कविता और कहानी
पौरुष पीड़ा, .…
*हाॅं मैं भी इंसान हूॅं* हॉं मैं पुरुष हूॅं मान हूॅं मुझे भीसम्मान हे। पौरूष का मुझमें भी निज अभिमान हे ! कठोरबल पराक्रमशक्ति साहस परिपूर्ण । अहंकार है मुझ में गर्व अपनी में आन हूॅं । कठिन हूॅं जटिल हूॅं मान भर ये शान है। करता मैं निजता में भी पूरा अभिमान हूॅं…
सावन का भोर
(ग़ज़ल) सावन का ऐसा!भोर होते देखा। घनों काआपसीशोर होते देखा। ब्रह्माण्ड की थी ऐसी जगमगाहट। धरा को सुंदरऔर गोर होते देखा। सावन का ऐसा।।।।। पवन के झोंके हिलाए वटों को। बारिश का पानी जोर होते देखा। सावन का ऐसा।।।।। फूली चमेली है घर पर जो मेरे। उसकोभी मौजे विभोर होते देखा। सावन…
काश हर चीज़ गुलाबी हो जाती
काश हर चीज़ गुलाबी हो जाती फिर अन्य रंगों का क्या होता इंद्रधनुष में सात रंगी न होता आसमां नीला न होता और फूल,फल सब बहुरंगी न होते पत्तों का रंग हरा न होता न ही धरती अंतरिक्ष से काली दिखती न ही अंधेरे का कोई सम्राज्य होता। काश हर चीज़ गुलाबी हो जाती गोरी…
कुंडलियां – अजय कुमार पाण्डेय
बूंद नीर की थी गिरी, भर आए दो नैन मन है कैसा बावला, क्यों होता बेचैन क्यों होता बेचैन, हृदय में पीड़ा होती अधरों पर मुस्कान, नैनों में अश्रु मोती हिय पर्वत को लांघ, लहर थी उठी पीर की दो पलकों के बीच, टिकी थी बूंद नीर की। बिन मौसम बारिश हुई, बादल गरजे खूब…
मैं भी एक इंसान हूँ, बस पुरुष हूँ
माँ,कभी एक पल को ठहरकर सोचना,तेरा बेटा भी एक इंसान है…हाँ, वो बेटा जिसे तूने बचपन में गिरने से पहले पकड़ लिया था,पर अब जब वो टूट रहा है… तो कोई नहीं देखता। आजकल ज़माना बदल गया है,अब हर पुरुष या तो अपराधी है या अपराधी घोषित कर दिया गया है।समाज में एक ऐसा तबका…
दो जून की रोटी
दो जून की रोटी जहां में, मिलती सखी सबको नहीं। दिन रात बहता है पसीना, तब हाथ आ पाती कहीं। मँहगाई का आलम ये है, बढ़ती ही देखो जाती। मजदूरी जितनी भी मिलती, पूरी वह कब हो पाती। जिनपर काम नहीं है कोई, कैसे उनका दिन कटता। दिन में भी तारे दिखते है, मुश्किल से…
पीड़ा : वंदना भार्गव
सबने तुझको ठुकराई है । जब तू पास मेरे आई है ।। आजा तुझको गले लगा कर। पीड़ा आज पुरस्कृत कर दू।। साथी पाने की चाहत में । घूम रही क्यों सबके पीछे।। तुझसे भाग रहा जग सारा । आ तुझमें आकर्षण भर दूं।। अरी तिरस्कत ओ दुखियारी । आजा मेरी राज दुलारी ।। तेरी…
सिंदूर जब बारूद बनकर बरसता है,
डॉक्टर सुधीर सिंह सिंदूर जब बारूद बनकर बरसता है, पाकिस्तान तब थड़थड़ाने लगता है। भारत का सामना पाक कैसे करेगा? जो भीख मांगकर भूख मिटाता है। जिसकी आदत भिक्षाटन करने की, हिंदुस्तान को वह आंख दिखाता है। भीख की झोली खाली देख भिक्षुक, भूख से तब वह मिमियाने लगता है। दुनिया की नजर में बेनकाब…
