Latest Updates

कभी यह दर ना छूटे

कोई जाए काबा, कोई जाए काशी, कोई जाए चारों धाम। मेरे लिए तो सबसे बड़ा है गुरु द्वार इस दुनिया में सबसे प्यारा है तेरा दरबार। हम पर सदा कृपा रहे तेरी और सतगुरु तेरा प्यार।। कभी गुरु ना हमसे रूठे कभी यह दर न छूटे हम बच्चे गुरु तेरे, अब रखना लाज हमारी हर…

Read More

प्रकाशोत्सव की बधाई बँटे हर दिल से नफरती धुँध छँटे

जिस परमपिता ने जीवन का उपहार दिया मत उसे सँहार दो प्यासी है हर आत्मा ग़र हो सके तो सबको निस्वार्थ प्यार दो आज हर तरफ हिंसा और आक्रोश का बोलबाला है, जिसने समूची मानवता को अपनी गिरफ़्त में लेकर चौपट कर दिया है। कहीं मज़हब के नाम पर बारूदी हमले हो रहे हैं, तो…

Read More

एक खुशी यह भी

                हल्की हल्की बारिश हो रही थी और हवा भी सर्द थी । रजाई में ही बैठे बैठे थोड़ी सी गर्म चाय मिल जाती तो कितना अच्छा होता पर नहीं ऐसा नहीं हो सकता था। घर में गहमागहमी का मौसम पसरा पड़ा था क्योंकी दादी जी की हालत ख़राब थी । कुछ समय बाद उनको…

Read More

इसी ज़मीन पर

धरती को नरक बनाने वालों चले हो चांद-सितारों के सफर पर रहना धरती पर ही है कब तक उडो़गे लगाकर यांत्रिक पर । मालिक जाने क्‍या होगा सितारों का गर बस गये तुम क्‍या निकल पडे़ हो प्रदूषण, जनसंख्‍या और सर्वनाश करने आसमान पर । तुम चाहते तो बना सकते थे धरती पर स्‍वर्ग किन्‍तु…

Read More

सब्ज़ी मेकर

डॉ. चंद्रेश कुमार छतलानी इस दीपावली वह पहली बार अकेली खाना बना रही थी। सब्ज़ी बिगड़ जाने के डर से मध्यम आंच पर कड़ाही में रखे तेल की गर्माहट के साथ उसके हृदय की गति भी बढ रही थी। उसी समय मिक्सर-ग्राइंडर जैसी आवाज़ निकालते हुए मिनी स्कूटर पर सवार उसके छोटे भाई ने रसोई…

Read More

एक सौ पचासवीं जयन्ती पर

एक सौ पचासवीं जयन्ती मना रहा देश राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की, पक्ष/विपक्ष मित्र/शत्रु सभी दिखते हैं गांधी के विचारों पर एकमत, आज भी प्रासंगिक हैं उनके विचार/ शिक्षाएँ, तभी तो हुनर को मिलने लगा सम्मान स्वच्छता मन/तन की घर/बाहर/आसपास की ईमानदारी की शर्त अपने लिए सबसे पहले यही तो कहते रहे सदा, सुना/पढ़ा सब लोगों…

Read More

“पांव ज़मीन पर निगाह आसमान पर” लेख संग्रह का भव्य लोकार्पण

वरिष्ठ लेखिका सविता चड्ढा के सद्य: प्रकाशित लेख संग्रह   “पांव ज़मीन पर निगाह आसमान पर”  का भव्य लोकार्पण पंजाब केसरी सभागार में पंजाब केसरी की चेयरपर्सन किरण चोपड़ा द्वारा किया गया।इस अवसर पर दिल्ली एवं दिल्ली से  दूर स्थानों से लेखक ,साहित्यकार शामिल हुए। इस अवसर पर अश्वनी कुमार, स्वामी, संपादक और श्रेष्ठ पत्रकार  पंजाब केसरी ने पधारकर कार्यक्रम को गरिमा प्रदान…

Read More

दीया

मिट्टी ढ़ो ढ़ो कांधे-सिर भार कुम्हार का जुटा परिवार ; गढ़ेंगे दिया भरूकी चाक पर खभारू यापन जीवन संसार! ⭐ रौशनी दूर से टिमटिम झांके अनुरागी आगत को मनाने, हांथ बांध कमर कस तैयार जीवन अंधस तिमिर भगाने! ⭐ फोड़ती माटी का ढ़ेला उदह पानी माटी फुला रही, पैरों से रौंद रौंद कर वह गारा…

Read More

रिश्ता

जिंदगी की राह कुछ ऐसी ही होती जब बेटी का विवाह हो नजदीक पिता की आँखे डबडबाई  रहती मानों आँसुओं का बाँध टूट रहा हो बचपन से पाला पोसा  वो अब घर छोड़ कर जाना होता है  r ये नियम तो है ही किंतु त्यौहार और घर का सूनापन भर जाता आँसू बेटी के न…

Read More

उम्मीदों का वृक्ष

उम्मीदों की चादर में कई सपने दफ्न हो गए। जिन वृक्षो से की थी छाया की उम्मीदे,वो छाया पतझड़ आने पर खुद ही कहीं गायब हो गयी।। जीवन के गुजरते पलो में अक्सर ऐसा हुआ। शुखे मुरझाये वृक्षो से भी कई बार ठंडी हवाओं का अनुभव हुआ , शायद गिर रहे थे जो पत्ते उन्होंने…

Read More