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यादगार होली

मंजू लता (राजस्थान) किशोर को होली के पर्व से बहुत डर लगता है। होली के रंग-गुलाल से घृणा का जो सबक बचपन में दिया गया था, शायद उसी कारण उसे होली से नफ़रत है। टीवी, अखबार और पूरे वातावरण में फागुनाहट की मस्ती तारी है। लोग होली की तैयारियों में मशगूल हैं। इस दिन तमाम…

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गजब का ज्ञान दे दिया मुख्यमंत्री ने

कुशलेन्द्र श्रीवास्तव गजब का ज्ञान दिया है उत्तराखंड के नव नवेले मुख्यमंत्रीजी ने ये मान लो की आंखें खुली की खुली रह गई और कानों ने काम करना बंद कर दिया । वर्षों से हमें पढ़या जाता रहा है कि हमारा देश अंग्रेजों का गुलाम रहा है इसके चक्कर में ही अमृत महोत्सव मनाया जा…

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बैसाख़ी के फिर मेले हों

श्रीमती कविता मल्होत्रा इतिहास गवाह है कि जहाँ रूह सहमत होती है वहीं रब की रहमत होती है।किसी भी तरह की अनहोनी का अंदेशा सबसे पहले अपनी ही रूह को होता है।ये और बात है कि मानव की चेतना अपने ही चैतन्य के इशारे को नज़रअंदाज़ कर देती है।यूँ तो मानव की पहुँच चाँद तक…

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मैं दूर दृष्टि धारक संजय

में दूर  दृष्टि धारक संजय,  आंखों देखा हाल बताया, धृतराष्ट्र के , कुल के काल को  मैं भी ना बदल पाया । पांचाली की हंसी , धृतराष्ट्र की चुप्पी,  शकुनि के  पाशो ने  सारा महाभारत करवाया । पति प्रेम में गांधारी ने भी  धृतराष्ट्र का साथ दिया दुर्योधन के सिंहासन के खातिर  अपने कुल का…

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परिवार

ढूँढ़ रही इस जगत में फिर     खुशहाली से भरा परिवार।     जिसमें थी बसती एकता     नेह अरु प्रेम गले का हार।     दादा-दादी औ चाचा-चाची     ताऊ ताई बुआ हर कोई।     चहल-पहल से घर जो गूँजे     सारी ही वो पलटन खोई।     सिमट गया दो जन में घर     रहता था…

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गुरु दक्षिणा

सुचित्रा बहुत विचलित हो गई थी। उसने इतना अपमान अब तक कभी नही सहा था। भलाई करने का आज के जमाने में यह परिणाम मिलता है, उसे आज महसूस हुआ था। पड़ोस के घर से संयम उसके पास संगीत सीखने आता था। जबसे वह पड़ोस में रहने आया था तभी से उसके पास आ रहा…

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विदा दो दिल्ली (सुमनमाला ठाकुर)

(राज्य सभा डाइरेक्टर, अंग्रेज़ी की प्रोफ़ेसर, सुमनमाला ठाकुर, के दिल्ली शहर के आख़िरी कुछ पलों की अभिव्यक्ति, तमाम दिल्ली वसियों के नाम) तीन दशको से ज़्यादा मेरे आसपास, हरदम मंडरातीरही हो, तुम दिल्ली। मेरी सुबहों की रोज़ाना-रूटीन हर दिन, और शामों की वो गुनगुनाती थकन, फिर भी थे आँखों में सपने हज़ारों, और संग मेरे…

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खूब लड़ी ‘दीदी’ वह तो …..(सम्पादकीय)

मनमोहन शर्मा ‘शरण’ (प्रधान संपादक) होली भी गई और जिस बात की आशंका भी वह भी हो ली । कोरोना ने एक बार फिर से अपना रौद्र रूप दिखाना प्रारंभ कर दिया है । जबकि लोगों ने लगातार गिरते आंकड़ों को देखकर–सुनकर मानों निश्चित होना प्रारंभ कर दिया था कि शायद हम कोरोना से मुक्त…

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“भव्य रंग महोत्सव -1 का सफल आयोजन

27 मार्च 2021 -शनिवार ” विश्व रंग मंच दिवस” के अवसर पर शादी पुर – रंजीत नगर,नई दिल्ली के “सफ़दर स्टूडियो” में “भव्य कल्चरल सोसाइटी” के सौजन्य से” भव्य रंग महोत्सव-१” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ हर्षित के मधुर स्वरों में गिटार के साथ गणेश वंदना के साथ किया गया। उसके बाद तीन…

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रंगों में उल्लास (होली पर दोहे)

“रंगों “में सद्भावना“रंगों “में मुस्कान ।रंग; देव लोक कासृष्टि को वरदान ।।*रंगों में उल्लास छिपाऔर गुंथा है प्यार।रंग पिरोय फूल हैंजो फूलों का हार ।।*रंगों में अनुराग भरारंगो में विश्वास।रंग दिलों के पास काएक पावन एहसास ।।*रंगों में इस धरा कीसौंधी-सौंधी गंध।रंग हृदय से देखतेकरके आंखें बंद।।*रंगो में वो मीठा पनमुख में ज्यो मकरंद ।जो…

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