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क्या सचमुच सिमट रही है दामन की प्रतिष्ठा?

समय के साथ परिधान और समाज की सोच में बदलाव आया है। पहले “दामन” केवल वस्त्र का टुकड़ा नहीं, बल्कि मर्यादा और संस्कृति का प्रतीक माना जाता था। पारंपरिक वस्त्रों—साड़ी, घाघरा, अनारकली—को महिलाओं की गरिमा से जोड़ा जाता था। “दामन की प्रतिष्ठा” अब भी बनी हुई है, परंतु उसकी परिभाषा बदल चुकी है। परंपरा और…

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अश्लील और कानफोड़ू गानों से करें परहेज

शादी एक पवित्र और भावनात्मक अवसर होती है, जिसमें दो परिवारों का मिलन होता है। इस अवसर पर संगीत का चयन केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह हमारे मूल्यों, रिश्तों और भावनाओं का भी सम्मान करना चाहिए। शादी में बजने वाले गाने रिश्तों की गरिमा, परिवार की भावनाओं और संस्कृति को भी…

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श्री चौरासिया ब्राह्मण समाज समन्वय समिति के व्दारा‌ ‘राष्ट्रीय प्रबुद्ध ब्राह्मण‌ महासम्मेलन‌’ का सफल आयोजन

नयी दिल्ली; श्री चौरासिया ब्राह्मण समाज समन्वय समिति द्वारा आयोजित “राष्ट्रीय प्रबुद्ध ब्राह्मण सम्मेलन” कल यानि 23 मार्च 2025 को एनडीएमसी सभागार, 15 संसद मार्ग, नई दिल्ली में परम पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य ज्योतिष्पीठाधीश्वर अनंत श्री विभूषित स्वामी देवादित्यानंद जी महाराज की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। सर्वाधिक प्रतिष्ठित व्यक्तियों में, द्वापरयुग में श्री द्रोणाचार्य जी व्दारा…

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धरती पर लौटीं सुनीता विलियम्स: एक ऐतिहासिक वापसी

(सुनीता विलियम्स की उपलब्धियाँ न केवल भारतीय वैज्ञानिकों बल्कि देश के युवाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत हैं।) सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर की धरती पर सुरक्षित वापसी एक बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि मानी जा रही है। वे जून 2024 में बोइंग के “स्टारलाइनर” मिशन के तहत अंतरिक्ष गए थे, लेकिन तकनीकी खामियों के चलते…

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बदलते ज़माने की रंग बदलती होली

आज हम जो होली मनाते हैं, वह पहले की होली से काफ़ी अलग है। पहले, यह त्यौहार लोगों के बीच अपार ख़ुशी और एकता लेकर आता था। उस समय प्यार की सच्ची भावना होती थी और दुश्मनी कहीं नहीं दिखती थी। परिवार और दोस्त मिलकर रंगों और हंसी-मजाक के साथ जश्न मनाते थे।  जैसे-जैसे समय…

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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस-एक परिचय

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की अधिकारिक तौर पर यु0एन0{सन्युक्त राष्ट्र}ने 1975 में मान्यता दी थी.वैसे दर्जा मिल चुका था.1913 1910 में कफेगन के सम्मेलन में इसे अंतरराष्ट्रीय का में प्रथम विश्व युद्ध की पूर्व संध्या पर रुसी महिलाओं द्वारा 8 मार्च को यह दिवस मनाया गया.इसी समय यूरोप ओर उतरी अमेरिका में हुए श्रमिक आंदोलन से…

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 ‘बुरा न मानो होली है : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव

बुरा न मानो होली है ……अब तो कोई बुरा मानता भी नहीं है और न ही कोई रंग से भय खात है, वैसे कोई किसी को रंग लगाता भी नहीं है, सारे चेहरे स्याह रंग में यूं ही रंगे हुए हैं । राजनीति के मैदान में रंगों का त्यौहार तो चलता ही रहता है, वो…

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यूक्रेन युद्ध के तीन साल और हाल फिलहाल

तीन साल पहले, रूस ने यूक्रेन के खिलाफ एक भाईचारे वाला ‘विशेष सैन्य अभियान’ शुरू किया, जिसने 1945 के बाद से सबसे खूनी यूरोपीय युद्ध को जन्म दिया। रूस की लाल रेखाओं की याद दिलाने के लिए योजनाबद्ध संघर्ष एक भीषण युद्ध में बदल गया। यूक्रेन जो  एक लचीला और पश्चिमी समर्थन से लैस देश…

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शबरी से द्रौपदी मुर्मू तक का सफर (महिला दिवस विशेष)

भारतीय संस्कृति स्त्री शक्ति के प्रति अपनी श्रद्धा के लिए विश्व स्तर पर प्रसिद्ध है। शक्ति को इस पूजा के एक मूलभूत पहलू के रूप में मनाया जाता है। प्राचीन ग्रंथ मनुस्मृति में कहा गया है, “जहाँ भी महिलाओं का सम्मान किया जाता है, वहाँ देवता मौजूद होते हैं,” जो समाज में महिलाओं के सम्मान…

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