कविता और कहानी
महिमा निज भाषा जिन जानी (हिंदी दिवस विशेष)
अंजू मल्होत्रा, (नॉएडा) महिमा निज भाषा जिन जानी तिन को मानो सच्चा ज्ञानी। संतप्त ह्रदय शीतल हो जाए सूर तुलसी सा जो लिख पाएँ। प्रिय है हिन्दी का हर एक छंद जन्म -जन्म का ये अनुबंध। उगता सूरज दे ये ही गवाही हिन्दी पथ के हम हैं राही।
गीत : सावन में,पीहर याद आए,गीत
सावन में,पीहर याद आए, बाबुल का, अंगना वो बुलाए। बीता बचपन, जिन चौवारों में, यादों का बादल, नैन भिगाए। भाई बहन संग, खेल खेले, लड़ने मिलने में, दिन बिताए। वो बारिश में, भीगना छत पे, कागज़ की नौका, मिलके बहाए। बाते अब वो, जाने कहा है, मिलने के दिन, रैना न आए। छूटा पीहर, बंधी…
फिर से अभिमन्यु (दिनेश कपूर )
दुआ मेरी गूंगी है, रब मेरा बहरा है. उफनती दीवारों पर सब्र का पहरा है. हथेलियों पे छाले पड़ जाते हैं, जब परछाइयों को पकड़ता हूँ, जकड़ता हूँ. जकड़ी परछाई डरी सहमी रहती है. ढील हुई नहीं कि ये गई, वो गई. अपने जिस्म से जुडी भी डरती है कम्बखत जिंदगी. तारों से परे दुबक…
गंगावतरण की कथा, चलो सुनायें आज
गंगावतरण की कथा, चलो सुनायें आज महा प्रतापी सगर का, था विशाल साम्राज धर्म कर्म में श्रेष्ठ जो, रहे बड़े विद्वान षष्ठी सहस्त्र पुत्र थे, सब थे वीर महान सपना चक्रवर्ती का, करने को साकार अश्वमेध के यज्ञ का, नृप ने किया विचार धूमधाम से राज्य में, सकल कर अनुष्ठान छोड़ा नृप ने अश्व को,…
कुछ अनछुए अहसास : राजेश कुमार
अलख तेरा सितारों में, प्रणय की बंदिनी हो तुम मेरी हर मुस्कुराहट हो, समग्र सब जिंदगी हो तुम, तुम्हें ही सोचता हूं मैं, तुम्हें ही जीवता हूं मैं, मेरी हर प्यास को आस, मेरी तिश्नगी हो तुम तुम्हारे हाथ का मेरे हाथों से स्पर्श स्पन्दन करेगा कायनात को तब विखंडित होकर उष्मा हमारे प्यार की…
स्वच्छ भारत अभियान:
इस कैंपेन के तहत सरकार द्वारा विभिन्न प्रयास किये जा रहे हैं और प्रधानमंत्री मोदी ने देश के नागरिको को अपना पूरा योगदान देने को कहा है ताकि भारत जल्द से जल्द एक स्वच्छ देश बन सके। इस कैंपेन के शुरुआत में खुद प्रधानमंत्री ने रोड साफ़ कर इस अभियान का आगाज़ किया था। स्वच्छ…
लघुकथा : हौसलों की उड़ान
बोलते मम्मी से गले लिपट गई। मम्मी की आंखों में खुशी के आंसू निकल पड़े। उन्हें लगा कि आज उनकी मेहनत सफल हो गई। मम्मी (नविता जी) का मन अतीत की स्मृतियों में खो जाता है । अनन्या जब मात्र 10 महीने की थी तभी उसे दिमागी बुखार चढ़ जाता है। उसमे उसका अगर शरीर…
तलाक है या है ये बिदाई
हरफ – हरफ हिसाब लगाकर सब ले गई थी तुम अपना| ये मेरा हुआ, ये तुम्हारा बनता है इतना। फिर भी छोड़ गई देखो सामान कितना| इतना कि हर पल, हर कदम अपने ही घर में ठोकर खाकर गिरता हूँ में| यूंकि तुम याद न आओ इसलिए आँखें मूँदें फिरता हूँ मैं। सिंगार के निशां…
शब्द आज मौन है
हाहाकार करती धरा, चीत्कार करने लगा है गगन कैसे करूँ नमन उनको, जो कर गए न्योछवर तन अद्भुद सा संयोग है, क्या विचित्र सा योग है खुद को पीड़ित कहते है, पर औरो को पीड़ा देते है पीड़ित हो शोषित हो तो मेहनत को हथियार बना लो किसने तुमको रोका है, अपना जीवन आप बना…
योग करें, योग करें – चेतन पाल
योग करें हम योग करेंदूर सभी हम रोग करें,वरदान मिला जो हमकोहम उसका उपयोग करें। तन-मन स्वस्थ बनाता हैआलस दूर भगाता है,सदा सुखी वह रहता हैजो इसको अपनाता है। कहे संजीवनी बूटीजीवन को दे नए प्राण,ऐसा आशीर्वाद मिलाहोता सभी का कल्याण।उद्देश्य यही इसका हैसृजन स्वस्थ समाज का हो,भविष्य बनेगा बेहतरध्यान यदि बस आज का हो।…
