Latest Updates

गुरूकुल

श्रीमती कविता मल्होत्रा दोस्तों मित्रता दिवस की रस्म हम यूँ निभा लेते हैं निस्वार्थ प्रेम बनकर निस्वार्थता को मित्र बना लेते हैं अपने घरौंदों की जड़ें दिमाग़ में न बनाकर दिलों में बनाई जाएँ तो हर एक घर ही मंदिर हो जाए !! दिलों को अपनी ख्वाहिशों की सियासत नहीं बल्कि जीवन के परम उद्देश्य…

Read More

हे राम !

हे राम! तुम आ जाओ ना । त्रेता से कलि है विषम बहुत, आकर मुक्त कराओ ना । बन्धन मे पड़ी लाखों सीताएँ , रावण से कहीं दुस्साहस वाले रावण । अब तो खड़े निज देश में , असंख्य राक्षस छिपे नर वेश में । हे राम ! तुम आ जाओ ना । पड़ने न…

Read More

समंदर

बहुत दूर, वो जगह जहाँ तुम, बच सको चले जाना, अकेले ही ख्वाहिशों को कहीं दूर छोड़ देना जैसे स्कूलों में प्रवेश लेकर छोड़ देते हो तुम पढ़ाई को और ध्यान रहे तुम्हें इस बात का के सुबह की ओस की बूंदों की तरह सुकून दे सको किसी की आँख को ठंडक दे सको किसी…

Read More

विधाता की सुंदर रचना

तुम आज इस तरह खामोश हो, युँ उदासी का लिबास चेहरे पर क्यों डाले जाती हो भावनाओं को आहत मत होने दो उन्हें सुलगाओ नया लक्ष्य दो विकट परिस्थितियाँ बहुत आएँगी पग -पग पर पांव डगमगाऐगे तुम मत ठहरना ध्येय अटल साधे रखना माना की तुम स्त्री हो, क्यों तुम्हारा स्त्री होना कभी -कभी समाज…

Read More

” सेवाराम”

अर्चना त्यागी (जोधपुर , राजस्थान ) अपने गांव गए हुए दो साल से अधिक समय हो चुका था। काम की व्यस्तता के चलते जा ही नहीं पा रहा था। रह रह कर गांव की पगडंडी जैसे पुकार रही थी मुझे। आम के बाग, खेत खलिहान सभी जैसे आवाज लगा रहे थे। घर से बहुत दूर…

Read More

कोरोना विनाशक दोहे

आधा नीबू काटकर गरम नीर में डाल,विटामिन सी जाय बढ़ पीतेही तत्कालअदरक घीगुड डाल के गोलीलेउबनायदिनमे निश्चित रूपसे तीनबारनितखायगर्म दूधहल्दी मिलाकर पीए जो व्यक्तिडरेकोरोना देखकरउसकीहिम्मत शक्तिगर्मनीरका भापले कम-सेकम इकबारकोरोनाके कहरमे बिना खर्च उपचार।विटामिन बी केलिए खाएं गोभी पातहरीसब्जिया देतहै आयरनडीअनुपातप्रातः उठकर धूपमे हरदिन बैठे आप,ऊर्जा मिलतीहै स्वतः मिटेगाते संतापदलचीनीअदरकलौग अश्वगंधागिलोयतुलसीहल्दीमुरेठी गुडअजवानमिलोयखूबउबालो औरफिर लेलो अर्कबनायखजूरबदाम अखरोट…

Read More

खामोश

मै मंहगाई हूँतेरी कमर तोड़ने आई हूँकर ले तू लाख जतनलूट के रहूँगी तेरा अमनमेरा तुझसे रिश्ता पुराना हैतू मुझे बुलाये न बुलायेमुझे तो तेरे घर आना हैतेरी ज़िंदगी पे तो मेरा हक़सौफ़ीसदी मालिकाना हैमै डंके की चोट पे कहती हूँकोई क्या कर लेगा मेरामै अकेली नहीं हूँजमाखोरियों/कालाबाज़ारियों/सटोरियोंसे रिश्ता पुराना है मेरामै इनकी छत्र छाया…

Read More

मजाक करने में गजब का मजा है

डॉक्टर सुधीर सिंह मजाक करने में गजब का मजा है,वशर्ते कि  मजाक मे मन मिला हो.मजा के लिए बस मजाक कीजिए,कहीं नहीं  उसमें गिला-शिकवा हो. मजाक करने में जीवन का मजा है,उस मजा का भरपूर  मजा लीजिए.मजाक का लहजा  जो  समझते हैं,उनके साथ ही  मजाक भी कीजिए. मजाक मन को हराभरा कर देता है,आत्मीयजनों का…

Read More

(लघुकथा) बौद्धिक विकास की कमतरी

ओ यार!  क्या तूने सुना कि फलां फ़िल्म के हीरो ने आत्महत्या कर ली !”     “हाँ , यार मैं तो देखते ही शॉक्ड हो गया ।” फोन पर बात करते हुए अर्णव अपने मित्र अर्जुन से बोला।     “अरे यार! पहले तो मुझे यकीन ही नहीं हुआ, लगा कि ये फेक न्यूज है, पर यार…

Read More

जीवन का आनँद होने न पाए मँद

(कविता मल्होत्रा) दिशाहीन दौड़ मत दौड़ोअपनों का हाथ मत छोड़ो✍️जैसे-जैसे लॉकडाऊन खुलने लगा है, वैसे-वैसे मार-काट, चोरी-डकैती और आपसी भेदभाव के सर्प सर उठाने लगे हैं।कोरोना-काल के इतने बड़े बवंडर के बाद भी लोगों को अराधना का साफ आसमान दिखाई नहीं पड़ रहा है।क्या दीप जला कर मंत्रोच्चारण करने से ही ईश्वर की अराधना संपूर्ण…

Read More