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धोबीघाट

एक अँधेरी गुफामें खिंची जा रही है वह—घिरनी की तरह घूमती हुई।घोर अँधेरा—आँखें फाड़ फाड़कर देखने की कोशिश कर रही है वह-,पर कुछ दीखता नहीं –काला –गहरा अँधेरा बस।घूमता हुआ शरीर जैसे तिनके तिनके हो बिखर जाएगा—कितना लम्बा अँधेरा है—एक किरण ही रोशनी की दिख जाए गर! और –और  –अचानक जैसे रोशनी का विस्फोट है…

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नेता बने अभिनेता

संगीता अग्रवाल (आगरा, उत्तर प्रदेश) नेता बने अभिनेता वोटों के दिन जब हैं आए नेता भी अभिनेता बन जाए झूठे-झूठे सपने दिखाए टूटी हुई सड़कें बनबाएं बिजली पानी वो दिलबाएं झूठे सबको भाषण सुनवाएं बच्चों के स्कूल खुलबाएं सबको लैपटॉप फ्री बँटबाएं अस्पतालों को खुलवाएं बिन पैसे उपचार करवाएं सबको नए रोजगार दिलाएं जनता पर…

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तिरंगा

        रवि और उसका बेटा गुड्डू आज 15 अगस्त की छुट्टी के दिन अपनी कार में बैठकर एंजॉय करते  हुए बाहर घूम रहे थे और गुड्डू जगह जगह रुककर पूरे शहर का मजा ले रहा था।         एक चौराहे पर अचानक एक छोटा सा बच्चा हमारा तिरंगा झंडा बेचता हुआ दिखाई दिया।भारत के तिरंगे को…

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राखी के दोहे

धागा यद्यपि सूत का,पर दृढ़ औ’ मजबूत । बहिन-सहोदर नेह का,बन जाता जो दूत ।। पर्वों का यह पर्व है,जिसमें रक्षा,नेह । अंतर्मन उल्लास में,होती पुलकित देह ।। धागा बस इक माध्यम,पलता है विश्वास । जिसमें रहती निष्कपट,मीठी-सी इक आस ।। बचपन की यादें लिये,बिखरे मंगल गान । सम्बंधों में है सजा,संस्कार का मान ।।…

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उ.प्र. के उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने डाक निदेशक एवं साहित्यकार केके यादव को किया सम्मानित

लखनऊ मुख्यालय परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ एवं चर्चित  ब्लॉगर व साहित्यकार श्री कृष्ण कुमार यादव को प्रशासनिक एवं सामाजिक क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिये उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने विधायी एवं न्याय मन्त्री श्री बृजेश पाठक की अध्यक्षता में आयोजित एक कार्यक्रम में “भोजपुरी गौरव” सम्मान से विभूषित किया।…

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आज का दिन है ऐतिहासिक

हीरेंदर चौधरी ‘जापानी’ आज का दिन है ऐतिहासिक आज का दिन है बहुत महान आज के दिन पूर्ण हुए हैं 72साल से लटके काम। नमन है मोदीजी को है शाहजी को प्रणाम। लौह पुरुष हैं दोनों ही तुरंत करें सभी ही काम। है विश्वास झलकता इनमें नामुमकिन को मुमकिन कर दें दुनिया जो सोच ना…

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आजादी का मीठा फल जब आम आदमी खाएगा

डॉक्टर सुधीर सिंह आजादी का मीठा फल जब आम आदमी खाएगा, तब   तिरंगा  आसमान  में   लहर-लहर  लहराएगा. अभी  गरीबी गई  नहीं  है  हिंदुस्तान  के  आंगन से, मुक्त  नहीं  है आम जनता  मजबूरी और शोषण से. कृषि प्रधान देश  की  धरती  आज भी असिंचित है, बाढ़-सुखाड़ से  दुखी किसान घर में बैठा चिंतित है. कागज के…

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स्वाधीन भारत बनाम रक्ष्य वचन पर्व

थाल सजाकर बहन कह रही,आज बँधालो राखी। इस राखी में छुपी हुई  है, अरमानों की  साखी।। चंदन रोरी अक्षत मिसरी, आकुल कच्चे-धागे। अगर नहीं आए तो  समझो, हम हैं बहुत अभागे।। क्या सरहद से एक दिवस की,छुट्टी ना मिल पायी? अथवा कोई और वजह है, मुझे बता दो भाई ? अब आँखों को चैन नहीं…

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समय बडा बलवान

माँ ने आँगन में जो बोए थे सपनो के पौधे कभी, वक्त की कंकरीट के आगे वो पौधे ही उजड गए। पिता ने जो उम्मीद का दामन थामा था कभी, वो उम्मीदे घर छोड़,नया असियां बनाने निकल गई। दोनों ने मिलकर जो सपनो की पौध लगाई थी कभी, वक्त के माली ने उनके बढ़ते ही…

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एक निर्णय इस कदर, इतिहास पर भारी पड़ेगा

एक कतरा अन्न ज्यों, उपवास पर भारी पड़ेगा एक आंसू भी कभी, उल्लास पर भारी पड़ेगा आने वाली पीढ़ियों को, याद होगा आज का दिन एक निर्णय इस कदर, इतिहास पर भारी पड़ेगा यशपाल सिंह

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