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बुजुर्गों की उपेक्षा और सुरक्षा का सवाल
डॉ विजय गर्ग समाज की सभ्यता और संवेदनशीलता का सबसे सटीक पैमाना यह है कि वह अपने बुजुर्गों के साथ कैसा व्यवहार करता है। जिन्होंने जीवन भर परिवार, समाज और राष्ट्र के निर्माण में योगदान दिया, वही लोग आज अपने जीवन के अंतिम पड़ाव पर उपेक्षा, अकेलेपन और असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। बदलती…
क्लिक के दलदल में फँसा समाज: गालियों से ग्रोथ, शोर से शोहरत
(जहाँ सच सन्नाटा है, तमाशा उत्सव है — क्लिक की संस्कृति में खोता हुआ समाज और डिजिटल मंच पर किनारे पड़ा विवेक) डॉ. सत्यवान सौरभ डिजिटल दुनिया कभी ज्ञान, संवाद और रचनात्मकता की प्रयोगशाला मानी जाती थी। यह विश्वास था कि इंटरनेट लोकतंत्र को मज़बूत करेगा, हाशिये पर खड़े लोगों को आवाज़ देगा और असली…
विदेश भेजने की होड़ और बदलती मानसिकता
( क्या सचमुच भारत में अवसर कम हैं या हम एक भ्रम में जी रहे हैं?) – डॉ. प्रियंका सौरभ पिछले कुछ वर्षों में भारतीय समाज में एक नई प्रवृत्ति तेजी से बढ़ी है—बेटे-बेटियों को विदेश भेजने की होड़। कभी पढ़ाई के नाम पर, कभी नौकरी के नाम पर, तो कभी बेहतर जीवन के सपने…
Master Trainers Training Programme Concludes
Directorate of Civil DefenceGovernment of NCT of DelhiDate: 24 February 2026 Master Trainers Training Programme Concludes The Directorate of Civil Defence, Government of NCT of Delhi, successfully concluded the Training of Master Trainers of Civil Defence Corps on 24 February 2026 at 1500 hrs at MP Hall, Directorate General of Home Guards, Central Training Institute…
रंग जो दिलों तक उतर जाएँ..
(होली दिलों को जोड़ने और दूरी को मिटाने का सबसे रंगीन मौका) – डॉ. प्रियंका सौरभ भारत की सांस्कृतिक परंपरा में होली केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और मानवीय संबंधों का जीवंत उत्सव है। यह वह अवसर है जब रंगों के बहाने मन के भीतर जमी धूल को झाड़ने, रिश्तों में आई दरारों…
विवाह के बदलते रूप : डॉ. विजय गर्ग
माज में समय के साथ कई रीति-रिवाजों और परंपराओं में बदलाव आते रहते हैं। विवाह भी एक ऐसा संस्कार है जो न केवल दो व्यक्तियों को जोड़ता है, बल्कि दो परिवारों और सामाजिक संबंधों को भी जोड़ता है। लेकिन आधुनिक युग में विवाह का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। पुराने समय की शादी पहले…
होली में सुरक्षा और सावधानी जरूरी
समुद्र में डूबने से उतने लोगों की मौत नहीं हुई, जीतने की नशा में डूब कर मर गए होली का संदेश : एकता और प्यार होली भारत का एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जो रंगों, प्यार और खुशी का प्रतीक है। यह त्योहार हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है, जो आमतौर पर मार्च…
कोचिंग संस्कृति और बच्चों की मौतें: सफलता के नाम पर असफल समाज
– डॉ० प्रियंका सौरभ कोटा में एक और छात्रा की आत्महत्या—यह कोई साधारण खबर नहीं है और न ही किसी एक परिवार की निजी त्रासदी भर। यह उस शिक्षा व्यवस्था, सामाजिक मानसिकता और तथाकथित “सफलता मॉडल” पर गहरा प्रश्नचिह्न है, जिसे हमने पिछले दो दशकों में बिना सवाल किए स्वीकार कर लिया है। आत्महत्या करने…
फिर हंगामे की भेंट चढ़ गया ससंद का सत्र : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव
राजनीतिक सफरनामाएक बार फिर बाबरी मस्जिद का भूत बाहर निकल आया है । संभवतः हुमायुं कबीर ने अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए बाबरी मस्जिद के नाम से एक नई मस्जिद बनाने के लिए नींव रख दी है । विगत छै महिनों से इसको लेकर चर्चा चल रही थी…….उसने भी इस पूरी प्रक्रिया को लेकर…
व्यंग्य : साहेब ! इतना लादीए, जामे कुटुंब समाए…!
पंकज सीबी मिश्रा / राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी यूजीसी पर मचे घमासान के बीच अब सोशल मिडिया पर लोग पूछ रहे कि आरक्षण की कोई सीमा है भी या जन्म जन्मांतर के लिए लागू हों चुका है ? भारत के जिस जातिवाद पर सुप्रीमकोर्ट ने भी चिंता जताई है उसकी जड़ ही आरक्षण…
