कविता और कहानी
बाल कविता – स्कूटी की सवारी
नई स्कूटी लेकर आया राजू भालू, उसका दोस्त चिम्पू बंदर है बहुत चालू। मीठी बातो से राजू को बहकाता, रोज उसकी स्कूटी मजे से चलाता।। एक दिन चिम्पू का चौराहे पर कटा चालान, बिन हैलमेट पहने स्कूटी चलाता सीना तान, करी बहुत मिन्नते मिट्ठू तोता हवलदार की, पर फिर भी तोते ने उसकी बात ना…
है विजयी जो साँसारिक चुनौतियों से हारा नहीं कौन है जिस हृदय में मन्दिर और गुरुद्वारा नहीं
प्रकृति ने सँपूर्ण सृष्टि को समान रूप से अपने तत्व देकर गढ़ा है। अब ये तो मानव जाति पर निर्भर करता है कि वो किस परिस्थिति में किस तत्व की प्रधानता का वरण करे। चाहे माँ दुर्गा की आराधना हो, चाहे विजयादशमी का अवसर हो, प्रत्येक साँसारिक उत्सव एक ही आध्यात्मिक प्रतीक की ओर इशारा…
जो बाल्कनी हमें मिली थी
जो बाल्कनी हमें मिली थी हमनें कमरा बनवा डाला। परिपूर्ण हों आशाएं छोटा एसी लगवा डाला। बहुत खुश थे हम बिटिया को नया रूम मिलेगा उसका भोला भाला चहेरा अब खुशी से झूम खिलेगा। इसी कल्पना में खोए थे इतने में बिटिया आईं कमरा उसने भी देखा पर ना वो मुस्काई। कुछ संजीदा भाव उसके…
इतिहास रचाओ
देश में एक इतिहास रचाओ बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ बेटी पिता की शान है बेटी ह्रदय की जान हे बेटी थकी वंश हे बढ़ता कुम कुम पगले आंगन में पड़ते भारत की वो बहादुर बेटी थी वो थी झांशी की रानी लक्ष्मी थी वही है लक्ष्मी रानी जिसने अंग्रेज का उतारा पानी देश में…
सजग राष्ट्रीय नेतृत्व पर सबको गर्व होना चाहिए
खुशामद-परस्त लोगों सेआमआदमी परेशान है, बिना तेल-मालिश किए होता नहीं कोई काम है. आसन चाहे जमीन हो; या हो बहुत ऊँचाई पर, खुशामद के बाद ही उनसे होती जान-पहचान है. कुर्सी का नशा इंसान के लिए गजब का नशा है, स्वजन-परिजन को भी चढ़ावा चढ़ाने कहता है. कुर्सी की संतुष्टि के लिए चढ़ावा बहुत जरूरी…
लोकप्रिय,सशक्त एवं सजग प्रधान मंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी के जन्मदिन के शुभ अवसर पर समर्पित चंद पंक्तियां
जिन्होंने दृढ़-संकल्प लिया है; नया इतिहास हमें गढ़ना है,विकसित राष्ट्रों की सूची में,हिंदुस्तान को शीर्ष पर रखना है.प्रभु!उस नरक्ष्रेष्ठ नरेंद्र मोदी को स्वस्थ,सुखी,दीर्घायु रखना,उन्होंने जो प्रण ठान लिया है,उसे पूरा करने की शक्ति देना.130 करोड़ जनता की शुभकामनाएं हैं नरेंद्र मोदी के साथ,नरेंद्र!तुम्हें जन्मदिन मुबारक हो,भारत माँ का है आशीर्वाद.
सर्वोत्तम योग
प्रकृति की निराली छटा में गुँजित हैं वेद पुराण निस्वार्थता रस्म जिसकी है परस्पर प्रेम पहचान कितना खूबसूरत है न ईश्वर का बख़्शा हुआ ये मानव जीवन, जिसकी नस नस में वात्सल्य पोषित होता है, किंतु इस अमृत का विष में रूपाँतरण क्यूँ, कब और कैसे हो गया ये गँभीर चिंतन का विषय है।धरती, आकाश,…
जिसकी राष्ट्रभाषा नहीं,वह देश मूक है
डॉक्टर सुधीर सिंह ‘राष्ट्रीय हिंदी दिवस’ के शुभ अवसर पर समर्पित चंद पंक्तियां:-जिसकी राष्ट्रभाषा नहीं;वह देश मूक है.हिंदी से हिंदुस्तान की पहचानअचूक है.हिंदी हिंदुस्तान की लोकप्रिय भाषा है,हिंद की एकता की उत्कृष्ट परिभाषा है.समृद्ध हिंदी हेतु मिलकर सत्प्रयास करें,आइए!हिंदी में काम करने की शपथ लें.बच्चों को शिक्षा मिले हिंदी के ही जरिए,अंग्रेजी को उसकी दासी…
