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जो बाल्कनी हमें मिली थी

जो बाल्कनी हमें मिली थी हमनें कमरा बनवा डाला। परिपूर्ण हों आशाएं छोटा एसी लगवा डाला। बहुत खुश थे हम बिटिया को नया रूम मिलेगा उसका भोला भाला चहेरा अब खुशी से झूम खिलेगा। इसी कल्पना में खोए थे इतने में बिटिया आईं कमरा उसने भी देखा पर ना वो मुस्काई। कुछ संजीदा भाव उसके…

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इतिहास रचाओ

देश में एक इतिहास रचाओ बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ बेटी पिता की शान है बेटी ह्रदय की जान हे बेटी थकी वंश हे बढ़ता कुम कुम पगले आंगन में पड़ते भारत की वो बहादुर बेटी थी वो थी झांशी की रानी लक्ष्मी थी वही है लक्ष्मी रानी जिसने अंग्रेज का उतारा पानी देश में…

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सजग राष्ट्रीय नेतृत्व पर सबको गर्व होना चाहिए

खुशामद-परस्त लोगों सेआमआदमी परेशान है, बिना तेल-मालिश किए होता नहीं कोई काम है. आसन चाहे जमीन हो;  या हो बहुत ऊँचाई पर, खुशामद के बाद ही उनसे होती जान-पहचान है. कुर्सी का नशा इंसान के लिए गजब का नशा है, स्वजन-परिजन को भी  चढ़ावा चढ़ाने कहता है. कुर्सी की संतुष्टि के लिए चढ़ावा बहुत जरूरी…

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लोकप्रिय,सशक्त एवं सजग प्रधान मंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी के जन्मदिन के शुभ अवसर पर समर्पित चंद पंक्तियां

जिन्होंने  दृढ़-संकल्प लिया है; नया इतिहास हमें  गढ़ना है,विकसित राष्ट्रों की सूची में,हिंदुस्तान को शीर्ष पर रखना है.प्रभु!उस नरक्ष्रेष्ठ नरेंद्र मोदी को स्वस्थ,सुखी,दीर्घायु रखना,उन्होंने जो प्रण ठान लिया है,उसे पूरा करने की शक्ति देना.130 करोड़ जनता की शुभकामनाएं हैं नरेंद्र मोदी के साथ,नरेंद्र!तुम्हें जन्मदिन मुबारक हो,भारत माँ का है आशीर्वाद.

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अटल सत्य

पता नही क्यो? कोई भा जाता आँखो के रास्ते दिल में समा जाता। पता नही क्यों? उसे दखते ही प्यार उमर जाता आँखे चमक जाती और होठ मुस्कुराता। पता नही क्यों? दिल की धड़कने बढ़ जाती एक एहसास जगा जाती जैसे सपनों में खोया हूँ यह आभास क्यों जगा जाता ? पता नहीं क्यों? अब…

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सर्वोत्तम योग

प्रकृति की निराली छटा में गुँजित हैं वेद पुराण निस्वार्थता रस्म जिसकी है परस्पर प्रेम पहचान कितना खूबसूरत है न ईश्वर का बख़्शा हुआ ये मानव जीवन, जिसकी नस नस में वात्सल्य पोषित होता है, किंतु इस अमृत का विष में रूपाँतरण क्यूँ, कब और कैसे हो गया ये गँभीर चिंतन का विषय है।धरती, आकाश,…

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प्रयास कर

ओढ़ कर सोया है सपने, अब  नींद  कैसे  आएगी। चाहता है,भौर खुशियो की, ये चादर कहाँ अब भायेगी।। उठ खड़ा हो , देर ना कर, जिंदगी तेरी बदल जाएगी। कदम बढ़ा कर चलता चल, दुनिया  तेरे  पीछे  आएगी।। काले काले बादलों की छाती को वर्षा की बूंदे जब चीरेंगी। तब  कहीं जाकर  धरती की, गोद …

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जिसकी राष्ट्रभाषा नहीं,वह देश मूक है

डॉक्टर सुधीर सिंह ‘राष्ट्रीय हिंदी दिवस’ के शुभ अवसर पर समर्पित चंद पंक्तियां:-जिसकी राष्ट्रभाषा नहीं;वह देश मूक है.हिंदी से हिंदुस्तान की पहचानअचूक है.हिंदी हिंदुस्तान  की लोकप्रिय  भाषा है,हिंद की एकता की  उत्कृष्ट परिभाषा है.समृद्ध हिंदी हेतु मिलकर सत्प्रयास करें,आइए!हिंदी में काम करने की शपथ लें.बच्चों को शिक्षा मिले हिंदी के ही जरिए,अंग्रेजी को उसकी दासी…

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हिन्दी फैल रही दुनिया में

हिन्दी हिन्दुस्तान की ही, रही नहीं अब भाषा फैल रही है दुनिया में, बन जन-जन की आशा हिन्दी हिन्दुस्तान की ही रही…….. आजादी में फर्ज निभाया, बनके जैसे फौजी दसों दिशा के लोग बने थे, अजब मनमौजी बनी देश की भाषा यह, दुनिया की अभिलाषा हिन्दी हिन्दुस्तान की ही रही…….. दुनिया में हिन्दी बिना अब,…

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प्रथम राष्ट्र भाषा हो हिन्दी

जग की राज दुलारी हिन्दी है भारत माता की बिन्दी हिन्दी बने विश्व की भाषा स्वाभिमान की हो परिभाषा हिन्दी को सम्मान मिले अब जन जन से बस मान मिले अब आओ मिलकर कदम बढ़ायें घर घर में जाकर समझायें बोल चाल की भाषा हिन्दी चमक उठे हिंदी की बिन्दी हिन्दी की तो बात अलग…

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