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प्रदूषण से निपटने को दिल्ली सरकार स्कूली छात्रों को मास्क बांटेगी

दिवाली के जाते ही मानो सूरज की चमक दिल्ली और एनसीआर में कुछ कम हो गयी है, पूरा दिन प्रदूषण की परत घेरे रहती है.  चहुँ और लोग, बच्चे आपको मास्क लगाये दिख रहे हैं.  जान है तो जहाँ है भाई.   दिल्ली सरकार भी हरकत में आई है और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बताया कि…

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बच्चों को दे स्वच्छ वातावरण, ताकि खुलकर बोल सके

घर में कोई शादी हो या पूजन – पाठ, या कोई भी अन्य आयोजन, खर्च और रिश्तेदारों की फिकर से इतर इन आयोजनों का सबसे अधिक आनंद इस घर के बच्चे ही उठाते हैं। जिन्हें न खर्च की फिक्र होती है न ही रिश्तेदारों के नखरे झेलने की, वह तो अपनी ही मौज में मस्त…

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व्यंग्य – जब  रावण ने लंका में कराई जाति जनगणना..!

रावण खुद को आठवीं पास त्रिलोक विजेता कहता था, और अचानक उसे जरुरी काम से किस्किंधा निकलना पड़ा तो रास्ते में उसे युवराज ने बताया की तुम्हे कुछ दिनों के लिए वहां का उपमुख्यमंत्री नियुक्त किया जा रहा। रावण चौक गया और पूछा युवराज मै दशानन किंग हूँ फिर ये नाइंसाफी क्यों तो युवराज ने…

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माँ (कविता-7)

पूरे घर का काम समेट कर थकान से चूर सुस्ताने को लेटी माँ बेटी के आते ही फुर्ती से रसोई में बेसन,सूजी ढूँढ पकौड़ी-हलवा बनाने लगती है! सबके सामने चुप रहने वाली माँ बेटी के आते ही उसके सम्मुख अकेले में मुखर हो उठती है! कुछ दिनों मायके में रहने आई बेटी को जाते समय…

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होली में सुरक्षा और सावधानी जरूरी

समुद्र में डूबने से उतने लोगों की मौत नहीं हुई, जीतने की नशा में डूब कर मर गए होली का संदेश : एकता और प्यार होली भारत का एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जो रंगों, प्यार और खुशी का प्रतीक है। यह त्योहार हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है, जो आमतौर पर मार्च…

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वो जीत जो जीत सी ना लगे, वो हार जो हार सी न लगे

सम्पादकीय : मनमोहन शर्मा ‘शरण ‘ हमारे भारत की सुन्दरता–भव्यता यहां के त्यौहारों में देखते ही बनती है । हालांकि 2020 वर्ष कोरोना काल की भेंट चढ़ गया । जनता ने अपना दृष्टिकोण भी सूक्ष्म कर लिया है और आज में जीना प्रारंभ कर दिया जिसमें आवश्यकता की, रोजमर्रा की चीजें और स्वास्थ्य ठीक है,…

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नौकरी ही नहीं तो शिक्षक पात्रता परीक्षा के नाम पर ठगी क्यों ?

(   हरियाणा के मुख्यमंत्री का विधान सभा में जवाब कि प्रदेश में प्राथमिक शिक्षकों की अब जरूरत नहीं कितना शातिराना है सोचिये? जब प्रदेश में शिक्षकों की जरूरत ही नहीं तो फिर क्यों पिछले दस सालों से शिक्षक पात्रता के नाम पर बार-बार बेरोजगार युवाओं की जेब काटी जाती रही इनको तो सब पता ही…

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नव गान सुन

डॉ. वर्षा महेश “गरिमा” नव वर्ष में, नव हर्ष में जीवन के हर उत्कर्ष में हम लिख रहे नव गान सुन। कभी फर्श पर, कभी अर्श पर जीवन के हर संघर्ष पर हम लिख रहे नव गान सुन कभी धूप में कभी छांव में उम्मीदों के नए गांव में हम लिख रहे नव गान सुन।…

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क्या सचमुच सिमट रही है दामन की प्रतिष्ठा?

समय के साथ परिधान और समाज की सोच में बदलाव आया है। पहले “दामन” केवल वस्त्र का टुकड़ा नहीं, बल्कि मर्यादा और संस्कृति का प्रतीक माना जाता था। पारंपरिक वस्त्रों—साड़ी, घाघरा, अनारकली—को महिलाओं की गरिमा से जोड़ा जाता था। “दामन की प्रतिष्ठा” अब भी बनी हुई है, परंतु उसकी परिभाषा बदल चुकी है। परंपरा और…

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रंग ना लगाया करो

रंग जितने हो बेशक लगाया करो। चाहे जितना मुझे तुम सताया करो।। रोज खेलो भले मुझसे होली मगर। सामने सबके रंग न लगाया करो।। इस होली में घर तेरे आऊँ प्रिये। गोरे गालों पे, रंग मैं लगाऊँ प्रिये।। चाहे लहंगा और चुनरी पहिनना पड़े। चाहे तेरी सखी मुझको बनना पड़े।। सब करूँगा सनम मैं तुम्हारे…

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