गीतिका (गज़ल)
तेरे होंठों की चंचल हंसी से मेरेदिल में फूलों के जैसे चमन खिल गयेतेरी बाँहों में सिमटी तो ऐसा लगामेरे पहलू में धरती गगन खिल गये तेरी धड़कन में धड़कन मेरी खो गयीदेह अधरों से पावन मेरी हो गयीयूँ संवारा मुझे प्रीत की रीत नेशब्द के भाव से सब वचन खिल गये दो बदन प्रेम…
