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जन भागिदारी के बिना पर्यावरण संरक्षण असंभव  है

विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष (5 जून,) जन भागिदारी के बिना पर्यावरण संरक्षण असंभव  है लाल बिहारी लाल नई दिल्ली । जब इस श्रृष्टि का  निर्माण हुआ तो इसे संचालित करने के लिए जीवों एवं निर्जीवों का एक सामंजस्य  स्थापित करने के लिए जीवों एवं निर्जीवों के बीच एक परस्पर संबंध का रुप प्रकृति ने…

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हर धड़कन हो आरती वँदन

कविता मल्होत्रा (संरक्षक – स्तंभकार, उत्कर्ष मेल) मीरा सा अरमान बनें, सब नई उम्मीदों का आसमान बनें विषपन करके भी सोचें यही, हर साँस का इस्तेमाल कैसे हो ✍️ लगभग दो वर्ष पूरे होने को आए, लॉकडाऊन का शाब्दिक अनुवाद नई सदी को परिभाषित करने लगा है।लेकिन तमाम महकमों की तालाबंदी के बावजूद भी अँतर…

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हमेशा ऑनलाइन’ रहने के मायाजाल  की दौड़ में थकते युवा

 डिजिटल पहचान की अंधी प्रतिस्पर्धा ने मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक जीवन और वास्तविक अनुभवों को संकट में डाल दिया है। सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव युवाओं के मानसिक संतुलन और जीवनशैली पर गहरा असर डाल रहा है। लाइक, व्यूज़ और फॉलोअर्स की प्रतिस्पर्धा ने उन्हें एक अदृश्य दबाव में धकेल दिया है, जहाँ डिजिटल मान्यता ही…

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काश मैं मोबाइल होती

“काम बहुत था यार आज, बुरी तरह से थक गया हूँ।” – सोफे पर अपना बैग रखते हुए अजीत ने कहा।  “अजीत जल्दी से फ्रेश हो जाओ, तब तक मैं चाय बना देती हूँ।”  “ठीक है, मधु! ” कहते हुए अजीत बाथरूम में चला गया। अजीत के फ्रेश होकर हॉल में आते ही माधुरी चाय-पकौड़े…

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समस्याएँ –लाँकडाउन में मजदूरों की।

अभी कुछदिनों पूर्व तक प्रथम लॉकडाउन के दौरान देश में अचानक बढ़ती कोरोना संक्रमण की संख्या के लिए देशवासियों , नेताओं ,पत्रकारों  मीडिया और अन्य उन सभीसामान्य लोगों के द्वारा जो  लॉक डाउन के पश्चात देश को कोरोना मुक्त होजाने का स्वप्न देख रहेथे,उन तबलीगी जमातियों को अत्यधिक कड़वाहट से भर कर दोषी ठहराने लगेथे…

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पिता (कविता-8)

बाप के ही अंश होते राम,श्याम,कंस होते धर्म का ये भाव है की उन्हें न बिसारिए। दोनों हाथ जोड़कर गर्दनें को मोड़कर सामने से पैर छूके स्वयं को उबारिए। जहाँ कहीं आप   फँसें देख चार लोग  हँसे पुरखों की बात मान पिता को पुकारिए। नीति,रीति,ज्ञान लेके मान व सम्मान लेके लोकहितकारी बन पिताजी को तारिए।।…

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सवाल किससे करें?

ज़हन में कई हैं ख्याल, सवाल किससे करें? सियासत का बुरा हाल, सवाल किससे करें? करते हैं नंगा नाच, संसद में अब नेता, अपनी ही ठोंके ताल, सवाल किससे करें? सब चाहते बिरयानी, चाँदी के थाल में, ना खाएं चावल दाल, सवाल किससे करें? लूट, हत्या व डकैती, राहजनी बेख़ौफ़, सड़क पर ताण्डव कमाल, सवाल…

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“मिल जाओ मोहन”

एक छोटे से गांव में मोहन अपनी मां के साथ रहता था। एक छोटा सा खेत था उनके पास। उसमें फसल उगाकर मां मोहन की परवरिश कर रही थी। मोहन एक होनहार छात्र था। कक्षा में हमेशा प्रथम आता।मेहनत से पढ़ाई करता। जो समय बचता उसमें मां की काम में सहायता कर देता। पिता का…

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“एक पेड़ मां के नाम लगाएं…” : पीएम मोदी

‘मन की बात’ नई दिल्‍ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव के बाद किये गए पहले ‘मन की बात’ रेडियो प्रोग्राम के 111वें एपिसोड में कहा कि मैंने कहा था, चुनाव नतीजों के बाद फिर मिलूंगा, उम्‍मीद करता हूं कि आप सब अच्‍छे होंगे. मैंने विदा लिया था, फिर मिलने के लिए. इस बीच मुझे…

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जो बाल्कनी हमें मिली थी

जो बाल्कनी हमें मिली थी हमनें कमरा बनवा डाला। परिपूर्ण हों आशाएं छोटा एसी लगवा डाला। बहुत खुश थे हम बिटिया को नया रूम मिलेगा उसका भोला भाला चहेरा अब खुशी से झूम खिलेगा। इसी कल्पना में खोए थे इतने में बिटिया आईं कमरा उसने भी देखा पर ना वो मुस्काई। कुछ संजीदा भाव उसके…

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