कविता और कहानी
बाढ़ पीड़ितों के घर में विपदा बरस रही है
बाढ़ पीड़ितों के घर में विपदा बरस रही है.बाढ़ क्षेत्र में सर्वत्र ही तबाही-ही-तबाही है.न पीने को पानी है;न खाने को ही भोजन,भुक्तभोगी कहते हैं, दीखता नहीं प्रशासन.बाढ़ बहाकर ले गया सारी संचित निधियां,दह गया तैयार फसल, लुट गई हैं खुशियां.दूध के लिए मासूम सब जार-बेजार रोते हैं,दवा बिना रोगी को यमदूत खड़ा दिखते हैं.सड़ी…
हर मुश्किल राह भी आसान हो जाती है
सम्पादकीय (मनमोहन शर्मा ‘शरण’) जम्मू–कश्मीर से धारा 370 हटते ही न जाने क्यों पाकिस्तान में खलबली मच गई ? उन्हें इस बात का आभास है कि वहां खुशहाली होते ही ‘पीओके’ में हुड़दंग मच जाएगा फिर वो भी गंवाना पड़ सकता है । विश्व बिरादरी में खूब हाय–तौबा की, पर भारत की सफल कूटनीति के…
मां के चरणों में समर्पित दोहे
माता तेरे चरण में ,अर्पित मेरी जान। तेरे ही आशीष से,हो सबका कल्यान ।। कर दो माँ सब पर दया, रह ना कोई जाय। जिसे मिले तेरी दया, धन्य वही हो जाय ।। पावन माँ का धाम है,जो आये तर जाय। सब पर माँ करना कृपा,सब झोली भर जाय।। ना कोई माँ से बड़ा, उनका…
बाल कविता – स्कूटी की सवारी
नई स्कूटी लेकर आया राजू भालू, उसका दोस्त चिम्पू बंदर है बहुत चालू। मीठी बातो से राजू को बहकाता, रोज उसकी स्कूटी मजे से चलाता।। एक दिन चिम्पू का चौराहे पर कटा चालान, बिन हैलमेट पहने स्कूटी चलाता सीना तान, करी बहुत मिन्नते मिट्ठू तोता हवलदार की, पर फिर भी तोते ने उसकी बात ना…
है विजयी जो साँसारिक चुनौतियों से हारा नहीं कौन है जिस हृदय में मन्दिर और गुरुद्वारा नहीं
प्रकृति ने सँपूर्ण सृष्टि को समान रूप से अपने तत्व देकर गढ़ा है। अब ये तो मानव जाति पर निर्भर करता है कि वो किस परिस्थिति में किस तत्व की प्रधानता का वरण करे। चाहे माँ दुर्गा की आराधना हो, चाहे विजयादशमी का अवसर हो, प्रत्येक साँसारिक उत्सव एक ही आध्यात्मिक प्रतीक की ओर इशारा…
जो बाल्कनी हमें मिली थी
जो बाल्कनी हमें मिली थी हमनें कमरा बनवा डाला। परिपूर्ण हों आशाएं छोटा एसी लगवा डाला। बहुत खुश थे हम बिटिया को नया रूम मिलेगा उसका भोला भाला चहेरा अब खुशी से झूम खिलेगा। इसी कल्पना में खोए थे इतने में बिटिया आईं कमरा उसने भी देखा पर ना वो मुस्काई। कुछ संजीदा भाव उसके…
इतिहास रचाओ
देश में एक इतिहास रचाओ बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ बेटी पिता की शान है बेटी ह्रदय की जान हे बेटी थकी वंश हे बढ़ता कुम कुम पगले आंगन में पड़ते भारत की वो बहादुर बेटी थी वो थी झांशी की रानी लक्ष्मी थी वही है लक्ष्मी रानी जिसने अंग्रेज का उतारा पानी देश में…
सजग राष्ट्रीय नेतृत्व पर सबको गर्व होना चाहिए
खुशामद-परस्त लोगों सेआमआदमी परेशान है, बिना तेल-मालिश किए होता नहीं कोई काम है. आसन चाहे जमीन हो; या हो बहुत ऊँचाई पर, खुशामद के बाद ही उनसे होती जान-पहचान है. कुर्सी का नशा इंसान के लिए गजब का नशा है, स्वजन-परिजन को भी चढ़ावा चढ़ाने कहता है. कुर्सी की संतुष्टि के लिए चढ़ावा बहुत जरूरी…
लोकप्रिय,सशक्त एवं सजग प्रधान मंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी के जन्मदिन के शुभ अवसर पर समर्पित चंद पंक्तियां
जिन्होंने दृढ़-संकल्प लिया है; नया इतिहास हमें गढ़ना है,विकसित राष्ट्रों की सूची में,हिंदुस्तान को शीर्ष पर रखना है.प्रभु!उस नरक्ष्रेष्ठ नरेंद्र मोदी को स्वस्थ,सुखी,दीर्घायु रखना,उन्होंने जो प्रण ठान लिया है,उसे पूरा करने की शक्ति देना.130 करोड़ जनता की शुभकामनाएं हैं नरेंद्र मोदी के साथ,नरेंद्र!तुम्हें जन्मदिन मुबारक हो,भारत माँ का है आशीर्वाद.
