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रावण से राम तक

दशहरे पर दो बातों पर ध्यान देते हैं:पहली, दशमलव प्रणाली में मूलभूत संख्याएँ दस ही हैं – शून्य से लेकर नौ तक। इतने ही महापंडित ज्ञानी रावण के मुख भी हैं। बाकी सारी संख्याएँ इन्हीं दस संख्याओं से बनी हैं। संख्याएँ जहाँ तक जा सकती हैं वहां तक रावण के मुख मिलकर जा सकते हैं।…

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साझा काव्य संकलन ‘संगम स्वर’ का हुआ भव्य लोकार्पण

दिनांक 23-9-2019 को राष्ट्र कवि रामधारी सिंह दिनकर जी की जयंती के अवसर पर गोरखपुर उत्तर प्रदेश की प्रतिष्ठित संगम सांस्कृतिक साहित्यिक एव्ं समाजिक संस्था द्वारा 253वीं नियमित मासिक काव्य गोष्ठी होटल शिवम् गेस्ट हाऊस में सफलता पूर्वक सम्मपन हुई। साथ ही साथ “संगम स्वर” ( यह पुस्तक संगम संस्था के स्मृति शेष व सक्रिय…

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उसका बचपन

(सुमन नागर) सुबह उठते ही उसका काम शुरू होता है प्यार और दुलार से उसका दूर तक वास्ता नहीं होता है। होता है वो रोज ट्रैफिक सिग्नल्स पर हाथ में कभी पोछा कभी बेचने का कुछ सामान होता है। क्या कभी सोचा है क्यों उसका बचपन ऐसे सड़को पर बीत रहा है? क्यों नहीं वो…

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**काफल * एक सत्य कथा * Myrica Esculenta

प्रस्तावना========ये बात एक सच्ची घटना पर आधरित एक सच्चा लेख है़ ! जिसको की मैने जब सुना तो इस घटना को लिखे बिना नहीं रह पाया ! वेसे तो यहाँ कई घटनाए कहानियो का रूप ले चुकी है़ ! मानकों द्वारा ये भी नहीं की कभी इस घटना को मुद्रित नहीं किया गया होगा !…

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बाढ़ पीड़ितों के घर में विपदा बरस रही है

बाढ़ पीड़ितों के घर में विपदा बरस रही है.बाढ़ क्षेत्र में सर्वत्र ही तबाही-ही-तबाही है.न पीने को पानी है;न खाने को ही भोजन,भुक्तभोगी कहते हैं, दीखता नहीं प्रशासन.बाढ़ बहाकर ले गया सारी संचित निधियां,दह गया तैयार फसल, लुट गई हैं खुशियां.दूध के लिए मासूम सब जार-बेजार रोते हैं,दवा बिना रोगी को यमदूत खड़ा दिखते हैं.सड़ी…

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हर मुश्किल राह भी आसान हो जाती है

सम्पादकीय (मनमोहन शर्मा ‘शरण’) जम्मू–कश्मीर से धारा 370 हटते ही न जाने क्यों पाकिस्तान में खलबली मच गई ? उन्हें इस बात का आभास है कि वहां खुशहाली होते ही ‘पीओके’ में हुड़दंग मच जाएगा फिर वो भी गंवाना पड़ सकता है । विश्व बिरादरी में खूब हाय–तौबा की, पर भारत की सफल कूटनीति के…

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मां के चरणों में समर्पित दोहे

माता तेरे चरण में ,अर्पित मेरी जान। तेरे ही आशीष से,हो सबका कल्यान ।। कर दो माँ सब पर दया, रह ना कोई जाय। जिसे मिले तेरी दया, धन्य वही हो जाय ।। पावन माँ का धाम है,जो आये तर जाय। सब पर माँ करना कृपा,सब झोली भर जाय।। ना कोई माँ से बड़ा, उनका…

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भगतसिंह

एक क्रांति जब उठी देश में, भगतसिंह के नाम से। थरथर कांपी थी अंग्रेजी, उस किशोर के काम से।। भाव भरा था देशप्रेम का जिसकी चौड़ी छाती में। जन्मा था वो लाल भगत इस भारत की माटी में।। निश्वार्थ लड़ा ना चाह रही कोई जीवन को जीने की। बार दिया तन मन सब कर दफन…

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बाल कविता – स्कूटी की सवारी

नई स्कूटी लेकर आया राजू भालू, उसका दोस्त चिम्पू बंदर है बहुत चालू। मीठी बातो से राजू को बहकाता, रोज उसकी स्कूटी मजे से चलाता।। एक दिन चिम्पू का चौराहे पर कटा चालान, बिन हैलमेट पहने स्कूटी चलाता सीना तान, करी बहुत मिन्नते मिट्ठू तोता हवलदार की, पर फिर भी तोते ने उसकी बात ना…

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है विजयी जो साँसारिक चुनौतियों से हारा नहीं कौन है जिस हृदय में मन्दिर और गुरुद्वारा नहीं

प्रकृति ने सँपूर्ण सृष्टि को समान रूप से अपने तत्व देकर गढ़ा है। अब ये तो मानव जाति पर निर्भर करता है कि वो किस परिस्थिति में किस तत्व की प्रधानता का वरण करे। चाहे माँ दुर्गा की आराधना हो, चाहे विजयादशमी का अवसर हो, प्रत्येक साँसारिक उत्सव एक ही आध्यात्मिक प्रतीक की ओर इशारा…

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