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विकास की रफ़्तार में पिछड़ रहा पश्चिम बंगाल, यूपी का भी हो पुनर्गठन
पंकज कुमार मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी यूपी सीमा का दायरा बड़ा है, अलग पूर्वांचल राज्य जरुरी हो गया है क्यूंकि यहां के लोग किसानी और बेरोजगारी से तंग आ चुके है। युवा पलायन कर रहें। वहीं पश्चिम बंगाल के कई जिले मुख्य धारा से अलग थलग पड़े है । दोनो राज्यों…
” न समझे वो अनाड़ी है” — कुशलेन्द्र श्रीवास्तव
“समझने वाले समझ गए, जो न समझे वो अनाड़ी है ” यह तो गाने की पंक्तियां हैं पर इन्हें वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों से जोड़ कर भी देखा जा सकता है । वित्त मंत्री ने संसद में बजट प्रस्तुत किया और हंगामा खड़ा हो गया । वैसे विगत कुछ वर्षों से यह महसूस किया जाने लगा…
भारत वन्दना
हे जन्मभूमि भारत वन्दन करूंगा तेरा, है कर्मभूमि भारत वन्दन करूंगा तेरा। तू चेतना की देवी तू कर्मणा की देवी तू भावना की देवी तू साधना की देवी हे कर्षभूमि भारत वन्दन करूंगा तेरा, हे धर्मभूमि भारत वन्दन करूंगा तेरा। तू एकता सिखाती तू नेकता दिखाती तू नीति …
भारतीय शिक्षण मंडल, काशीप्रांत और वाणिज्य संकाय, काशी हिंदू विश्वविद्यालय द्वारा एक दिवसीय कार्यशाला ‘शोध आनंदशाला’ : ‘फन्डामेंटल आफ सोशल साइंसेज रिसर्च’ का आयोजन।
कई विषयों के शोधार्थियों को मिला मार्गदर्शन वाराणसी, स्थानीय संवाददाता, 23 जुलाई “जिज्ञासा ही शोध का मूल है। यह जिज्ञासा किसी सैद्धांतिक प्रश्न से उत्पन्न हो सकती है तो कभी कल्पनाशक्ति एवं व्यावहारिक जीवन की समस्याओं से पैदा हो सकती है। शोध पूर्वज्ञान की सीमाओं को रेखांकित करते हुए अनुत्तरित प्रश्नों का उत्तर देने का…
नाटिका : “मिच्छामी दुक्कडम “
पात्र परिचय: 1 नव्या एक स्कूल गर्ल। उम्र 17 वर्ष2_ नीलू कॉलेज गर्ल उम्र 18 वर्ष3_झलक कॉलेज बॉय उम्र 20 वर्ष4_ मां उम्र 50 वर्ष5 पिता उम्र 54 वर्ष 6 नाना जी (बूढ़े आदमी साधु यानी भिक्षु वेश में) उम्र 75 वर्ष7_ नानी जी (बूढ़ी महिला साध्वी वेश में श्वेतांबरी सफेद साड़ी पहने हुए, मुंह…
बढ़ती जनसंख्या विकास में बाधक है इसे रोकना जरुरी : लाल बिहारी लाल
================================================================ आज जनसंख्या रोकने के लिए सबको शिक्षा होनी चाहिये जिससे इसे कम करने में मदद मिलेगी शिक्षा के साथ-साथ जागरुकता की सख्त जरुरत है ताकि देश उनन्ति के मार्ग पर तेजी से आगे बढ़ सके । वर्ष 2021 में असम सरकार इस ओर सख्त पहल की है और उ.प्र. सरकार भी आज जनसंख्या स्थिरिकरण…
लघुकथा – मैसेज (डॉ. कल्पना पांडेय ‘नवग्रह’)
बच्चे का दाखिला अच्छे कॉलेज में हो गया था। हाँ, उसकी मेहनत रंग लाई थी। उम्मीदों अरमानों के साथ हॉस्टल में व्यवस्था करा, माता-पिता।अश्रुपूरित आँखों से संबंधों-रिश्तों की मिठास भरे घर लौट आए। रीमा! कितना खाली-खाली लग रहा है। बच्चों की शरारत,उछल-कूद बड़ी याद आ रही। सच कहते हो, यहाँ उसके रहने से कुछ तो…
आधुनिक समाज में मंचों से साहित्य थूकना सरल
पंकज कुमार मिश्रा, व्यंग्यकार एवं राजनीतिक विश्लेषक जौनपुर यूपी कहते है जिस आधुनिक युग में तुलसी शब्द सुन कर बड़े बड़े कवियों को ‘तुलसी पान मसाला’ याद आता हो, उस युग में एक बड़े धार्मिक आयोजन के बैनर पर रजनीगंधा गुटका का विज्ञापन देखना बुरा क्यों है ? प्रायोजक चाहता है ‘सईंया’ ‘पियवा’ से…
संतोष (लघुकथा)
शाम होते-होते सूरज ढलने लगा। उम्मीदों के दीप बूझने लगे मगर सबको अपना-सा लगने वाला रमेश फिर कभी उन लोगों के बीच कभी नहीं लौटा जिनके लिए आधी रात को भी मुसीबत आए तो तैयार हो जाता था। गॉंव छोड़ शहर की नौकरी में ऐसा उलझा की घर बसाना ही भुल गया। गॉंव भी…
