Special Article
हमेशा ऑनलाइन’ रहने के मायाजाल की दौड़ में थकते युवा
डिजिटल पहचान की अंधी प्रतिस्पर्धा ने मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक जीवन और वास्तविक अनुभवों को संकट में डाल दिया है। सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव युवाओं के मानसिक संतुलन और जीवनशैली पर गहरा असर डाल रहा है। लाइक, व्यूज़ और फॉलोअर्स की प्रतिस्पर्धा ने उन्हें एक अदृश्य दबाव में धकेल दिया है, जहाँ डिजिटल मान्यता ही…
बदलती विश्व-व्यवस्था और जी-20 की चुनौती : बहुध्रुवीयता के बीच भारत की उभरती वैश्विक भूमिका
भू-राजनीतिक तनावों, आर्थिक अस्थिरता और नेतृत्व संकट से जूझते जी-20 में भारत का वैश्विक दक्षिण की आवाज़ के रूप में उदय जी-20 वैश्विक आर्थिक समन्वय का सबसे प्रभावी मंच है, परन्तु आज यह गहरे भू-राजनीतिक विभाजनों, महाशक्तियों की प्रतिस्पर्धा, आर्थिक असमानताओं और नेतृत्व संकट जैसी कई चुनौतियों से घिरा है। इससे समूह की प्रासंगिकता एवं…
विरोध की आड़ में, ये कहाँ आ गए हम……!
पंकज सीबी मिश्रा / राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी अजाक्स के एक पदादिकारी और एमपी सरकार के अधीन एक आईएएस प्रमोटेड अधिकारी का बयान वायरल हुआ था, जिसमें ब्राह्मणत्व के मानसिक विरोध में यह कहा गया कि जबतक ब्राह्मण उसके बेटे को अपनी बेटी दान नहीं करते तब तक आरक्षण बना रहेगा। यह पूरी…
एसआईआर का घमासान : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव
राजनीतिक सफरनामा बिहार राज्य में एसआईआर को मिली अपार सफलता के बाद अब चुनाव आयोग ने देश के अन्य बारह राज्यों में एसआईआर सर्वे कराना शुरू कर दिया है । एसआईआर सर्वे को लेकर विपक्ष की त्यौरियां चढ़ी हुई हैं तो जाहिर है कि घमासान मचा हुआ है । दरअसल एसआईआर सर्वे को लेकर विपक्ष…
Guru Teg Bahadur Singh’s Sacrifice-A Historical Foundation for the Global Human Rights Struggle Against Religious Intolerance
Guru Teg Bahadur Singh’s message of martyrdom was not limited to India;over time, it became the cornerstone of the global human rights movement. The international observance of Guru Teg Bahadur Singh’s 350th martyrdom year in 2025 is of immense historical,cultural, and political significance-Advocate Kishan Sanmukhdas Bhawnani, Gondia, Maharashtra Gondia – The global observance of Guru…
रोजगार संकट :भारत के आईटी क्षेत्र में छंटनी की लहर
कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते प्रभाव से भारत के सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग में गहरे संरचनात्मक परिवर्तन, पर क्या तैयार है देश का श्रमबल? भारत के आईटी क्षेत्र में हाल की छँटनियाँ कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित स्वचालन के दौर की अनिवार्य वास्तविकता हैं। यह केवल रोजगार संकट नहीं, बल्कि कौशल और तकनीक के पुनर्संतुलन की प्रक्रिया है। सरकार,…
आतंक की फैक्ट्री बनते शिक्षण संस्थान, अल फलाह जैसे और ना जाने कितने…!
पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी अल्पसंख्यक शिक्षा और सीबीएससी एजुकेशन के नाम पर भारत के शिक्षा व्यवस्था का नाश किया जा रहा। कई स्कूल कॉलेज यूनिवर्सिटी शिक्षा के नाम पर धंधा कर रही और अब अल फलाह जैसी यूनिवर्सिटीयां डॉक्टर के नाम पर आतंकवादी तैयार करवा रही। माइंड वाश करने की…
दिल्ली धमाका से दहशत में लोग
राजनीतिक सफरनामा दिल्ली धमाका से दहशत में लोग : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव दिल्ली धमाके ने दहशत का माहौल बना दिया । विगत अनेक वर्शो से दिल्ली ऐसे धमाकों से दूर थी । इससे भी ज्यादा हैरान करने वाला आतंकवादियों को वह माड्यूल है जिसमें पढ़े-लिखे डाक्टर शामिल हैं । पूरी गैंग डाक्टरों की ही है…
जिग्मे सिंगये वांगचुक : भूटान के आधुनिक निर्माण और भारत-भूटान मित्रता के शिल्पकार
भूटान के पूर्व राजा जिग्मे सिंगये वांगचुक (K4) ने अपने दूरदर्शी नेतृत्व से देश को आधुनिकता, लोकतंत्र और सांस्कृतिक संरक्षण के संतुलन पर खड़ा किया। उन्होंने सकल राष्ट्रीय सुख को विकास का मूल दर्शन बनाया और भारत के साथ जलविद्युत कूटनीति के माध्यम से आर्थिक आत्मनिर्भरता की नींव रखी। भारत-भूटान संबंधों को उन्होंने पारस्परिक विश्वास…
फ़ाइलों के बीच मरती संवेदनाएँ: नौकरशाही, सत्ता और संवेदनहीनता
जब शासन सेवा से अधिक अहंकार बन जाए — फ़ाइलों के बीच मरती संवेदनाएँ, सत्ता का चेहरा संवेदना का शून्य बनकर, लोकतंत्र को मशीन बना देता है जहाँ नियम ज़्यादा हैं और रिश्ते कम। – डॉ. सत्यवान सौरभ हमारे समय की सबसे बड़ी त्रासदी यह नहीं है कि समाज अन्याय से भर गया है, बल्कि…
