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36 घंटे से अधिक समय से अंधेरे में डूबी पंजाब व हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़, बिजली बहाल करने पहुंची आर्मी

Chandigarh Electricity Worker Strike: पंजाब और हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़ 36 घंटे से अंधेरे में डूबी हुई है। शहर में सोमवार रात से बिजली संकट जारी है। स्थिति ये है कि लोगों के घरों में लगे इनवर्टर जवाब दे गए हैं। मोबाइल की बैटरी खत्म होने लगी है, जिससे लोग परेशान हैं। एस्मा लागू होने के बावजूद बिजली…

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व्यंग्य – जात न पूछिए नेता की…!

जीवन में कोई कब कोई नेता किस धर्म जाति संप्रदाय का हो जाए कुछ कहा नहीं जा सकता । आजकल के ट्रेंड में हर संप्रदाय का अपना रूल रेगुलेशन है  । किसी को डॉगगिरी पसंद है तो किसी को घाघगिरी । अपने पलटूराम भैया को ही ले लीजिए ताजा ताजा मीम समर्थक बने थे और…

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माया मिली ना राम, बन गए आंदोलनजीवी !

खद्दर डाल कर ,दरी बिछाकर बिसलेरी का जल पीने वाले देश के परजीवियों को प्रधानमंत्री जी ने आंदोलन जीवी कह दिया । अखिलेश यादव भी खुद को रोक नहीं पाए और खुद को लपेटे में लेकर भाजपा को चन्दा जीवी कह दिया । आप के भगवंत मान ने तो टूल्ल होकर रक्तजीवी कह दिया और…

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खुलेआम जनमत की खिल्ली उड़ रही है

संसद के अंदर  जब  शोर-शराबा होता है, अनर्गल ही  घात-प्रतिघात होने लगता है। मेहनती जनता की कमाई की बर्बादी पर, जनप्रतिनिधियों का  ध्यान नहीं जाता है। संसद  में  एक मिनट  के  बहस  में  व्यय, सुनते हैं उनत्तीस हजार रुपये हो जाता है। सुविधाभोगी  जननेता ईमानदारी से सोचें, खर्च होने वाला सब धन कहां से आता…

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जिन्दगी

जिंदगी ,तेरे कितने रूप कभी बल खाती नदिया की तरह बेबाक बेखौफ आगे बढ़ती जाती है । तो कभी डर सहम कर थम सी जाती है । कभी तपती है जेठ की दुपहरी सी तो कभी बरसती है सावन की फुहारों सी। जिंदगी ,तू कभी एक सी नहीं रहती पतझड़ के आते ही गुमसुम हो…

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प्यारी सी बिटिया

मै गीत गुन -गुनाऊ सुन प्यारी सी बिटियाँ चिड़ियों सी चहकती रहे हर आँगन की बिटियाँ हर वक्त तू खुश रहे मेरी प्यारी सी बिटियाँ। मै तुझे आवाज लगाऊ तुम दोड़ी आओं बिटियाँ बाबुल का कहा मानती हर आँगन की बिटियाँ हर वक्त तू खुश रहे मेरी प्यारी सी बिटियाँ। मै सपने देखता जाऊं मेहंदी…

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उथल-पुथल से भरपूर रहा पखवाड़ा

राजनीतिक सफरनामा : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव यह पखवाड़ा बहुतउथल-पुथल वाला रहा । चुनाव भी निपटे और बहुत सारे बड़े कहे जाने वाले नेता भी निपट गए । वे चुनाव जीतकर निपट गए और बुछ चुनाव हार कर निपट गए । पर सबसे पहले तो भारत के लोकतंत्र के मंदिर में अनायास घुसने वाले तथाकथितों की कहानी…

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बँटवारा

        “भैया अम्मा की तबियत ठीक नहीं है आप भाभी और बच्चों को लेकर आ जाइए।” सुनील ने बड़े भाई  विकास को फोन किया तो उसकी आंखें भर आयीं थी । चार पाँच साल से गाँव में रहकर वह अकेले ही मां की सेवा कर रहा था। भाभी और स्वयं उसकी पत्नी भी शहर में…

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बाहर काल है

विपदा आई जग पर भारी,              विष हर ओर है घुल रहा।  तांडव फिर से मचा रही,          जग में सुरसा मुख खुल रहा।  कठिन समय यह जग पर भारी,              जब लॉक डाउन सफल बनेगा ।  संकल्प के अस्त्र से ही बंधु ,              देश – दुनिया करोना मुक्त बनेगा ।  लांघो न तुम लक्ष्मणरेखा,               घर अपने और…

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बेटियों पर अत्याचार : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव

बेटियों पर बढ़ती दरिंदगी, आखिर समाज को हो क्या गया है ? यह प्रष्न तो अब स्वाभाविक रूप् से सामने आने लगा है । व्यक्ति इतना दरिंदा भी हो सकता  है ? समाज के इस घिनौने रूप् की कभी कल्पना भी किसी न की होगी । एक के बाद एक घटनायें घटती जा रही हैं…

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