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भगत सिंह: “इंकलाब से आज तक”

“क्रांति बंदूक की गोली से नहीं, बल्कि विचारों की ताकत से आती है।” भगत सिंह का जीवन केवल एक क्रांतिकारी गाथा नहीं, बल्कि एक विचारधारा का प्रतीक है। उनकी शहादत से पहले उनके विचारों की ताकत थी, और उनकी शहादत के बाद भी उनका प्रभाव अमर है। आज जब हम आर्थिक असमानता, सांप्रदायिकता और भ्रष्टाचार…

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अभिव्यक्ति संस्था के कार्यक्रम “होली की बहार, काव्य की बौछार” में रचनाकारों ने खेली काव्य-होली

दिनांक १४ मार्च २०२१ का दिन अभिव्यक्ति साहित्यिक संस्थाके लिये अत्यन्त महत्वपूर्ण रहा क्योंकि “अभिव्यक्ति साहित्यिक संस्था” की ओर से, होली के उपलक्ष में, “होली की बहार, काव्य की बौछार” कार्यक्रम का भव्य आयोजन, रोहिणी (दिल्ली) में कार्यक्रम आपकीं दोस्त Madhu Madhubala Labana जी के निवास स्थान पर सफ़लतापूर्वक सम्पन्न हुआ। अभिव्यक्ति मंच विगत छः…

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आशा-आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का स्वैच्छिक योगदान

-डॉ. प्रियंका सौरभ क्या राष्ट्र के स्वास्थ्य की देखभाल करने वाली इन महिलाओं को श्रमिक का दर्जा नहीं दिया जाएगा? आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की ज़रूरतें असाधारण नहीं हैं; उन्हें न्यूनतम वेतन, पेंशन, ग्रेच्युटी, तृतीय श्रेणी कर्मचारी का दर्जा और सामाजिक सुरक्षा प्राप्त है। फिर भी, सरकारें उन्हें औपचारिक श्रम अधिकारों से वंचित रखती हैं…

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करोना संकट से भुखमरी के कगार पर खड़ा प्राइवेट शिक्षक !

एक तरफ जहां प्राइवेट , नॉन रेगुलर  और अंशकालिक शिक्षकों को इस भयावह संकट काल में शिक्षण संस्थाओं ने वेतन देने से मना कर दिया है और भुखमरी के कगार पर खड़े ये प्राइवेट अध्यापक आज डिप्रेशन में जी रहे , वहीं दूसरी तरफ सरकार भी इन्हे भूल गई है क्योंकि ना इन्हे बेरोजगारों की…

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चीत्कार

निः शब्द हो जाती है अंतरात्मा भी उस पल  ख्वाबों को अपने सामने जब तिनका तिनका बिखरते देखती है । लेकिन खुद का एक यकीं हूं मै  जरूरत नहीं मुझे बेपरवाही की खुद में सुरूर हूं खुद का गुरूर हूं अपनी ही ढाल हूं हां मै कमाल हूं । दुश्वारियों से बिखरती नहीं फर्ज़ से…

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दुर्घटना पीड़ितों के लिए “कैशलेस” उपचार : नीयत नेक, व्यवस्था बेकार

इस देश में जब कोई सड़क पर दुर्घटनाग्रस्त होता है, तो सबसे पहले यह नहीं पूछा जाता कि ज़ख्म कितना गहरा है — पहले यह पूछा जाता है कि “पहचान पत्र है?”, “बीमा है?”, “अस्पताल पंजीकृत है?” और फिर अंत में — “बचा पाएँगे या नहीं?”। मानो पीड़ित की जान से पहले कागज़ ज़रूरी हो।…

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 ‘बुरा न मानो होली है : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव

बुरा न मानो होली है ……अब तो कोई बुरा मानता भी नहीं है और न ही कोई रंग से भय खात है, वैसे कोई किसी को रंग लगाता भी नहीं है, सारे चेहरे स्याह रंग में यूं ही रंगे हुए हैं । राजनीति के मैदान में रंगों का त्यौहार तो चलता ही रहता है, वो…

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दिल्ली में हिंसा के कारण परीक्षा नहीं दे पाने वाले विद्यार्थी चिंता न करें : सीबीएसई

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने उत्तर पूर्वी दिल्ली में रहने वाले 10वीं और 12वीं के उन सभी छात्रों को आश्वस्त करते हुए उन्हें चिंता नहीं करने के लिए कहा। सीबीएसई की और से कहा गया कि वह परीक्षा की नई तिथियों की घोषणा जल्द की जाएगी।  दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग ने परीक्षा कार्यक्रम…

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मदर टेरेसा : ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’

जिंदगी उसी की जिसकी मौत पर जमाना अफसोस करे।यूं तो हर शख्स आता है दुनिया में मरने के लिए।। हां वैसे तो बहुत सारे लोग आते हैं और चले जाते हैं पर याद वहीं रहते हैं जिन्होंने इस देश को अपनी एक अलग छवि दी है, अपना एक अलग रूप दिया है, अपनी एक अलग…

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हृदय के मोती

डॉ उषा किरण (पूर्वी चंपारण, बिहार ) निशा नहाती ज्योत्सना में,        मुग्ध सी कुछ हो रही है।              उद्वेलित होते अंतर में ,               नूतन सी कुछ बो रही है। कुछ कोलाहल हो रहे हैं,       दूर अंबर के प्रांगण में।         आज फिर लहरा उठा है,           कल्पतरु मन के आँगन में। हास…

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