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राम प्रसाद बिस्मिल
(11 जून, 1897 से 19 दिसंबर, 1927) प्रारंभिक जीवन :- राम प्रसाद बिस्मिल का जन्म 11 जून, 1897 को उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर जिले में हुआ था। उनके पिता का नाम श्री मुरलीधर और माता का नाम श्रीमती मूलमती था। जब राम प्रसाद सात वर्ष के हुए तब पिता पंडित मुरलीधर घर पर ही उन्हें…
मदर टेरेसा : ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’
जिंदगी उसी की जिसकी मौत पर जमाना अफसोस करे।यूं तो हर शख्स आता है दुनिया में मरने के लिए।। हां वैसे तो बहुत सारे लोग आते हैं और चले जाते हैं पर याद वहीं रहते हैं जिन्होंने इस देश को अपनी एक अलग छवि दी है, अपना एक अलग रूप दिया है, अपनी एक अलग…
एलोपैथ का टूटता तिलिस्म, आयुर्वेदिक काढ़ा बना लाईफलाइन !
आयुर्वेदिक संस्था के रूप में पतंजलि आज वर्तमान समय में सर्वाधिक प्रचलित प्रतिष्ठान है जो भारत के एलोपैथ को तगड़ा टक्कर दे रहा । भारत समेत वैश्विक व्यापार और बाजार में पतंजलि आयुर्वेद का सबसे अग्रणी निर्यातक है । अभी हाल ही में बढ़ते करोना संकट में जहां एक तरफ एलोपैथ से सुसज्जित हाईटेक अस्पतालों…
जाना कहाँ है जब हर तीर्थ यहाँ है
कविता मल्होत्रा (संरक्षक, स्तंभकार – उत्कर्ष मेल) मौसम ख़ुश्क,हर सू धुँआ-धुँआ है असामयिक विदाइयाँ,सदी का बयाँ है क्रंदन मुखरित,आज ख़ामोश हर ज़ुबाँ है मानव गंतव्य भ्रमित,नकारात्मकता जवाँ है चंद धड़कनों की तलब में,प्यासा हर रोआँ है ✍️ आज हर तरफ, हर दिल की अशाँति के मुखरित पन्नों पर ओम शाँति के हस्ताक्षर दर्ज़ हो रहे…
बिपिन चन्द्र पाल
(Bipin Chandra Pal) (07 नवंबर, 1858 से 20 मई, 1932) प्रारंभिक जीवन :- बिपिन चन्द्र पाल का जन्म 07 नवंबर, 1858 को अविभाजित भारत के हबीबगंज जिले में (अब बांग्लादेश में) पोइल नामक गाँव में एक संपन्न घर में हुआ था। उनके पिता रामचंद्र पाल एक पारसी विद्वान और छोटे ज़मींदार थे। उन्होंने ‘चर्च मिशन…
अभी कोरोना काल ही है।
विगत वर्ष कोकोरोना वर्ष कानाम देकर उससे सम्बन्धित सारे दस्तावेजों कोसहेजकर रखना चाह रहे थेकिआवश्यकता पड़ने परउसे उलट पुलट करउसकी भयावहता की कल्पना कर लेंऔर आगामी किसी प्रकार के वायरल प्रकोपों में उसका तुलनात्मकअध्ययन कर सकें, और वह इतिहास मे अंकित व्यथा गाथा हो जायकि अचानक कोरोना ने पुनःदुगुने चौगुने वेग से साँसें लेनी शुरु…
हाहाकार का जिम्मा कौन लेगा ? ? ?
मनमोहन शर्मा ‘शरण’ (प्रधान संपादक) फरवरी 2021 आते आते भारत में कोरोना की पहली लहर मानो शांत सी हो चली थी और लगने लगा था कि अब जल्द ही ऐसा भी समय आएगा जब देशवासी खुली हवा में बंधन मुक्त होकर श्वांस लेंगे और फिर वही मिलने–जुलने का माहौल बनेगा और समारोह–जलसे आदि में भाग…
राष्ट्रीय लूट प्रबन्धन में हम कितने अव्वल !
कोरोना जैसी महामारी में भी हमने जितना लूटते बना हमने लूटें कभी डॉक्टर बनकर तो कभी पुलिस बनकर , कभी व्यापारी बनकर तो कभी सस्ते गल्ले का दुकानदार बनकर । सरकारे ने भी आम जनता को लूटने में कोई कोर कसर नही छोड़ी । विश्व का सबसे बड़ा नोटतांत्रिक देश भारत बन ही गया ,जहां…
मानवता को प्रणाम : मनमोहन शर्मा ‘शरण’
भारत में कोरोना विस्फोट चरम पर है, 3–80 लाख के लगभग मामले एक दिन में आना अपने में भयावह है किन्तु साथ ही ठीक होने वालों की संख्या भी 2–97 लाख के लगभग है, जो बाकी देशों की तुलना में संतोषजनक है । इस बार कोरोना की सूनामी युवाओं को अ/िाक चपेट में ले रही…
स्वास्थ्य सेवाओं पर उठ रहें सवाल, जिम्मेदार मौन !
कोरोना जैसी भयंकर महामारी ने स्वास्थ्य सेवाओं की कलई खोल दी है । पुराने और बिल्कुल जर्जर स्थिति में पहुंच चुकी सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं निरीह और बेबस नजर आ रही । प्राइवेट चिकित्सालय चुप्पी साध चुके है । सुनने में तो यहां तक आ रहा कि प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों को भर्ती तक लेने से…
