कविता और कहानी
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के सुअवसर पर
समर्पित चंद पंक्तियां:- डॉक्टर सुधीर सिंह अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के शुभ अवसर पर,योगऔर ध्यान का सबलोग दृढ़-संकल्प लें।संयमित रहते हुए प्रतिदिन योगासन करके,स्वयं को स्वस्थ, सुखी और प्रसन्नचित रखें। मस्ती के साथ नियमानुसार योग करने से,साधक काआत्मविश्वास सुदृढ़ हो जाता है।योगासन हमें सिखाता हैअनुशासित रहना,सकारात्मक सोच का दायरा बढ़ा देता है। सबों का लक्ष्य रहे,…
शीर्षक (संवाद )
एक दिन एक शेर शेरनी से बोला ओ भगवान क्या है हमारे समाज का हाल मैंने सुना है कल ही एक शेर ने दूसरे शेर की खींची थी खाल यह बात आज तक मुझको समझ नहीं आ रही है क्यों हम जानवरों को इंसानों की लत लगती जा रही है आज इंसान इंसान का गला…
परिवार के वट वृक्ष – पिता
पिता एक ऐसा शब्द जिसके बिना किसी के जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। एक ऐसा पवित्र रिश्ता जिसकी तुलना किसी और रिश्ते से नहीं हो सकती है। यह सत्य है कि हमेशा माँ के बारे में ही लिखा जाता है । हर जगह माँ को ही स्थान दिया जाता है पर हमारे…
बाज़ी तेरे इश्क़ की
कविता मल्होत्रा (स्थायी स्तंभकार, उत्कर्ष मेल) जीत ही लेंगे बाज़ी हम तुम, ये खेल अधूरा छूटे न प्रेम का बंधन,जन्म का बँधन,हाथ कोई भी छूटे न ✍️ मानसून की दस्तक मौसमी हवाओं के आगमन का पैग़ाम तो लाई है लेकिन अब के बरस सावन की बूँदें मिट्टी को वो खुश्बू नहीं दे पाईं जिनसे हर…
On this International Yoga Day
Spirituality and YOGA are The secret of ‘soul’ satisfaction With our profound devotion, And total self determination. Achievements of life, lie in the real renunciation, Miraculous approach through regular meditation, Ideally it is the best training For the life’s perfection. Prayers and Prayanayam are The paths to Almighty, And accepting and appreciating His unlimited Authority,…
बदलना है तो खुद को बदलो
हमारे आस पास कुछ न कुछ ऐसा घटता ही रहता है जो हमें पसंद नहीं आता है। ऐसे लोगों से मुलाकात होती ही रहती है जिनकी हरकतें हमें विचलित कर देती हैं। ऐसे लोगों की वाणी, विचार और कर्म केवल दुख ही देते हैं। तब अनायास ही मन में यह विचार आता है कि कितना…
पर्यावरणीय गीत- प्रदूषण का नंगा दानव
लाल बिहारी लाल प्रदूषण का नंगा दानव नाच रहा है दुनिया मेंइस दानव को रोको वरना आग लगेगी दुनिया मेंप्रदूषण का नंगा दानव…….. रो रही है धरती मैया, रो रहा आसमान हैवन धरा से सिमट रहे है, मिट रही पहचान हैमीठा जहर नित घूल रहा है स्वच्छ निर्मल पनिया मेंप्रदूषण का नंगा दानव…….. जल,थल पवन और गगन सभी…
साहित्य टी. वी. ने मनाया पहली बर्षगांठ
लाल बिहारी लाल नीरज पांडे नई दिल्ली। आज देश करोना महामारी से जूझ रहा है। इससे निपटने के लिए सबसे पहले लाँक डाउन का सहारा लिया गया। लोग अचानक घरों में कैद हो गये। ऐसे में साहित्यकारों के सकारात्मक सोंच को बढ़ावा देने और रचनात्मक लेखनी को देश दुनिया में पहुँचाने के उदेश्य से 18…
दादी का दर्द
हंसो दादी लगभग 70 वर्ष की थीं।वह अपने पोते के साथ शहर में एक छोटे से मकान में रहती थीं।जिसमें एक ही कमरा था।दादी के साथ उनका पोता निखिल रहता था। वह अपने बेटे बहू को खो चुकी थीं।दादी को कुछ पैसे पति की पेंशन से मिलते थे।दादी कीपैड मोबाइल चलाया करती थीं।निखिल की जिद…
हर बार जीतना जरूरी नहीं है
हर बार जीतना जरूरी नहीं है कभी-कभार हार भी जाया करो। सारी बाजियों में दिमाग का काम नहीं होता, कभी दिल भी लगाया करो।। और हमें यूँ टकटकी लगा कर ना देखते रहा करो। कभी-कभार अपनी पलकों को भी झपकाया करो।। दोस्त, तमाम उम्र किसी का साथ तुम ना दिया करो। नए पंछियों को खुद…
