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“अपने पराए”

विपत्ति के समय ही मनुष्य के चरित्र की पहचान होती है। कौन अपना है और कौन पराया है, इसका पता मुसीबत में ही लगता है। इस घटना के जो मुख्य पात्र हैं वो आज नहीं हैं। परन्तु घटना से मिली एक सीख आज भी मुझे याद है। दादाजी के गुजर जाने के बाद की घटना…

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साहित्यिक आयोजनों में जुगलबंदी का जाल

(अकादमियों और संस्थानों की बंद दुनिया में अपनों का उत्सव) – डॉ. प्रियंका सौरभ भारतीय साहित्यिक परिदृश्य सदैव से विविधता, विचारशीलता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का प्रतीक रहा है। यह वह क्षेत्र है जहाँ शब्द केवल रचना नहीं होते, बल्कि समाज के अनुभव, संघर्ष, संवेदनाएँ और परिवर्तन की आकांक्षाएँ भी अभिव्यक्त करते हैं। परंतु वर्तमान…

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मंत्रालय वितरण में दिखा खुन्नस , योगी ने खुद सम्हाली अधिकतर महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी !

 जब यूपी में योगी 2.0 के 52 सहयोगियों ने शपथ ली तो जातिवादी समीकरण  ,प्याज के छिलके की तह परत दर परत खुलते दिखे। हद्द तो तब हो गई जब शपथ के बाद ग्रुप फ़ोटो सेशन हुआ था , बीच में मोदी , मोदी के एक बगल राज्यपाल आनंदी बेन पटेल और दूसरी बगल योगी।…

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माँ (कविता-6)

वो कहते हैं हमने भगवान नहीं देखा मैं कहता हूँ मेने देखा हैं जब मुझे तकलीफ होती हैं तो मेरी माँ रोती हैं मैं दुनिया का सबसे हसीं लाडला हूँ मेरी शैतानियों का कोई ठिकाना नहीं वो माँ ही तो हैं जो हमारे हर किरदार से प्यार करती हैं    किसी भी उम्र मे मुझे डांट लगा…

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पंच से पक्षकार

          हरिप्रसाद और रामप्रसाद दोनों सगे भाई थे। उम्र के आखिरी पड़ाव तक दोनों के रिश्ते ठीक-ठाक थे। दोनों ने आपसी सहमति से रामनगर चौराहे वाली अपनी पैतृक जमीन पर दुकान बनाने का सोचा, ताकि उससे जो आय हो उससे उनका जीवन सुचारू रूप से चल सके।       दुकान का काम चल ही रहा था…

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दोहों के मनके

अपना अपना ज्ञान है,सब जग रहा बखान। माने खुद को ही बड़ा,दें न किसी को मान।। देखो सजा बजार है , दुनिया में सब ओर। अपना अपना ज्ञान वे , बेच रहे पुरजोर ।।  ज्ञानी सब बनते फिरें , सच से होकर दूर।  अपना अपना ज्ञान ले, फिरते मद में चूर ।।  राम और रहमान…

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दर्द घुटनों में पाया गया

अरुण शर्मा साहिबाबादी। ग़ज़ल…….. दर्द घुटनों में पाया गया,फिर भी रिक्शा चलाया गया। मैं फ़क़त रिक्शे वाला रहा,नाम से कब बुलाया गया। मेरा रिक्शा पलटते बचा,जब ये पुल पर चढ़ाया गया। काम रिक्शे का‌ मेहनत का था,फिर भी छोटा बताया गया। आज रिक्शा फंसा जाम में,आज कुछ ना कमाया गया। एक गमछा था मुझ पर…

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दुर्घटना पीड़ितों के लिए “कैशलेस” उपचार : नीयत नेक, व्यवस्था बेकार

इस देश में जब कोई सड़क पर दुर्घटनाग्रस्त होता है, तो सबसे पहले यह नहीं पूछा जाता कि ज़ख्म कितना गहरा है — पहले यह पूछा जाता है कि “पहचान पत्र है?”, “बीमा है?”, “अस्पताल पंजीकृत है?” और फिर अंत में — “बचा पाएँगे या नहीं?”। मानो पीड़ित की जान से पहले कागज़ ज़रूरी हो।…

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इतनी लम्बी उम्र मिली है , पर जीने का वक़्त नहीं – जय प्रकाश भाटिया

उम्र की सच्चाई इतनी लम्बी उम्र मिली है , पर जीने का वक़्त नहीं, रिश्तों की भरमार है पर रिश्तों का अस्तित्व नहीं , चेहरे पे मुस्कान सभी के, दिल में क्या है स्पष्ट नहीं, झूठी तारीफों के पुल पर , सच्चाई का वक्तव्य नहीं, जेब की दौलत लुटवाओ तो, यारों की है लाइन लगी,…

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“वात्सल्य” ट्रस्ट को मिला “राष्ट्र गौरव सम्मान”

रविवार 19 जून की भोर “वात्सल्य” ट्रस्ट के बच्चों के लिए एक ऐतिहासिक रूप लेकर आई।गुलाबी नगरी जयपुर से भव्या फ़ाऊंडेशन और भव्या इंटरनेशनल के तत्वावधान में होने वाले अंतर्राष्ट्रीय मैत्री सम्मलेन में प्रतिभागिता का निमंत्रण देने वाली सबकी प्रिय डॉ. निशा माथुर जी ने वात्सल्य के बच्चों को इँटरनेशनल मंच प्रदान किया। भव्या फ़ाऊंडेशन…

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