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अपने होने का आनंद- आत्म निरीक्षण 

सुख-दुःख का संबंध मन और शरीर से होता है, जबकि आनंद का संबंध अंतरात्मा से होता है। आनंद अगर मिल जाए तो व्यक्ति उसे छोड़ना नहीं चाहेगा। प्रश्न यह है कि आनंद की प्राप्ति कैसे हो? इसके लिए हमें स्वयं से प्रेम करना और दूसरों में प्रेम बांटना होगा। ईश्वर द्वारा निर्मित जीवों के प्रति…

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सही कदम

        घर के बाहर बारिश की झड़ी लगी हुई थी और अन्दर सीमा और रमेश चाय के साथ पकौड़े खाने का आनंद ले रहे थे । बारिश में ज्यादातर लोग चाय पकौड़े का आनंद लेते हैं। बातें करते करते सीमा को अपना बचपन याद आने लगा । कैसे वह बारिश में बाहर भाग जाती थी…

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आत्मालाप : उल्टे पांव भूत के

           देवेन्द्र कुमार पाठक गांव में अब मास्क कोई भी नहीं लगाता.हाँ, वे लोग घर, जेब, बैग-थैले में एक-दो मास्क जरूर रखे रहते हैं, जो कुछ पढ़े-लिखे हैं या फिर वे सयाने जिन्हें शासन-सियासत, आधि-व्याधि, सूखा-बाढ़, अकाल-गिरानी  और दुनियादारी की गहरी समझ है. जिनको ऐसे दुर्दिन भुगतने- झेलने के बड़े तल्ख और कड़वे अनुभव हैं….

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नफरत का आतंक

कातिल जहाँ बेखौफ है कौन सा ये देश हैकानून का है राज नहीं पर कहलाता प्रदेश हैजहाँ कत्ल को लानत नहीं इज्जत वो समझने लगेभारत माता के आंगन में भी क्या विषधर साँप पलने लगे? कितने दिन कितनी रातें कितने घण्टों में सजा मिलेगीफाँसी से ज्यादा कुछ और क्या कानून की रजा मिलेगीइस क्रूरता को…

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योग की महत्वता— योग दिवस—– प्रवीण बहल

सारे विश्व में हर व्यक्ति के जीवन में– योग का महत्व बढ़ गया है– अगर हम 50 वर्ष पीछे चले जाएं तो हमें याद होगा कि हर स्कूल में पढ़ाई शुरू होने से पहले पी टी हुआ करती थी– महत्व था शरीर को चुस्त बनाना– आज यह— अध्ययन के विषय में आ गया– जब से…

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योग

सुबह सुबह हो योग और दिनभर हो कर्मयोग तो क्या बात है ।पुरुषार्थ और परिश्रम हो जीवन का आधार तो क्या बात है ।एक क्षण भी ना हो नकारात्मकता हर पल हो सकारात्मकता तो क्या बात है ।योग से हो अर्थ,धर्म, काम और मोक्ष की प्राप्ति तो क्या बात है ।योग से होता सभी मनोविकारों…

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( पितृ दिवस पर )

दर्द का मंज़र है तुम कहां हो पापा,ज़ख्मी मेरा दर है तुम कहां हो पापा । जुल्म का चश्मा रखे हैं अब अपने हीपीठ में नश्तर है तुम कहां हो पापा। छा चुकी हैं बर्बरी घटाएं शब में ,खौफ में छप्पर है तुम कहां हो पापा। झुकने से मिलती विजय गलत है बापूटूटने को घर…

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पितृदिवस पर

प्रेम के अक्षय पात्र सापवित्र रिश्ताजो कभी नहीं रीतताबाहर से सख्तअंदर से नर्मदिल में दफन कई मर्मचटकती धूप से इरादे गर्मउर में आस लिएअमावस को भी कर दे रोशन ।अपना दे निवालाबच्चों के हाथों की लकीरोंको बदल दे…जिंदगी की जद्दोजहद में भीमुस्कुराहटों की रवानियांबिखेरसमुद्र सी थाह में अथाह लिएचुभती धूप में सहलाते से…ना रूके, ना…

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संजीवनी।

धूप है बहुत चलने का वादा तो करो। धूप है बहुत चलने का वादा तो करो। भीड़ है निकल आने का इरादा तो करो।। सो जाऊगा गहरी नींद पल दो पल। सपनो में आने का,दावा तो करो।। जमाना ऐसा ही है,ऐसा ही रहेगा। थोड़ा मुस्कुराने में इजाफा तो करो।। मजबूर नहीं करते,साथ चलने को। पायल…

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गर्मी के दोहे

सूरज आतिश बन गया,तपे नगर,हर गाँव। जीव सभी अकुला उठे,ढूँढ रह सब छाँव ।। सूरज का आक्रोश है,बिलख रहे तालाब । कुंओं,नदी ने भी ‘शरद’,खो दी अपनी आब ।। कर्फू सड़कों पर लगा,आतंकित हर एक । सूरज के तो आजकल,नहीं इरादे नेक ।। कूलर,पंखे हँस रहे,ए.सी.का है मान । ठंडे ने इस पल “शरद’,पाई नूतन…

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