कविता और कहानी
आत्मालाप –
आत्मा चोला बदलती है— “अरेरे. आत्मा तो चोला बदलती है- सब पुण्यात्माओ के लिये लोग-बाग कहते थे/फिर उन्हें जब ‘आत्मा’ कहा था तो—-‘ चोला डालकर —–‘ कहीं सो गये होगे ? अभी तक- चोला बदल नही पाये होगे – अरे रे गले से नया चोला उतरा ही नहीं होगा…!! जानकर गले में अटका कर दिनभर…
आज की आवाज
शोषित पीड़ित की ढाल था जो, अब समुदायों की ढाल बना। अल्पसंख्यक का हार बना, यह देश के हित जंजाल बना।। कानून को ढाल बनाकर के, तुम अपने निज़ हित साध रहे। स्वारथ में इतने डूब गए, कर देश को तुम बर्बाद रहे।। याद करो कुछ पिछली भी, हम क्या सह कर के आए हैं।…
परवरिश : डॉक्टर अरुणा पाठक
हर किसी को आते जाते…….. वह घर अपनी और आकर्षित करता था। करें क्यों ना आसपास के पूरे क्षेत्र में इतना सुंदर इतना महंगा इतना आलीशान घर, दूसरा नहीं था। वहां से गुजरने वाले उस घर को जरूर देखते बाहर एक बड़ी सी गाड़ी खड़ी रहती. और उसमें टोपी पहना हुआ ड्राइवर बैठा रहता। अक्सर…
उम्र के पड़ाव पर रिश्तों व समाज की जरूरत
जैसा कि हम सभी जानते हैं मानव जीवन में समाज, धर्म, जाती, रिश्ते, परिवार आदि की समय समय पर एक दूसरे की जरूरत रहती हैं। परन्तु आज के युग में मानव जीवन की जटिलता कहो या अपने स्वार्थ के लिए समाज, धर्म, रिश्तों को निभाने में टाल मटोल करता है, जिस से समाजों के बिखराव…
छंद- गीतिका : यह समझ
मापनी- 2122 2122 2122 212 पदांत- यह समझ समांत- अहले साँस चलती है समय से तेज पहले यह समझ। चल सके तो वक़्त के ही संग बहले यह समझ। पंचतत्वों से बना अनमोल है यह तन मिला, ये बचें इनके लिए हर कष्ट सहले यह समझ। यह अगर हैं संतुलित तो मानले तू है सुखी,…
स्वप्नों की मनमानी
लगे झरने नव छंद नेहिल, पिघलता नील का आँगन है। भींग रहा अवनि का आँचल, सरस अंतर का प्रांगण है। नैनो में मनुहार लिए, व्यापा मौन दिशाओं में। आस सिंचित रहती हर पल, तरंगित सी आशाओं में। मृदुल से दो बोल कहीं से, कानों में रस घोल गई।…
आना होगा भारत में : डॉक्टर चंद्रसेन शर्मा
आना होगा भारत में, उन वीरों की माताओं को। फिर से शिवा करें पैदा, जो लिखें उन्हीं गाथाओं को।। देश के दो नेताओं ने, आजादी से अपधात किया। भगतसिंह तेरे भारत को, दो हिस्सों में बांट दिया।। चले गए गोरे भारत से, अपने तखतो ताज हुए। दी भुला शहादत वीरों की, ये कुर्सी के मोहताज…
लघुकथा – कच्ची मिट्टी : डोली शाह
आज अन्नू ज्यों ही विवाह कर ससुराल प्रवेश की पूरे घर में भगदड़ मच गई। सभी के मुंह से एक ही स्वर सुनाई दे रहा था, आग लग गई, आग लग गई । कुछ लोग सामानों को बाहर फेंकने लगे ,तो कुछ पानी डालने लगे, किसी ने 101 में फोन किया ,तो कुछ…
अभिव्यक्ति और भावनाओं को तलाशने का शक्तिशाली माध्यम है ‘कला’
( विश्व कला दिवस पर विशेष) कला हमेशा से ही अभिव्यक्ति और भावनाओं को तलाशने का एक शक्तिशाली माध्यम रहा है।दुनियाभर में आज यानी 15 अप्रैल को वर्ल्ड आर्ट डे (विश्व कला दिवस) मनाया जा रहा है। कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए इस दिन को हर साल 15 अप्रैल को मनाया जाता…
दर्द घुटनों में पाया गया
अरुण शर्मा साहिबाबादी। ग़ज़ल…….. दर्द घुटनों में पाया गया,फिर भी रिक्शा चलाया गया। मैं फ़क़त रिक्शे वाला रहा,नाम से कब बुलाया गया। मेरा रिक्शा पलटते बचा,जब ये पुल पर चढ़ाया गया। काम रिक्शे का मेहनत का था,फिर भी छोटा बताया गया। आज रिक्शा फंसा जाम में,आज कुछ ना कमाया गया। एक गमछा था मुझ पर…
