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एयर चीफ मार्शल आर. के. भदौरिया ने संभाला वायु सेना प्रमुख का कार्यभार

नई दिल्ली: एयर चीफ मार्शल राकेश कुमार सिंह भदौरिया ने 30 सितम्बर  को नए वायु सेना प्रमुख के रूप में अपना कार्यभार संभाला। आर के भदौरिया ने अपने पूर्ववर्ती एयर चीफ मार्शल बीरेंद्र सिंह धनोआ के सेवानिवृत होने पर यह कार्यभार संभाला। भारतीय वायु सेना के एक प्रवक्ता ने कहा, “नेशनल वॉर मेमोरियल में पारंपरिक…

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ऋतुओं को निगलने लगा प्रदूषण: बदलता मौसम, घटता जीवन

डॉ विजय गर्ग भारत में सदियों से छह ऋतुओं (बसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत और शिशिर) का अपना एक क्रम रहा है। हर ऋतु अपने विशिष्ट सौंदर्य, मौसम और जीवनशैली के साथ आती थी। लेकिन आज, बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के कारण यह प्राकृतिक क्रम टूट रहा है। ऐसा प्रतीत होता है जैसे प्रदूषण…

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अब के बरस मानव चेतना की जागृति के दीप जलाएँ

कविता मल्होत्रा (संरक्षक एवं स्थाईस्ताभ्कर) राम राज्य की आकांक्षा तो सभी किया करते हैं मगर खुद राम होने से डरते हैं।अग्नि परीक्षा महिलाओं की ज़िम्मेदारी है।आज तक द्रौपदी का चीरहरण जारी है। कितने युग बीत गए मगर उस युग की महक आज भी हर एक मन को सुवासित करती है।कौन है जो मीरा के भक्तिभाव…

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गर यदि

बाजार में बिक जाते गर यदि गम सारे बेच देते खुशियों की दुकान होती गर यदि थोड़ी सी खरीद लेते। सोने से थकान मिट सकती है दर्द नहीं मिटते नीदों में आने वाले स्वप्न हमेशा साकार नहीं होते। बिछड़ जाएं मुसाफिर गर यदि वापिस नहीं मिलते रास्ते सैकड़ों हैं जाने के लेकिन सब मंजिल पर…

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अभिव्यक्ति साहित्यिक संस्था का पंचम वार्षिक समारोह धूमधाम से सम्पन्न हुआ

दिनांक १६ अगस्त 2020 को अभिव्यक्ति साहित्यिक संस्था का पंचम वार्षिक समारोह ऑनलाइन लाइव काव्य प्रसारण के माध्यम से सम्पन्न हुआ। छह दिनों का यह कार्यक्रम अभिव्यक्ति मंच के लाइव पटल आगाज़ (गीत ग़ज़ल) से प्रसारित हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता परम आदरणीय आशु कवि राजेश राज जी की उपस्तिथि में सभी कवियों एवं कवयित्रियों ने…

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( पितृ दिवस पर )

दर्द का मंज़र है तुम कहां हो पापा,ज़ख्मी मेरा दर है तुम कहां हो पापा । जुल्म का चश्मा रखे हैं अब अपने हीपीठ में नश्तर है तुम कहां हो पापा। छा चुकी हैं बर्बरी घटाएं शब में ,खौफ में छप्पर है तुम कहां हो पापा। झुकने से मिलती विजय गलत है बापूटूटने को घर…

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धीरे – धीरे हम भारतीय संस्कृति को स्वयं नष्ट करते जा रहे..!

ग्रामीण क्षेत्रों में माहौल बदल रहा और अब आधुनिकता के नाम पर जो कुसंस्कृति कभी शहरों की पहचान मानी जाती थी अब गांवों में पैर पसार चुकी है । आधुनिकता के नाम पर जमकर अश्लिलिता परोसी जा रही और इसका लुत्फ घर के सभी सदस्य उठा रहें । अगर बात करें शादी विवाह में बढ़ते…

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मीडिया और महिला

इस तथ्य से कोई इनकार नहीं करता है कि भारतीय प्रेस में महिलाओं की बढ़ती उपस्थिति पिछले एक दशक में पहले से कहीं अधिक स्पष्ट हो गई है। उन्हें हर जगह स्पॉट किया जाता है – जहां भी समाचार उत्पन्न होता है, समाचार डेस्क को संभालना, संस्करणों की निगरानी करना और न्यूज़रूम में चारों ओर…

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रहे इस रूह की चूनर धानी

मौसम ने करवट ली और शीत ऋतु ने आगमन की सूचना दी है।लेकिन भानु काका के तेवर अब भी तीखे हैं।ग्लोबल वार्मिंग की ज़िम्मेदारी लेने के बजाय मानव जाति अब भी बदन उघाड़ू परिधानों के फ़ेवर में है।समस्या के मूल में न जाकर सतही समाधान खोजना और लापरवाही से संतुष्ट हो जाना ये असँवेदनशील पीढ़ी…

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