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प्रोफेसर डॉ श्रीमति अलका अरोड़ा जी ने अपने सुदृढ संचालन द्वारा सजाई हृदयांगन की भजन-कीर्तन शाम

डॉक्टर विधु भूषण त्रिवेदी जी ने अपने हृदय से अशीष अमृत वर्षा द्वारा ‘हृदयागंन भजन संध्या’ सजाकर हृदयांगन परिवार के मन का कौना कौना पावन किया प्रोफेसर डॉ श्रीमति अलका अरोड़ा जी ने अपने सुदृढ संचालन द्वारा सजाई हृदयांगन की भजन-कीर्तन शाम देशभर के विभिन्न आईआईटी संस्थानों में दाखिले लेने के सन्दर्भ में आयोजित की…

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कंजके (कन्या भोज)पर कविता

चलों चलों आज फिर से गुलजार करतें हैं बचपनवो छोले पूड़ी हलवेकी महक ताजाकर कंजक(कन्या) बनगुल्लक भरते हैं फिरपुरानी यादों से …हर पर्व अपनी महक और स्वाद लिए आता है,रह रह कर बचपन की याद दिलाता है,क्या वो दिन थे औरक्या थे जलवे,आहा! वो छोले,पूड़ी और हलवे!चलों आज फिर सेगुलजार करतें हैं बचपनमाँ अंबा की…

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तोता मैना

कहता तोता सुन री मैना मान ले अब तो मेरा कहना मैं लाता हूं दाना पानी तुम घर पर ही रहना। नन्हे-मुन्ने लाल हमारे काला कौवा घात लगाए पंख फैलाकर उन्हें छुपाना चाहे भूख प्यास सब तजना। मानव अब हैवान बना है चारों और धुआं घना है बालक वृद्ध और नारी को पड़ता है सब…

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खादी

बिजली शिक्षा , नाली सडक और स्वास्थ्य  छोड़ो मित्रो ये सब चिन्ता , कुछ  खादी की बात करे रेशमी पैबन्द से हार जाए, तो भी कोई बात नहीं खादी को हिंदुस्तान कह देना भी ,कम बड़ी बात नहीं खादी बनने की प्रक्रिया ने बतलाया आज मुझे तन ढकने से लेकर खादी राष्ट्रध्वज तक  मान तुझे…

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‘बापू’तेरी जैसी संतान पाकर,

डॉक्टर सुधीर सिंह ‘बापू’तेरी जैसी संतान पाकर, भारत माता धन्य   हो गई थी. आज भी वैसी संतान के लिए, व्याकुल हो रही है  माँ भारती! विषमता से भरे इस समाज में, देशभक्तों की बहुत ही कमी है. परेशान  भारत माता कहती है, कोईअब महात्मा गांधी नहीं है. बापू! ईमानदारी की पूछ नहीं, दिव्य-दृष्टि से तुम…

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ऐ जिन्दगी

जिंदगी हर दिन एक जंग सी लगती है, कभी पहलू में मेरे तो , कभी तेरे लगती है, कभी पास आके बैठ, तो बताए  हमे कितनी बेरहम लगती है, हर दिन ये मुझसे मेरे ही जवाबो पे एक नया सवाल पूछती है, की तू तो कभी न झुकने वाली थी,!!! क्या ….हार गई आज की…

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❤️ ये बाईं ओर रहता है ❤️

*ये जो सीने में मेरे . बाई और रहता हैं बखूबी सारे रिश्ते निभाने  को कहता है, हम काम में उलझ जाते तो, तो ये प्रकृति की धड़कन सुनाता है तर्क की बेरंग दुनिया में ये इश्क़ का रंग भरता है अक़सर यादों की सैर कराता है ये जो सीने में मेरे ❤️बाईं ओर रहता…

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हिन्दी जन जन का आधार है

-राजकुमार अरोड़ा गाइड हिन्दी के लिये बड़े जागरूकता, हो सरल सुबोध,हिन्दी का प्रचार। यही भारत का गर्व,गरिमा,अभिमान इसी का ही तो  करना है खूब प्रसार।। अंग्रेजी अंग्रेजी रटने वालो,तुमने स्वयं,  ही तो मातृभाषा का मान घटाया है। क्या कभी अंग्रेजों ने,अपने देश में किसी भी तरह,अंग्रेजी दिवस मनाया है।। हिन्दी,मनभावन हिन्दी, दुलारी हिन्दी, हिन्दी  पूरे…

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एकमात्र हिंदी

हिंदी ही एकमात्र ऐसी भाषा है जो हमारे पूरे भारत में बोली और समझी जाती है ।चाहे हमारे बच्चे कितनी भी  अंग्रेजी हया किसी और भाषा को सीख ले परंतु वार्तालाप तो हिंदी में ही करते हैं। क्योंकि हमारी जड़े तो हिंदी में ही हैं, जो बात हमारी मातृभाषा मैं है वह बात किसी और…

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हिन्दी दिवस सिर्फ एक ही दिन नहीं…

हिन्दी दिवस सिर्फ एक ही दिन नहीं… ये तो मेरी रूह की भाषा…. नित प्रतिदन ही हिन्दी दिवस हैं…✍️ हिन्दी मेरे जज्बातों का गहना, संवाद से संवेदनाओं का झरना मन के भावों का उपवन अन्तर्मन का सफर साहित्य सृजन का नमन  मेरे भावों की सहेली मनकानन की चितेरी ज्ञान की रसधार में डूबी सरीता जीवन…

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