कविता और कहानी
कुंडलियां – अजय कुमार पाण्डेय
बूंद नीर की थी गिरी, भर आए दो नैन मन है कैसा बावला, क्यों होता बेचैन क्यों होता बेचैन, हृदय में पीड़ा होती अधरों पर मुस्कान, नैनों में अश्रु मोती हिय पर्वत को लांघ, लहर थी उठी पीर की दो पलकों के बीच, टिकी थी बूंद नीर की। बिन मौसम बारिश हुई, बादल गरजे खूब…
मैं भी एक इंसान हूँ, बस पुरुष हूँ
माँ,कभी एक पल को ठहरकर सोचना,तेरा बेटा भी एक इंसान है…हाँ, वो बेटा जिसे तूने बचपन में गिरने से पहले पकड़ लिया था,पर अब जब वो टूट रहा है… तो कोई नहीं देखता। आजकल ज़माना बदल गया है,अब हर पुरुष या तो अपराधी है या अपराधी घोषित कर दिया गया है।समाज में एक ऐसा तबका…
दो जून की रोटी
दो जून की रोटी जहां में, मिलती सखी सबको नहीं। दिन रात बहता है पसीना, तब हाथ आ पाती कहीं। मँहगाई का आलम ये है, बढ़ती ही देखो जाती। मजदूरी जितनी भी मिलती, पूरी वह कब हो पाती। जिनपर काम नहीं है कोई, कैसे उनका दिन कटता। दिन में भी तारे दिखते है, मुश्किल से…
पीड़ा : वंदना भार्गव
सबने तुझको ठुकराई है । जब तू पास मेरे आई है ।। आजा तुझको गले लगा कर। पीड़ा आज पुरस्कृत कर दू।। साथी पाने की चाहत में । घूम रही क्यों सबके पीछे।। तुझसे भाग रहा जग सारा । आ तुझमें आकर्षण भर दूं।। अरी तिरस्कत ओ दुखियारी । आजा मेरी राज दुलारी ।। तेरी…
सिंदूर जब बारूद बनकर बरसता है,
डॉक्टर सुधीर सिंह सिंदूर जब बारूद बनकर बरसता है, पाकिस्तान तब थड़थड़ाने लगता है। भारत का सामना पाक कैसे करेगा? जो भीख मांगकर भूख मिटाता है। जिसकी आदत भिक्षाटन करने की, हिंदुस्तान को वह आंख दिखाता है। भीख की झोली खाली देख भिक्षुक, भूख से तब वह मिमियाने लगता है। दुनिया की नजर में बेनकाब…
ऑपरेशन सिन्दूर (ताटंक छ्न्द)
सेना का है शौर्य निराला, जांँबाजों की टोली है। आती जब भी बात देश की,चले खून की होली है। दुश्मन थर-थर कांँपे इनसे, बदला लेते हैं पूरा। जिसने भी छेड़ा है इनको, बना दिया उनका चूरा। बहनों का सिन्दुर है छीना,दुश्मन वह कितना पापी। सेना ने पीटा घर घुसकर, दुनिया ही उसकी नापी।। ऑपरेशन सिन्दुर…
साफ-साफ दो टूक
साफ-साफ दो टूक शब्द में कहना सबके मन भाया आज हमारे मोदी जी ने सब बापों को समझाया टेरर टॉक अब नहीं चलेगा नहीं चलेगा टॉक और ट्रेड केवल बात pok पर होगी किया फैसला सबसे ग्रेट नहीं बहेगा साथ साथ अब खून और पानी सब सुन ले मौत, जिंदगी उन पर छोड़ी जो चुनना…
तुम गए तो आंखों में शोर था,
जैसे बारिश में छुपा कोई निचला ज़ोर था, मिट्टी की ख़ुशबू से भीगी पिच पर, तुम्हारे क़दमों का अभी तक कोई असर था। तुम्हारी हर इनिंग एक कहानी थी, पसीने से भीगी वो सफ़ेद जर्सी बेमिसाल निशानी थी, भीड़ की धड़कन, टीम की जान, तुम्हारे बिना ये मैदान कुछ वीरान था। तुम गए तो तालियों…
रक्तदान शिविर
रक्तदान शिविर लगाने की तैयारी चल रही थी। छुट भैया नेता जोर शोर से प्रचार प्रसार कर रहे थे। सभी से अपील की जा रही थी कि ज्यादा से ज्यादा लोग रक्तदान करें जिससे अधिक से अधिक लोगों का जीवन बच सके। स्कूल के बच्चे पोस्टर बनाकर रैली निकालने की तैयारी कर रहे थे। नेताजी…
