कविता और कहानी
राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन
(01 अगस्त, 1882 से 01 जुलाई, 1962) प्रारंभिक जीवन :- पुरुषोत्तम दास टंडन का जन्म 01 अगस्त, 1882 को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज शहर में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा वहीं के सिटी एंग्लो वर्नाक्यूलर स्कूल में हुई। सन् 1894 में उन्होंने इसी स्कूल से मिडिल की परीक्षा उत्तीर्ण की। हाई स्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण…
दोहा : सास ससुर ससुराल है,
सास ससुर ससुराल है,साला सलहज दूर। आवत जावत मुह पिटे,नैन देखि मजबूर।। ननद मिताई बांध के, चलते रिस्ते नात। टूटी डोरी सांस की, झूठी सारी बात।। पाहुन घड़ी बिताय के, निकले अपने धाम। ठहरे जो पहरे पहर,बिगड़े सारे काम।। भोगे अपने भोग सब,अपने करमे हार। जीती -जाती जिंदगी,कर ली कैसे?क्षार।। साढू के घर जाइये,हाथ रहे…
” कैरियर परामर्श एक आवश्यकता।”
भारत देश में जनसंख्या के बाद दूसरी बड़ी समस्या है, बेरोजगारी। रोज़गार कम हैं और नए रोजगार उत्पन्न करने की गति भी धीमी है। लेकिन खेद इस बात का है कि उपलब्ध रोजगार भी योग्य लोगों को प्राप्त नहीं हो पा रहे हैं। इसका कारण है जानकारी का अभाव। वर्तमान शिक्षा छात्रों को अक्षर ज्ञान…
चंदा मामा दूर के और पुआ पकाये गुड़ के
चंदा मामा दूर के और पुआ पकाये गुड़ के,आप खाये थाली में नूनू को दिए प्याली में।बच्चे को सुलाने के लिए मैया लोरी गाती है,गजब की मिठास है सरस संगीत लहरी में। लोरी का मधुर स्वर जब भी मुन्ना सुनता है,मैया की गोदी में वह तुरंत ही सो जाता है।सो जाने पर भी जननी सदा…
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के सुअवसर पर
समर्पित चंद पंक्तियां:- डॉक्टर सुधीर सिंह अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के शुभ अवसर पर,योगऔर ध्यान का सबलोग दृढ़-संकल्प लें।संयमित रहते हुए प्रतिदिन योगासन करके,स्वयं को स्वस्थ, सुखी और प्रसन्नचित रखें। मस्ती के साथ नियमानुसार योग करने से,साधक काआत्मविश्वास सुदृढ़ हो जाता है।योगासन हमें सिखाता हैअनुशासित रहना,सकारात्मक सोच का दायरा बढ़ा देता है। सबों का लक्ष्य रहे,…
शीर्षक (संवाद )
एक दिन एक शेर शेरनी से बोला ओ भगवान क्या है हमारे समाज का हाल मैंने सुना है कल ही एक शेर ने दूसरे शेर की खींची थी खाल यह बात आज तक मुझको समझ नहीं आ रही है क्यों हम जानवरों को इंसानों की लत लगती जा रही है आज इंसान इंसान का गला…
परिवार के वट वृक्ष – पिता
पिता एक ऐसा शब्द जिसके बिना किसी के जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। एक ऐसा पवित्र रिश्ता जिसकी तुलना किसी और रिश्ते से नहीं हो सकती है। यह सत्य है कि हमेशा माँ के बारे में ही लिखा जाता है । हर जगह माँ को ही स्थान दिया जाता है पर हमारे…
बाज़ी तेरे इश्क़ की
कविता मल्होत्रा (स्थायी स्तंभकार, उत्कर्ष मेल) जीत ही लेंगे बाज़ी हम तुम, ये खेल अधूरा छूटे न प्रेम का बंधन,जन्म का बँधन,हाथ कोई भी छूटे न ✍️ मानसून की दस्तक मौसमी हवाओं के आगमन का पैग़ाम तो लाई है लेकिन अब के बरस सावन की बूँदें मिट्टी को वो खुश्बू नहीं दे पाईं जिनसे हर…
