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नदी की व्यथा

नदी की व्यथा मैं नदी हूं बहती अनवरत, देती हूं जीवन सभी को । राह के चट्टानों को तोड़ती, बढ़ती ही रहती मैं  सतत। सदियों से मेरे संग संग ही, इंसा विकास पथ पर डोला। आकांक्षाओं के अपने नीचे, सबकुछ तुम फिर भूल गये। मेरी ही धारा को मोड़ा फिर, मुझको ही बन्धन में बांधा…

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आपका दिन

“मैं केक नहीं काटूँगी।” उसने यह शब्द कहे तो थे सहज अंदाज में, लेकिन सुनते ही पूरे घर में झिलमिलाती रोशनी ज्यों गतिहीन सी हो गयी। उसका अठारहवाँ जन्मदिन मना रहे परिवारजनों, दोस्तों, आस-पड़ौसियों और नाते-रिश्तेदारों की आँखें अंगदी पैर की तरह ताज्जुब से उसके चेहरे पर स्थित हो गयीं थी। वह सहज स्वर में…

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ये भी एक रास्ता

अनिल बड़ी मुश्किल से सांस ले पा रहा है।आखिर आगे ढींगू मंदिर की खड़ी चढ़ाई है, पहुंचना भी बौद्घ गोंपा तक है।पिता जी ने किसी जमाने में यहां शिमला में सस्ते में ज़मीन ले ली थी फिर गांव छोड़ यहीं के हो कर रह गए  थे। अनिल अब नौकरी के सिलसिले में चंडीगढ़ ज़्यादा रहता…

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बजट

बजट के माध्यम से बढेगी गरीबों,मजदूरों, किसानो और महिलाओ की शक्ति सभी क्षेत्रों में योजनाओं से होगी वृद्धि राष्ट्र की बढेगी आर्थिक समृद्धि । अमीरो की हाय-हाय गरीबों का सौभाग्य अतिरिक्त टैक्स चार प्रतिशत गरीबों के लिए लाएगा अनेक वित्तीय उपहार। टेक्स स्लैब में बदलाव नहीं पाँच लाख आमदनी वालो को टैक्स देने का अधिकार…

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नदी और नारी

चंचल… रोमांच से भरपूर इठलाती हिलौरे मारतीं, अनवरत… नदी और नारी जब भी बड़ीं… रोकीं गईं । वेग किया गया उनका अवरोहित,,, बाँध के बंधन चट्टानें अटका कर बीच अधर में,,, रफ्तार उनकी मिटा दी गई । बंधनों में बंध कर, कुछ रुकीं, कुछ झुकीं और बन गईं बंदी भूल अपना,,, असीम वेग, खुद का…

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नारी तू नारायणी

नारी शक्ति का परिचय इस देश को आदि काल से होता रहा है।वेदो पुराणो और ग्रंथो से लेकर इतिहास और आज के आधुनिक परिप्रेक्ष्य में भी देखने को मिलता है।आदि काल में सती, दुर्गा, सरस्वती, पार्वती और अनेक सती की कहानी का वर्णन है तो इतिहास में रानी लक्ष्मी बाई सरोजनी नायडू मदर टेरेसा आदि…

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विकास के नाम पर लूट-खसोट अपराध है

विकास के नाम पर लूट-खसोट अपराध है,आम गरीब जनता के  साथ विश्वासघात है.जनता को  जागने व जगाने की जरूरत है,हक की हकीकत  समझने  की  जरूरत है.गरीबों के  घर में भूख, भय और बीमारी है,आम आदमी का शोषण आज भी जारी है.किसान को अमीर लोग अन्नदाता कहते हैं,उनकी मजबूरी का फायदा  खूब  उठाते हैं.बद से बदतर…

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पिता की वाणी में मिठास व माधुर्य कम

डॉक्टर सुधीर सिंह पिता की वाणी  में  मिठास व माधुर्य कम, अनुशासन का  कड़वापन  बहुत  रहता है. जिस संतान ने इस रहस्य को समझ लिया, उसका पारिवारिक  जीवन  सुखी रहता है. पिता को चिंता  है  बच्चों  के  भविष्य  की, इसलिए संतान को वह पुरुषार्थी बनाता है. निष्ठुर,अनुशासित  एक दृढ़  गुरु  की तरह, चुनौतियों से  लड़…

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आलोचना की प्रासंगिकता

 डॉ. अवधेश कुमार ‘अवध’ आलोचना, समीक्षा या समालोचना का एक ही आशय है, समुचित तरीके से देखना जिसके लिए अंग्रेजी में ‘क्रिटिसिज़्म’ शब्द का प्रयोग होता है। साहित्य में इसकी शुरुआत रीतिकाल में हो गई थी किन्तु सही मायने में भारतेन्दु काल में यह विकसित हुई। आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी का इसमें महती योगदान है…

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बजट

बजट के माध्यम से बढेगी गरीबों,मजदूरों, किसानो और महिलाओ की शक्ति सभी क्षेत्रों में योजनाओं से होगी वृद्धि राष्ट्र की बढेगी आर्थिक समृद्धि । अमीरो की हाय-हाय गरीबों का सौभाग्य अतिरिक्त टैक्स चार प्रतिशत गरीबों के लिए लाएगा अनेक वित्तीय उपहार। टेक्स स्लैब में बदलाव नहीं पाँच लाख आमदनी वालो को टैक्स देने का अधिकार…

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