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आज अयोध्या में भूमि पूजन है

डॉक्टर सुधीर सिंह आज अयोध्या में भूमि पूजन है,आइए!मिलकर खुशियां मनाएं.अवधनगरी की पवित्र माटी को,शुद्ध हृदय से हमसब नमन करें. नई दुलहन सीअयोध्या सजी है,दीपावली सा महोत्सव है सर्वत्र.संपू्र्ण भारत आज  झूम रहा है,जय क्ष्रीराम की गूँज सब जगह. यशस्वी प्रधान मंत्री के हाथों से,राम मंदिर का शिलान्यास होगा.दुनिया भर में रामराज का झंडा,एकदिन हिंदुस्तान…

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पिता का स्पर्श : अम्ब्रीश श्रीवास्तव

पिता भी करना चाहता है अपने बेटे को स्पर्श, बिल्कुल माँ की तरह,चूमना चाहता है मस्तक को, बिल्कुल माँ की तरह।अपनी गोद में बैठाकर, सहलाना चाहता है बालों को, बिल्कुल उसकी माँ की तरह।लेकिन समाज ने बाँध दिया पिता को कुछ ऐसी उलझनों में,कि वो समय ही न दे पाए, संतान से बंधने में।उसे दी…

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फ़िट इँडिया-हिट इँडिया

धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होए माली सींचे सौ घड़ा, ऋतु आए फल होए कबीर जी के दोहे में धैर्यशीलता का कितना खूबसूरत सँदेश छिपा है।बात केवल इतनी सी है कि किसी भी सोच विचार के बीज को बो देने भर से फ़सल के इँतज़ार में हाथ पर हाथ रख कर बैठ जाने भर…

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काश मैं मोबाइल होती

“काम बहुत था यार आज, बुरी तरह से थक गया हूँ।” – सोफे पर अपना बैग रखते हुए अजीत ने कहा।  “अजीत जल्दी से फ्रेश हो जाओ, तब तक मैं चाय बना देती हूँ।”  “ठीक है, मधु! ” कहते हुए अजीत बाथरूम में चला गया। अजीत के फ्रेश होकर हॉल में आते ही माधुरी चाय-पकौड़े…

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“रहे उजाला हर दिल में,ना कोई तमस हो बारह महीने हर दिन बसँती प्रेम दिवस हो”

ना रहे किसी भी रूह में, मैं मेरी की हवस उतरे हर दिल में इश्क ए इब़ादत, तो मने समस्त ब्रह्माण्ड में बसँती एक प्रेम दिवस कितने भाग्यशाली होते हैं वो बच्चे जिन्हें उच्च शिक्षा के अवसर अपने देश में भी मिलते हैं और विदेशों में भी।अगर समाज के ये तथाकथित उच्च शिक्षित विद्वान अपनी…

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अँधेरे और उजाले

गंगा के  किनारे, यूँ हीं नहीं  लगी है भीड़ साहब। लोगों  ने  पाप  किये  होंगे शायद  बेहिसाब।। और वो कहता है मुझको, आओ कभी मेरे भी द्वार। गर करते  हो मुझे से प्यार, बिना किसी दरकार।। काश! वो तो,  मेरी  हैसियत ना पूछता। अच्छा  होता,  गर  वो  मेरी  खैरियत   को  पूछता।। उनका पैग़ाम नफ़रत था,…

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जातिवादी नेता ही देश में असली समस्या, सोशल मिडिया पर सनातन और सवर्ण है इनके निशाने पर ……

पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी इसमें ग़लत है क्या कुछ..? ये जातिवादी गुंडे आरक्षणम देहि बोलते बोलते एक धरने में रोज़ घुसते हैं और बिना लॉग लपेट के खाना खाकर ब्राह्मणवाद मुर्दाबाद बोलकर चल देते है। आख़िर ये सब नेता और साहेब के चेले ही तो हैं जिन्होंने अस्सी साल तक…

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कभी निष्फल नहीं हो सकता हमारा दूसरों को प्यार सम्मान अथवा महत्त्व देना

कुछ समय पहले की बात है कि एक हिंदी फिल्म देख रहा था। फिल्म और मुख्य पात्र का नाम है मिली। मिली एक मॉल के फूड जंक्शन में काम करती है। एक दिन गलती से मिली रेस्टोरेंट के फ्रीजर रूम में बंद हो जाती है। फ्रीजर रूम की सरदी के कारण उसकी हालत बहुत खराब…

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“राम तुम्हे आना होगा।”

राम यानि वो चरित्र जिसने जीवन जीने की कला सिखाई। अपना सम्पूर्ण जीवन इस तरह व्यतीत किया कि मिसाल बन गए। हर युग में, हर परिस्थिति में उनके द्वारा उठाए गए हर कदम का लोग गुणगान करते हैं। यूं ही नही उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है। उनके व्यक्तित्व का आकर्षण, कोमल वाणी का सम्मोहन…

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मातृभाषा सम्मानित हो, तो आत्मनिर्भर भारत हो

धरती से अंबर तक आजकल हर कोई वसंती रंग में रंगा हुआ है, साथ ही इन दिनों हमारे देश की लगभग चार पीढ़ियों पर गुलाबी रंग का मदिर अहसास भी छाया हुआ है।मान्यता है कि वैलेंटाइन दिवस के माध्यम से पूरे विश्व में निःस्वार्थ प्रेम का संदेश दिया जाता है।लेकिन प्रेम के व्यापक स्वरूप को…

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