कविता और कहानी
तंबाकू धीमा धीमा फैलता जहर
छोटे-छोटे पाउच में बाजार में अंधाधुंध बिकने वाला गुटखा, खैनी, पान मसाला बड़े चाव के साथ खाया जाता है। भारत में तो जिसको देखो, गुटका खाया और सड़क पर थूका। सड़कों पर तो थूकने वाले अपनी बापौती समझते हैं। समझे भी क्यों ना? आखिर गुटका खरीदने के लिए पैसे भी तो खर्च किए हैं। भारतीय…
राजभाषा हिंदी अपनी सब हिंदी में बोलो जी
राजभाषा हिंदी अपनी सब हिंदी में बोलो जी। राष्ट्रभाषा शीघ्र बनेगी जय हिंदी की बोलो जी। बेटी है संस्कृत की हिंदी सभी भाषाऐं बहने हैं, सबका है सम्मान धरा पर भेद दिलों के खोलो जी। मां की बिंदी जैसी हिंदी सुंदर सरल सुहानी है, वैज्ञानिकता खरी कसौटी चाहे जैसे तौलो जी। हिंदुस्तान नाम हिंदी से…
हिंदी दिवस पर एक गीत
हिदी बोलें पढ़ें ,लिखें सब हिंदी को अपनाएँ – डॉ.गंगा प्रसाद शर्मा ‘गुणशेखर’ संस्कृत है वटवृक्ष राष्टृ की फैली सरल जटाएँ असमी,उड़िया, गुजराती औ मलयालम भाषाएँ तमिल,तेलगू,कन्नड़, बांग्ला सुंदर-सी शाखाएँ सब में मधु घोला है सारी अमृत ही बरसाएँ इनको छोड़ पराई माई कैसे गले लगाएँ. अपनी भाषा पढ़ेँ,लिखेँ औ उसको ही सरसाएँ।। जहाँ किसी…
हिन्दी सिर्फ भाषा नहीं है
हिन्दी सिर्फ भाषा नहीं है यह है भावों की अभव्यक्ति हिन्दी तुम दिव्य भुवन भास्कर करबद्ध वंदन अभिनन्दन हिन्दी तुम तुम्हारे पदचिह्न पर जब-जब चले हम तुम ने जोड़ा हमें अपनी माटी से हिन्दी तुम एक भाषा एक फोटो फ्रेम जैसी फ्रेम में जड़ी हैं हमारी पहचान मान अभिमान अभिनंदन अपनी संस्कृति हिन्दी तुम माथे…
हिंदी दिवस (डॉ चंद्रसेन भारती)
हम भारत के वासी हैं, हिंदुस्तान हमारा है। हिंदी दिवस हिंदी भाषा, यह संकल्प हमारा है। हिंदी दिवस मनाने को, हम आगे बढ़के आए हैं, मातृभूमि की रक्षा को, संकल्पित भाव सजाए है। आर्य वृत्त भारतखंडे, आदिकाल ने नाम दिया। इंडिया की पड़ी जरूरत क्यों, क्यों इसमें बदलाव किया। भारत मां के बनें प्रहरी, लोकतांत्रिक…
महिमा निज भाषा जिन जानी (हिंदी दिवस विशेष)
अंजू मल्होत्रा, (नॉएडा) महिमा निज भाषा जिन जानी तिन को मानो सच्चा ज्ञानी। संतप्त ह्रदय शीतल हो जाए सूर तुलसी सा जो लिख पाएँ। प्रिय है हिन्दी का हर एक छंद जन्म -जन्म का ये अनुबंध। उगता सूरज दे ये ही गवाही हिन्दी पथ के हम हैं राही।
गीत : सावन में,पीहर याद आए,गीत
सावन में,पीहर याद आए, बाबुल का, अंगना वो बुलाए। बीता बचपन, जिन चौवारों में, यादों का बादल, नैन भिगाए। भाई बहन संग, खेल खेले, लड़ने मिलने में, दिन बिताए। वो बारिश में, भीगना छत पे, कागज़ की नौका, मिलके बहाए। बाते अब वो, जाने कहा है, मिलने के दिन, रैना न आए। छूटा पीहर, बंधी…
फिर से अभिमन्यु (दिनेश कपूर )
दुआ मेरी गूंगी है, रब मेरा बहरा है. उफनती दीवारों पर सब्र का पहरा है. हथेलियों पे छाले पड़ जाते हैं, जब परछाइयों को पकड़ता हूँ, जकड़ता हूँ. जकड़ी परछाई डरी सहमी रहती है. ढील हुई नहीं कि ये गई, वो गई. अपने जिस्म से जुडी भी डरती है कम्बखत जिंदगी. तारों से परे दुबक…
गंगावतरण की कथा, चलो सुनायें आज
गंगावतरण की कथा, चलो सुनायें आज महा प्रतापी सगर का, था विशाल साम्राज धर्म कर्म में श्रेष्ठ जो, रहे बड़े विद्वान षष्ठी सहस्त्र पुत्र थे, सब थे वीर महान सपना चक्रवर्ती का, करने को साकार अश्वमेध के यज्ञ का, नृप ने किया विचार धूमधाम से राज्य में, सकल कर अनुष्ठान छोड़ा नृप ने अश्व को,…
