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दिग्विजयनाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय गोरखपुर में  भीम प्रसाद प्रजापति के दो काव्य कृतियों का लोकार्पण

गोरखपुर।

संगम सांस्कृतिक, साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था तथा दिग्विजय नाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय, गोरखपुर के संयुक्त तत्वावधान में दिनांक 14-12-25 दिन रविवार को महाविद्यालय सभागार में कवि श्री भीम प्रसाद प्रजापति की काव्य कृतियों ‘अनजाने पथ’ एवं ‘चाँद का बगीचा’ का भव्य लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. रामदेव शुक्ल ने कहा कि आज के डिजिटल परिवेश में  हिंदी विषय के प्रति रुचि में कमी देखी जा रही है। ऐसे समय में भीम प्रसाद प्रजापति की कृतियाँ लोकबोध, संवेदना और समकालीन जीवनानुभवों का सशक्त चित्र प्रस्तुत करती हैं। उन्होंने कहा कि कविता शब्द-संपदा और संवेदना से निर्मित होती है तथा श्री प्रजापति की कविताओं में नवीनता, सामाजिक चेतना और मानवीय सरोकार स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं, जो पाठक को भीतर से जोड़ते हैं।आज बाल कविताओं पर लेखनी कम चल रही है लेकिन भीम प्रसाद प्रजापति ने कई वर्षों बाद इस क्षेत्र में :चांद का बगीचा; लेकर सबके सामने आये।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रो. रामदरशा राय ने कहा कि कविता मनुष्य को भीतर से समृद्ध करती है और श्री प्रजापति की रचनाओं में जीवन-संघर्ष तथा सामाजिक यथार्थ का प्रभावी चित्रण मिलता है। अनजाने पथ पर चलना निश्चित रूप से नई खोज है। भीम ने अपनी कविताओं में अतित को खोज रहे हैं किसी को भी धिक्कारा नहीं है।

विशिष्ट अतिथि श्रीधर मिश्र ने कहा किसी भी सफल कवि के लिए अनजाने पथ पर चलना ही पड़ेगा।  भीम प्रसाद प्रजापति ‘परम्परा बोध’ के कवि हैं। इनकी कविताओं में राम है,कृष्ण, द्रौपदी, जटायु है। आजकल बाल कविताओं का अकाल पड़ गया है लेकिन भीम ने उस ओर सबका ध्यान आकृष्ट किया है।

सरस्वत अतिथि प्रो. डॉ. अनिल कुमार राय ने कहा कि भाषा और शब्दों की दुनिया में रचना के बिना संसार बेजान हो जाता है। उन्होंने बताया कि श्री प्रजापति की कविताओं में सहजता, लोकबोध, अनुभव और भावों का सुंदर संयोजन दिखाई देता है।एक अच्छे समाज निर्माण के लिए हर घर में एक कवि/शायर होना चाहिए। अनजाने पथ में भीम प्रसाद प्रजापति ने मनुष्यता, भारतीयता, आदि संवेदनाओं के साथ खड़े है जबकि आज ओबीसी, समाज विघटनकारी पर कविताओं को बाटने की कोशिश हो रही। ऐसे में कवि अडिग है।

सारस्वत अतिथि डां आद्या प्रसाद द्विवेदी ने शुभ कामनाएं देते हुए कहा कि भीम प्रसाद प्रजापति की कविताएँ अपने समय और सामाजिक तानेबाने को निर्भयता से उकेरा है। अनजाने पथ की हर कविताएँ दिल को छू लेने वाली है। चाहे कांटा, संवेदनाओं की हत्या, नाच, नदी का इंतजार हो । सभी कविताएँ एक से बढ़कर एक है।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. अमिताभ पाण्डेय ने किया।सरस्वती बंदना प्रिती मिश्रा ने, स्वागत भाषण डां रामकृपाल राय ने किया तथा  सबका आभार  डां अनिता पाल सिंह ने किया। इस समारोह में संगम संस्था के अध्यक्ष कृष्ण कुमार चंद ‘कौशिक’, ने  बेहतरीन और सुन्दर पुस्तक  प्रकाशन के लिए अनुराधा प्रकाशन  दिल्ली के प्रकाशक  डां मनमोहन शर्मा का आभार जताया । इस अवसर पर  डां अजय अंजान, रविन्द्र मोहन त्रिपाठी,  धरमेन्द्र  त्रिपाठी ,अजय यादव, प्रेम नाथ मिश्र, प्रतिभा गुप्ता,प्रजापति की पत्नी श्रीमती मालती देवी, साथ ही विवेक, विकास, करुणानिधि, संजय सिंह, शैलेन्द्र सिंह एवं राज किशोर सिंह ,परमात्मा सिंह, शशिनाथ सिंह, सुरेश प्रजापति, अभिनीत मिश्र,  श्री संजय कुमार सिंह,संजय पाण्डेय,चन्देश्वर परवाना, अजय पाण्डेय ( राजू बाबा) पूनम सिंह, प्रीति मिश्रा, निरजा बसंती , जय शिव प्रताप चंद, भुवनेश्वर, नवनीत कुमार,अतुल कुमार ब्रजेन्द्र नारायण, अकिंचन जी, सुभागता पाण्डेय,      गोविन्द जी,सहित अनेक साहित्यप्रेमी, शिक्षक एवं छात्र उपस्थित रहे।

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