्बार। चूर-चूर हो जाये उसके अपने सारे ख़्वाब इसलिए देना है उसको अब मुहँतोड़ जवाब। चालबाज है धूर्त कमीना करता…
Remember the Name
…..ANSHUL SHARMA Nothing to lose, everything to gain…said the one..living in pain,No, don’t be in vain…just let the eyes rainlife is so vast..who cares about the pastbut, my dreams are dying…no, they won’t until you stop trying…People are leaving and getting away,none of it matters, your soul will stay…Yes, I will make my will strong..enough…
श्रद्धा के हैं पुष्प समर्पित अमर शहीदों के चरणों में
डॉक्टर सुधीर सिंह श्रद्धा के हैं पुष्प समर्पित अमर शहीदों के चरणों में;उनकी याद में छलके आँसू,हर हिंदुस्तानी है गम में. शहीदों की इस कुर्बानी को व्यर्थ नहीं जाने देंगे हम,सबों की बलिदानी का बदला लेकर ही दम लेंगे हम. चीन कीओछी हरकत पर बौखला गया है हिंदुस्तान,खून खौल रहा है हिंद का,चीन का होगा…
सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या
यशपाल सिंह “यश” जहां अमृत भी संभावित था वहां गरल चुन लिया उन्होंनेजीवन में संघर्ष बढ़ा तो, काम सरल चुन लिया उन्होंने सूख रहे तरुवर जीवन के, पर हरियाली संभावित थीमगर शुष्क उपवन की खातिर, दावानल चुन लिया उन्होंने जीवन के हर दोराहे पर, ‘पर उपदेश कुशल बहुतेरे’जब अपनी बारी आई तो, मार्ग विफल चुन…
कहानी ; तीसरा बेटा
प्रभुदयाल खट्टर जिस मकान में दीनानाथ जी रहते थे वह मकान उनके अपने नाम था। जिसमें दीनानाथ जी अपनी पत्नी के साथ अकेले रहते थे। हालांकि उनके दो बेटे भी थे मगर दोनों मकान अपना नाम कराने के झगड़े के चलते अपनी अपनी पत्नी को लेकर अलग रहने चले गए थे। यह बात जब दीनानाथ…
“हम क्या करें”
चुग रहे थे हम गुल हाथ में चुभा कांटा गिरा साजी से फूल थी मेरी ही भूल हम क्या करें थे खयालों में मशगूल। उठा ज़मीं से धूल चेहरा हो गया धुले-धूल हम क्या करें। बच कर थे हम चल रहे हौसला से थे हम बढ़ रहे बिछा था पग-पग पर शूल…
मध्यमवर्गीय
जब जब भी तुम्हें ये लगने लगे मैं तुम्हारे करीब हूँ बात बतला दूँ, इश़्क तो धनवान है मैं बहुत गरीब हूँ । दुनिया घुमाने की ख़्वाहिश पूरी नहीं कर सकता हूँ अटूट वादा कर पूरी ज़िन्दगी बाहों में भर सकता हूँ । तुम्हारे हर छोटे बड़े फैसले में जरूर अपनी राय दूँगा सुबह अलसा…
